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गुजरे वोटर, लौटे नेता
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Mar 2017 12:32 AM IST
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गुजरे वोटर, लौटे नेता
- फोटो : demo
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झांसी।
विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद अब जनता की समस्याओं से न तो नेताओं को मतलब है और न ही सभी प्रत्याशियों को। मतदान हो गया, वोट पड़ गए। तो अब चिंता क्यों करे? अब तो बारी पांच साल बाद ही आएगी।
विधानसभा चुनाव में इस बार जनपद में 53 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य अजमाया है। इनमें 18 प्रत्याशी अकेले झांसी सदर सीट से मैदान में हैं। इनमें 12 प्रत्याशी प्रमुख चार दलों के नेता थे। मतदान के बाद इनमें इक्का दुक्का ही नेता नजर आ रहे हैं। वे भी ज्ञापन देने या अपने पार्टी नेताओं से मिलने- जुलने तक ही सीमित है। कुछ नेतागिरी चमकाने के लिए दूसरी जगह भी चुनाव प्रचार करने चले गए। लेकिन इनमें किसी को अब जनसमस्याओं से अब कोई लेना देना नही हैं। जबकि गर्मी की दस्तक के साथ ही बिजली और पानी का संकट जैसी बड़ी समस्याएं मुंह बाये खड़ी हुई हैं। सड़कें भी अस्त-व्यस्त है। किसान अपनी दुर्दशा पा आंसू बहा रहा है। अस्पतालों में चिकित्सक और दवाएं नहीं है। हाइवे पर तिपहिया वाहनों में लोग ढोए जा रहे हैं। सभी समस्याएं जस की तस है।
चुनाव प्रचार के दौरान इन्हीं समस्याओं को दूर करने का वादा करके चौखट- चौखट झोली फैलाकर और बुजुर्गों के पैर छूकर वोट मांगने वाले नेता और प्रत्याशी मतदान के बाद से एकदम गायब हो गए हैं। अब तो बस उन्हें मतगणना का इंतजार है। हार गए तो घर बैठ जाएंगे, जीत गए जनता और उनकी समस्याओं से बचेंगे।
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मुंह बांये खड़ी है ये समस्याएं
-------------------------
- महानगर की चालीस फीसदी जनता मांग रही पानी
- कई सड़कों का बिगड़ा हुआ स्वरूप
- आसानी से नहीं होता जेडीए में नक्शा पास
- कई कॉलोनियों में नहीं मिल रहा बिजली कनेक्शन
- ऑटो संचालन व्यवस्था से लोग बेहाल
- बाजारों में फैला अतिक्रमण
- भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा की कमी
- नए विकसित क्षेत्रों में पानी की पाइप लाइन तक नहीं
- वृद्ध आश्रमों की कमी
- घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कूड़े के ढेर
- प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान
काशी में कर रहा हूं प्रचार
मतदान के बाद लोगों से मिलना- जुलना बना रहा। एक दिन दिल्ली चला गया। अभी काशी में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करने आ गया। अब तो 11 मार्च के बाद ही जनसमस्याओं को दूर करने पर ध्यान दिया जाएगा।
रवि शर्मा, भाजपा प्रत्याशी।
अभी तो मिलने- जुलने में ही बीत रहा समय
अभी तो मिलने- जुलने में ही समय बीत रहा है। सभी क्षेत्रों से लोग उनसे मिलने आते- रहते है। इसी में शाम और कब रात हो जाती है? पता ही नहीं चलता। आज भी कचहरी में अधिवक्ताओं से मिलने आ गया था। परिणाम आ जाए तो काम आगे बढ़े।
सीताराम कुशवाहा, बसपा प्रत्याशी।
मतदान के बाद से ही हूं बाहर
मतदान की अगली रात ही घर से निकल आया था। 27 को गोंडा चुनाव प्रचार में रहा। इसके बाद मेहंदीपुर बालाजी और अजमेर शरीफ में दर्शन किए। जौनपुर, मिर्जापुर में अपने पार्टी प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार किया। अभी बनारस आया हूं। पांच मार्च को घर लौटने पर समस्याओं को दूर करने पर ध्यान दूंगा।
राहुल राय, कांग्रेस- सपा गठबंधन प्रत्याशी।
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विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद अब जनता की समस्याओं से न तो नेताओं को मतलब है और न ही सभी प्रत्याशियों को। मतदान हो गया, वोट पड़ गए। तो अब चिंता क्यों करे? अब तो बारी पांच साल बाद ही आएगी।
विधानसभा चुनाव में इस बार जनपद में 53 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य अजमाया है। इनमें 18 प्रत्याशी अकेले झांसी सदर सीट से मैदान में हैं। इनमें 12 प्रत्याशी प्रमुख चार दलों के नेता थे। मतदान के बाद इनमें इक्का दुक्का ही नेता नजर आ रहे हैं। वे भी ज्ञापन देने या अपने पार्टी नेताओं से मिलने- जुलने तक ही सीमित है। कुछ नेतागिरी चमकाने के लिए दूसरी जगह भी चुनाव प्रचार करने चले गए। लेकिन इनमें किसी को अब जनसमस्याओं से अब कोई लेना देना नही हैं। जबकि गर्मी की दस्तक के साथ ही बिजली और पानी का संकट जैसी बड़ी समस्याएं मुंह बाये खड़ी हुई हैं। सड़कें भी अस्त-व्यस्त है। किसान अपनी दुर्दशा पा आंसू बहा रहा है। अस्पतालों में चिकित्सक और दवाएं नहीं है। हाइवे पर तिपहिया वाहनों में लोग ढोए जा रहे हैं। सभी समस्याएं जस की तस है।
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चुनाव प्रचार के दौरान इन्हीं समस्याओं को दूर करने का वादा करके चौखट- चौखट झोली फैलाकर और बुजुर्गों के पैर छूकर वोट मांगने वाले नेता और प्रत्याशी मतदान के बाद से एकदम गायब हो गए हैं। अब तो बस उन्हें मतगणना का इंतजार है। हार गए तो घर बैठ जाएंगे, जीत गए जनता और उनकी समस्याओं से बचेंगे।
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मुंह बांये खड़ी है ये समस्याएं
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- महानगर की चालीस फीसदी जनता मांग रही पानी
- कई सड़कों का बिगड़ा हुआ स्वरूप
- आसानी से नहीं होता जेडीए में नक्शा पास
- कई कॉलोनियों में नहीं मिल रहा बिजली कनेक्शन
- ऑटो संचालन व्यवस्था से लोग बेहाल
- बाजारों में फैला अतिक्रमण
- भीड़भाड़ वाले बाजारों में सुरक्षा की कमी
- नए विकसित क्षेत्रों में पानी की पाइप लाइन तक नहीं
- वृद्ध आश्रमों की कमी
- घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कूड़े के ढेर
- प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान
काशी में कर रहा हूं प्रचार
मतदान के बाद लोगों से मिलना- जुलना बना रहा। एक दिन दिल्ली चला गया। अभी काशी में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करने आ गया। अब तो 11 मार्च के बाद ही जनसमस्याओं को दूर करने पर ध्यान दिया जाएगा।
रवि शर्मा, भाजपा प्रत्याशी।
अभी तो मिलने- जुलने में ही बीत रहा समय
अभी तो मिलने- जुलने में ही समय बीत रहा है। सभी क्षेत्रों से लोग उनसे मिलने आते- रहते है। इसी में शाम और कब रात हो जाती है? पता ही नहीं चलता। आज भी कचहरी में अधिवक्ताओं से मिलने आ गया था। परिणाम आ जाए तो काम आगे बढ़े।
सीताराम कुशवाहा, बसपा प्रत्याशी।
मतदान के बाद से ही हूं बाहर
मतदान की अगली रात ही घर से निकल आया था। 27 को गोंडा चुनाव प्रचार में रहा। इसके बाद मेहंदीपुर बालाजी और अजमेर शरीफ में दर्शन किए। जौनपुर, मिर्जापुर में अपने पार्टी प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार किया। अभी बनारस आया हूं। पांच मार्च को घर लौटने पर समस्याओं को दूर करने पर ध्यान दूंगा।
राहुल राय, कांग्रेस- सपा गठबंधन प्रत्याशी।