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Jhansi News: आघात के मरीजों की तेजी से सुधरेगी सेहत, इंजेक्शन का ट्रायल शुरू

Sat, 25 Mar 2023 12:08 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Mar 2023 12:08 AM IST
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Health of stroke patients will improve rapidly, trial of injection started
झांसी। आघात (हाइपोवॉलेमिक शॉक) में चले जाने वाले मरीजों पर सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का ट्रायल झांसी में शुरू हो गया है। मेडिकल कॉलेज में अब तक पांच मरीजों को ये इंजेक्शन लगाया जा चुका है। दूसरे इंजेक्शन की तुलना में सभी मरीजों में 20 फीसदी तेज रिकवरी हुई। 50 मरीजों पर परीक्षण होने के बाद रिपोर्ट ऑनलाइन डीसीजीआई को भेज दी जाएगी।
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ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की मंजूरी के बाद मेडिकल कॉलेज में सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का चौथे चरण का ट्रायल चल रहा है। कॉलेज को 50 मरीजों पर परीक्षण करना है। ट्रायल के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. अंशुल जैन ने बताया कि एक सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन की कीमत करीब दस हजार रुपये है। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को नि:शुल्क इंजेक्शन लगाया जा रहा है। दरअसल, हाइपोवॉलेमिक शॉक में गए मरीजों का ब्लड प्रेशर काफी कम हो जाता है। उन्हें जब ये इंजेक्शन दिया जाता है तो ब्लड प्रेशर में सुधार होने लगता है।
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मेडिकल कॉलेज में जिन मरीजों पर इस इंजेक्शन का परीक्षण किया जा रहा है, उनसे पहले सहमति ली जा रही है। अब तक इस इंजेक्शन के कोई गंभीर दुष्परिणाम देखने को नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया गया कि चौथे चरण का ट्रायल पूरा होने के बाद पूरी तरह ये साफ हो जाएगा कि इंजेक्शन के कोई साइड इफेक्ट हैं या नहीं। हाइपोवॉलेमिक शॉक में गए रोगियों को ये इंजेक्शन लगने के बाद सेहत में 20 फीसदी तेजी से सुधार होता है।
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जून में पूरा हो जाएगा ट्रायल
इस इंजेक्शन के तीन चरणों का ट्रायल पूरा हो चुका है। तीसरे चरण के ट्रायल के बाद इंजेक्शन के इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है। मगर विशेषज्ञों का कहना है कि अभी चिकित्सक वैकल्पिक इंजेक्शन के रूप में इसका उपयोग कर रहे हैं। चौथे चरण के ट्रायल में इस इंजेक्शन को लगाने के बाद यदि मरीज में कोई गंभीर दुष्परिणाम देखने को नहीं मिलते हैं तो बड़े पैमाने पर इसका उपयोग शुरू हो जाएगा।

शॉक में जाने के ये हैं प्रमुख कारण

- दुर्घटना के बाद व्यक्ति का ज्यादा खून बह जाए
- ज्यादा उल्टी-दस्त हो जाना
- सर्जरी के दौरान ज्यादा रक्त निकल जाना
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