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हवाई अड्डा के लिए 15 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी

Sun, 17 Jan 2021 01:47 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2021 01:47 AM IST
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hawai adda ke liye 15 acre jameen kharidi
झांसी। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने ललितपुर स्थित एयरपोर्ट को प्रथम चरण में 72 सीटर विमानों को उड़ाने के लिए मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही झांसी में एयरपोर्ट की स्थापना की प्रक्रिया ने तेजी पकड़ ली है। इसके लिए चिह्नित की गई जमीन को क्रय करने पर जोर है। यहां 15 एकड़ जमीन खरीदी जाएगी।
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झांसी में पिछले डेढ़ दशक से हवाई अड्डे की स्थापना की कवायद जारी है। पहले नए स्थान पर हवाई अड्डा बनाने की योजना थी, लेकिन अब तय हो गया है कि ग्वालियर मार्ग स्थित सेना की हवाई पट्टी का विस्तार कर यहां से नागरिक विमान सेवा प्रारंभ की जाएगी। यहां से बीस सीटर विमान उड़ाए जाएंगे। वर्तमान में हवाई पट्टी पर स्थित रनवे की लंबाई 1200 मीटर है। नागरिक विमान सेवा प्रारंभ करने के लिए 1500 मीटर लंबे रनवे की आवश्यकता होगी। इसके अलावा टर्मिनल व पार्किंग एरिया भी बनाना होगा। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने हाल ही में ललितपुर में एयरपोर्ट की स्थापना को मंजूरी दी है। इसके साथ ही झांसी में हवाई अड्डे की स्थापना की कार्यवाही ने जोर पकड़ लिया है। इसके लिए हवाई पट्टी का विस्तार किया जाना है। विस्तारीकरण के लिए हवाई पट्टी से सटे सिमरधा मौजा की पंद्रह एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जिस पर 27 मकान भी बने हुए हैं। प्रशासन द्वारा यह जमीन क्रय करने की योजना बनाई गई है। भू स्वामियों को सर्किल रेट के हिसाब से जमीन की कीमत अदा की जाएगी।
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जमीन क्रय करने की कार्रवाई तेजी से जारी है। इसकी प्रक्रिया पूरी होते ही छह माह में यहां से विमान सेवा प्रारंभ हो जाएगी। इस दिशा में काम तेजी से जारी है। किसानों से जमीन आपसी सहमति के आधार पर क्रय की जाएगी।
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- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
जमीन देने को राजी नहीं ग्रामीण
झांसी। सिमरधा गांव के ग्रामीण हवाई अड्डे के लिए जमीन देने को राजी नहीं हैं। इसके लिए वे प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक का लगातार दरवाजा खटखटा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए उनकी जमीन ली जा चुकी है। शेष बची जमीन पर उनके निवास व खेती है। अगर ये भी चली जाएगी तो वे बेघर और बेरोजगार हो जाएंगे। हाल ही में ग्रामीणों ने इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पास भी प्रार्थना पत्र भेजे थे। इस पर केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्रामीणों के आवेदन पर विचार कर न्यायोचित आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
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