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हौसला रखकर मौत के मुंह से अपनों को बचा लाए परिजन

Fri, 28 May 2021 01:22 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 01:22 AM IST
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honsla rakkar mot ke muh se apne ko bacha laye parijan
हौसला रखकर मौत के मुंह से अपनों को बचा लाए परिजन
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झांसी। कोरोना को लेकर फैले चारों ओर नकारात्मकता वाले माहौल के बीच कई परिजन अपनों को मौत के मुंह से निकाल ले आए। जब अस्पतालों में बेड नहीं मिले और डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, तब परिजनों ने हार मानने के बजाए मरीज की हिम्मत बांधे रखे। घर पर ऑक्सीजन सपोर्ट पर मरीज को रखकर दवाएं चालू रखीं। खानपान से लेकर स्वास्थ्य संबंधी हर बात का ध्यान रखा तो धीरे-धीरे परिणाम सकारात्मक आने लगे। अब वो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं।
कोरोना की दूसरी लहर झांसी पर भी बहुत भारी पड़ी है। इस महामारी की चपेट में आकर कई युवाओं ने अपनी जान गंवा दी है। इसमें कई ऐसे लोग भी रहे, जिनकी मौत ऑक्सीजन या फिर अस्पतालों में बेड न मिल पाने की वजह से हुई। इस बीच, कई ऐसे लोग भी रहे, जो अपने मरीज को लेकर बेड के लिए अस्पताल-अस्पताल भटकते रहे मगर जब भर्ती होने की जगह नहीं मिली। तो घर को ही अस्पताल बना लिया। किसी तरह ऑक्सीजन की व्यवस्था की। डॉक्टरों की मदद से इलाज शुरू किया। खानपान से लेकर दिनभर उल्टा लिटाए रखने, नियमित भांप देने, नेबुलाइज कराने और आयुर्वेदिक नुस्खे तक अपनाए और परिणाम भी सकारात्मक आया। मरीज ठीक भी हो गए।
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ये हैं मामले
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केस-1
55 प्रतिशत ऑक्सीजन, 85 फीसदी फेफड़े पर असर के बावजूद हुए ठीक
17 अप्रैल में सीपरी बाजार निवासी संजीव सचदेवा (56) को बुखार आने के बाद सांस लेने में समस्या हुई तो परिजनों ने डॉक्टरों की सलाह पर सीटी स्कैन कराया। जांच में उनका सीटी स्कोर 25 में से 21 आया। जबकि, ऑक्सीजन लेवल 55 पहुंच गया। उनका बेटा वरदान और बेटी तान्या मोटरसाइकिल पर लेकर भर्ती कराने के लिए मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पताल पहुंचे मगर कहीं पर भी बेड नहीं मिला। डॉक्टरों ने भी कह दिया कि हालात बहुत गंभीर है और बचना मुश्किल है। परिजन उन्हें घर पर ही ले आए। बेटी ने बताया कि पिता की शुगर भी 560 पहुंच गई थी। पत्नी नीरज ने भी संजीव की खूब सेवा की। दिल्ली के डॉक्टर से बात कर दवाएं चालू कीं। कहीं से सिलेंडर की व्यवस्था करके घर पर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। धीरे-धीरे हालत सुधरने लगी। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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केस-2
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वेंटिलेटर पर पहुंचने की थी हालत, बेड नहीं मिला तो घर पर ठीक हुई वृद्धा
20 अप्रैल को आदर्श नगर निवासी 65 वर्षीय किशोरी देवी की हालत बहुत गंभीर हो गई थी। उन्हें बुखार, खांसी के साथ-साथ सांस फूलने लगी तो बेटा जितेंद्र चौरसिया एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा। डॉक्टर की सलाह पर एक्सरे कराया तो निमोनिया निकला। ऑक्सीजन घटकर 70 प्रतिशत पर पहुंच गई। परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे तो बेड नहीं मिला। बेटा उन्हें घर ले आया। वृद्धा को इस कदर कमजोरी आ गई थी कि उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया था। डॉक्टर ने फोन पर ही चिकित्सीय परामर्श दिया और कोविड से जुड़ी दवाएं शुरू की। घर पर सिलेंडर से ऑक्सीजन सपोर्ट दिया। मुलैठी, नींबू, अदरक का रस दिया। एलोपैथिक के साथ होम्योपैथी दवा भी चलाईं। करवट के बल लिटाए रखा। हल्दी का दूध देते रहे। जबरदस्ती खाना खिलाते रहे। परिजनों के सपोर्ट से किशोरी को हिम्मत मिली और अब वह पूरी तरह ठीक हैं।
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