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हाइटेंशन लाइन बनी किसानों की ‘टेंशन’
Sat, 06 Apr 2019 01:28 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 06 Apr 2019 01:28 AM IST
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सूखी खड़ी फसलों के लिए खेतों से निकले बिजली के तार टेंशन साबित हो रहे हैं। गर्मी शुरू होते ही किसानों की खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बिजली की एक चिंगारी से ज्वाला बनकर राख हो जाती है और कृषकों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाता है। जिले भर में लाखों रुपये की गेहूं की फसल आग लगने से राख में बदल चुकी है। अधिकांश घटनाएं बिजली की लाइन में फाल्ट होने की वजह से हुई है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में बिजली की लाइनों का जाल फैला है। इन लाइनों पर सिर्फ क्रॉसिंग वाले स्थानों पर ही सुरक्षा के लिहाज से गार्डिंग लगाई गई है, जबकि बाकी खेतों में खुले में ही हाइटेंशन तार झूलते रहते हैं। गर्मियों के दिनों में अधिकांश खेतों से निकले हाइटेंशन बिजली के तार ढीले रहने की वजह से आंधी या हवा चलने की वजह से आपस में टकराते हैं, जिससे लाइनों में फाल्ट होने पर तारों से निकली चिंगारियां निकलती हैं और खेतों में आग की बड़ी वजह बन जा रही है।
पिछले एक महीने में जिले में डेढ़ दर्जन स्थानों पर आग की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें खेेतों में अधिकांश आग की घटनाएं हाइटेंशन तारों में फाल्ट होने पर निकली चिंगारियों की वजह से होना बताई गई हैं। इन घटनाओं से किसानों की कई एकड़ों में उगाई गई फसलें जलकर राख हो गई हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। आग लगने के बाद बिजली विभाग और प्रशासन द्वारा आंकलन किया जाता है, लेकिन उसकी रिपोर्ट आने में ही कई सप्ताह लग जाते हैं, ऐसे में साल भर फसल आने की बाट जोह रहे किसानों को सरकार की ओर से दी जाने वाली मदद का लंबे समय तक इंतजार करना होता है और अगले सीजन में आने वाली फसल का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ता है। जहां भी पुराने व जर्जर तार लगे हुए हैं या फिर ढीले होकर आपस में टकरा रहे हैं, उन स्थानों का सर्वे कराकर तार बदलने का कार्य किया जाएगा। जहां भी बिजली के तारों की वजह से आग लगी है, जांच होगी। विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा जांच कराने के बाद ही आर्थिक मदद दी जाती है।
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आग बुझाने की दो गाड़ियों के सहारे जिला
गर्मियों के दिनों में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार एक साथ बहुत से स्थानों पर आगजनी की घटनाएं होती हैं। लेकिन, पूरे जिला में आग बुझाने के लिए मात्र दो गाड़ियां ही उपलब्ध हैं। दोनों गाड़ियां जिला मुख्यालय पर रहती हैं। हालांकि, फायर ब्रिगेड की एक चार सौ लीटर क्षमता की छोटी गाड़ी महरौनी में उपलब्ध है, लेकिन खेतों में या फिर अन्य स्थानों पर आग की बड़ी घटनाएं होने पर यह नाकाफी साबित होती है। जानकारों के अनुसार गर्मियों के दिनों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल विभाग के लिए तालबेहट व महरौनी में भी कम से कम दो-दो गाड़ियां होना जरूरी है, जबकि शहर में कम से कम एक और फायर ब्रिगेड की गाड़ी होना जरूरी है, तभी आग की घटनाएं होने पर समय से आग बुझाने में मदद मिल सकती है। दमकल विभाग के पास गाड़ियों की उपलब्धता कम होने के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में मुख्यालय से पहुंचने में ही एक घंटे से अधिक का समय लग जाता है और तब तक आग से किसानों व अन्य लोगों को काफी नुकसान हो जाता है।
बिजली के पुराने और जर्जर तारों का सर्वे कराकर बदलवाए जाएंगे। जहां भी हाईटेंशन लाइनों से आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा जांच कराई जाएगी।
- शैलेंद्र कटियार, अधिशासी अभियंता, बिजली
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में बिजली की लाइनों का जाल फैला है। इन लाइनों पर सिर्फ क्रॉसिंग वाले स्थानों पर ही सुरक्षा के लिहाज से गार्डिंग लगाई गई है, जबकि बाकी खेतों में खुले में ही हाइटेंशन तार झूलते रहते हैं। गर्मियों के दिनों में अधिकांश खेतों से निकले हाइटेंशन बिजली के तार ढीले रहने की वजह से आंधी या हवा चलने की वजह से आपस में टकराते हैं, जिससे लाइनों में फाल्ट होने पर तारों से निकली चिंगारियां निकलती हैं और खेतों में आग की बड़ी वजह बन जा रही है।
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पिछले एक महीने में जिले में डेढ़ दर्जन स्थानों पर आग की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें खेेतों में अधिकांश आग की घटनाएं हाइटेंशन तारों में फाल्ट होने पर निकली चिंगारियों की वजह से होना बताई गई हैं। इन घटनाओं से किसानों की कई एकड़ों में उगाई गई फसलें जलकर राख हो गई हैं, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। आग लगने के बाद बिजली विभाग और प्रशासन द्वारा आंकलन किया जाता है, लेकिन उसकी रिपोर्ट आने में ही कई सप्ताह लग जाते हैं, ऐसे में साल भर फसल आने की बाट जोह रहे किसानों को सरकार की ओर से दी जाने वाली मदद का लंबे समय तक इंतजार करना होता है और अगले सीजन में आने वाली फसल का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ता है। जहां भी पुराने व जर्जर तार लगे हुए हैं या फिर ढीले होकर आपस में टकरा रहे हैं, उन स्थानों का सर्वे कराकर तार बदलने का कार्य किया जाएगा। जहां भी बिजली के तारों की वजह से आग लगी है, जांच होगी। विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा जांच कराने के बाद ही आर्थिक मदद दी जाती है।
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आग बुझाने की दो गाड़ियों के सहारे जिला
गर्मियों के दिनों में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार एक साथ बहुत से स्थानों पर आगजनी की घटनाएं होती हैं। लेकिन, पूरे जिला में आग बुझाने के लिए मात्र दो गाड़ियां ही उपलब्ध हैं। दोनों गाड़ियां जिला मुख्यालय पर रहती हैं। हालांकि, फायर ब्रिगेड की एक चार सौ लीटर क्षमता की छोटी गाड़ी महरौनी में उपलब्ध है, लेकिन खेतों में या फिर अन्य स्थानों पर आग की बड़ी घटनाएं होने पर यह नाकाफी साबित होती है। जानकारों के अनुसार गर्मियों के दिनों में आग की घटनाओं से निपटने के लिए दमकल विभाग के लिए तालबेहट व महरौनी में भी कम से कम दो-दो गाड़ियां होना जरूरी है, जबकि शहर में कम से कम एक और फायर ब्रिगेड की गाड़ी होना जरूरी है, तभी आग की घटनाएं होने पर समय से आग बुझाने में मदद मिल सकती है। दमकल विभाग के पास गाड़ियों की उपलब्धता कम होने के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में मुख्यालय से पहुंचने में ही एक घंटे से अधिक का समय लग जाता है और तब तक आग से किसानों व अन्य लोगों को काफी नुकसान हो जाता है।
बिजली के पुराने और जर्जर तारों का सर्वे कराकर बदलवाए जाएंगे। जहां भी हाईटेंशन लाइनों से आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा जांच कराई जाएगी।
- शैलेंद्र कटियार, अधिशासी अभियंता, बिजली