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हीट स्ट्रोक, डायरिया और बुखार ने किया बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2016 01:41 AM IST
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civil hospital
- फोटो : amar ujala
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झांसी। बेहद गर्मी और उमस के साथ उल्टी, दस्त, हीट स्ट्रोक और बुखार पीड़ितों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में दो सप्ताह पहले तक अमूमन ढाई सौ मरीज आते थे, पर अब यह आंकड़ा पांच सौ से आसपास पहुंच गया है।
खास बात यह है कि इतने मरीजों को देखने का जिम्मा सिर्फ एक डॉक्टर के कंधों पर है। भीड़ अधिक होने पर डॉक्टर अच्छी तरह से मरीजों को देख नहीं पाते हैं। यानी सेहत भगवान भरोसे।
पिछले 15 दिनों से तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है। इस बीच कभी बूंदाबांदी हुई, कभी बदली तो कभी तेज धूप और उमस। डाक्टरों का कहना है कि ऐसा मौसम बीमारियों को न्यौता देता है। सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ रही। इन सभी मरीजों को सिर्फ डॉ. डीएस गुप्ता ही देख रहे थे। अनियंत्रित भीड़ को देख वह कभी झुल्ला जाते तो कभी मरीजों पर चिल्ला देते। मगर फिर भी उन्होंने सभी मरीजों को देखा। जिला अस्पताल के एक फिजीशियन का तबादला हो चुका है, जबकि दूसरी महिला चिकित्सक मेडिकल लीव पर चल रही हैं। इससे जिला अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी में सिर्फ एक डाक्टर 500 मरीजों को कैसे देख सकता है? यह बड़ा सवाल हैै। हर मरीज को एक मिनट से भी कम समय में देखकर डॉक्टर रवाना कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों की किस तरह का इलाज मिल रहा है।
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घंटों का इंतजार
इलाज के लिए सुबह आने वाले मरीजों का घंटों इंतजार के बाद नंबर आता है। सोमवार को दोपहर सवा बारह बजे जब अमर उजाला संवाददाता मौके पर पहुंचा तो भी ओपीडी में नंबर को लेकर मरीजों में मारामारी मची हुई थी। इस दौरान लाइन में खड़े मरीज कमलेश को खड़े-खड़े चक्कर आ रहे थे। कुछ अन्य मरीजों की भी तबीयत इंतजार के दौरान ज्यादा बिगड़ गई। बुजुर्ग मरीजों का तो बहुत बुरा हाल रहा।
न होने दें पानी की कमी
डॉ. गुप्ता ने बताया कि गर्मी में शरीर में पानी की कमी हो जाती है। किडनी में इंफेक्शन हो जाता है। शरीर में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। रोजाना पांच लीटर पानी जरूर पिएं। उल्टी, दस्त होने पर तुरंत ओआरएस का घोल पिएं।
भाग जाता गार्ड, जेबकतरे का खतरा
मरीजों की लाइन को व्यवस्थित रखने के लिए ओपीडी कक्ष के बार एक गार्ड की तैनाती रहती है लेकिन वह थोड़ी देर बाद ड्यूटी करने के बाद भाग जाता है। सोमवार को भी ओपीडी गेट के बाहर सुरक्षा गार्ड नहीं दिखाई दिया। इससे भीड़ अनियंत्रित हो गई और पहले दिखाने के चक्कर में एक दूसरे के साथ धक्कामुक्की करने लगे। बताया गया कि भीड़ को देख अस्पताल में जेब कतरे भी सक्रिय हैं। जरा ही देर में वह भीड़ में लगकर पर्स चुरा लेते हैं।
ऐसे बचें बीमारी से
- धूप में निकलें तो चेहरे को अंगौछे से तौलिये से ढक लें
- डाक्टर से सलाह से लेकर धूप का चश्मा लगाकर निकलें
- इस मौसम में 24 घंटे के भीत आठ लीटर पानी जरूर पिएं
- बासी भोजन न करें, यदि खाना ठंडा है तो उसे गर्म कर लें
- बाहर निकलने के पहले एक गिलास पानी में दो चम्मच सत्तू घोलकर पी लें
- ज्यादा तेल-मसाले वाला और तला हुए खाने से परहेज करें
- बाहर निकलें तो ओआरएस के दो-चार पैकेट साथ में रखें
- धूप से आकर तत्काल बहुत ठंडा पानी न पिएं
डॉक्टरों की कमी पर शासन को लिखा
शासन को पत्र लिखा है कि जिला अस्पताल में फिजीशियन की आवश्यकता है। इसलिए या तो फिजीशियन का स्थानांतरण रोक दिया जाए अथवा किस अन्य चिकित्सक को उनकी जगह भेज दिया जाए। - डॉ. रमेश चंद्रा, सीएमएस
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खास बात यह है कि इतने मरीजों को देखने का जिम्मा सिर्फ एक डॉक्टर के कंधों पर है। भीड़ अधिक होने पर डॉक्टर अच्छी तरह से मरीजों को देख नहीं पाते हैं। यानी सेहत भगवान भरोसे।
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पिछले 15 दिनों से तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है। इस बीच कभी बूंदाबांदी हुई, कभी बदली तो कभी तेज धूप और उमस। डाक्टरों का कहना है कि ऐसा मौसम बीमारियों को न्यौता देता है। सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ रही। इन सभी मरीजों को सिर्फ डॉ. डीएस गुप्ता ही देख रहे थे। अनियंत्रित भीड़ को देख वह कभी झुल्ला जाते तो कभी मरीजों पर चिल्ला देते। मगर फिर भी उन्होंने सभी मरीजों को देखा। जिला अस्पताल के एक फिजीशियन का तबादला हो चुका है, जबकि दूसरी महिला चिकित्सक मेडिकल लीव पर चल रही हैं। इससे जिला अस्पताल की व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी में सिर्फ एक डाक्टर 500 मरीजों को कैसे देख सकता है? यह बड़ा सवाल हैै। हर मरीज को एक मिनट से भी कम समय में देखकर डॉक्टर रवाना कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों की किस तरह का इलाज मिल रहा है।
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घंटों का इंतजार
इलाज के लिए सुबह आने वाले मरीजों का घंटों इंतजार के बाद नंबर आता है। सोमवार को दोपहर सवा बारह बजे जब अमर उजाला संवाददाता मौके पर पहुंचा तो भी ओपीडी में नंबर को लेकर मरीजों में मारामारी मची हुई थी। इस दौरान लाइन में खड़े मरीज कमलेश को खड़े-खड़े चक्कर आ रहे थे। कुछ अन्य मरीजों की भी तबीयत इंतजार के दौरान ज्यादा बिगड़ गई। बुजुर्ग मरीजों का तो बहुत बुरा हाल रहा।
न होने दें पानी की कमी
डॉ. गुप्ता ने बताया कि गर्मी में शरीर में पानी की कमी हो जाती है। किडनी में इंफेक्शन हो जाता है। शरीर में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें। रोजाना पांच लीटर पानी जरूर पिएं। उल्टी, दस्त होने पर तुरंत ओआरएस का घोल पिएं।
भाग जाता गार्ड, जेबकतरे का खतरा
मरीजों की लाइन को व्यवस्थित रखने के लिए ओपीडी कक्ष के बार एक गार्ड की तैनाती रहती है लेकिन वह थोड़ी देर बाद ड्यूटी करने के बाद भाग जाता है। सोमवार को भी ओपीडी गेट के बाहर सुरक्षा गार्ड नहीं दिखाई दिया। इससे भीड़ अनियंत्रित हो गई और पहले दिखाने के चक्कर में एक दूसरे के साथ धक्कामुक्की करने लगे। बताया गया कि भीड़ को देख अस्पताल में जेब कतरे भी सक्रिय हैं। जरा ही देर में वह भीड़ में लगकर पर्स चुरा लेते हैं।
ऐसे बचें बीमारी से
- धूप में निकलें तो चेहरे को अंगौछे से तौलिये से ढक लें
- डाक्टर से सलाह से लेकर धूप का चश्मा लगाकर निकलें
- इस मौसम में 24 घंटे के भीत आठ लीटर पानी जरूर पिएं
- बासी भोजन न करें, यदि खाना ठंडा है तो उसे गर्म कर लें
- बाहर निकलने के पहले एक गिलास पानी में दो चम्मच सत्तू घोलकर पी लें
- ज्यादा तेल-मसाले वाला और तला हुए खाने से परहेज करें
- बाहर निकलें तो ओआरएस के दो-चार पैकेट साथ में रखें
- धूप से आकर तत्काल बहुत ठंडा पानी न पिएं
डॉक्टरों की कमी पर शासन को लिखा
शासन को पत्र लिखा है कि जिला अस्पताल में फिजीशियन की आवश्यकता है। इसलिए या तो फिजीशियन का स्थानांतरण रोक दिया जाए अथवा किस अन्य चिकित्सक को उनकी जगह भेज दिया जाए। - डॉ. रमेश चंद्रा, सीएमएस