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शरीर कांपे, संतुलन बिगड़े तो हल्के में न लें, यह पार्किंसंस हो सकता है

Sun, 10 Apr 2022 10:06 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2022 10:06 PM IST
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hath pair me kampan ko halke me na le
झांसी। यदि आपके हाथ-पैर और शरीर में कंपन होता है। संतुलन की कमी हो गई है तो आप पार्किंसंस का शिकार हो सकते हैं। इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति का शरीर झुका हुआ होता है। बिगड़ी दिनचर्या, तनाव और असंतुलित खानपान की वजह से इस बीमारी के मरीज बढ़े हैं। मेडिकल कॉलेज में हर महीने 15 से 20 रोगी इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं।
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पार्किंसंस की बीमारी मस्तिष्क का रोग है। बीमारी दिमाग के उस हिस्से को निशाना बनाती है, जो शरीर को यह बताता है कि कैसे काम करना है। ज्यादातर 60 साल से ऊपर के लोग इसके शिकार होते हैं। कई बार कुछ आनुवांशिक कारणों से यह बीमारी जवान लोगों में भी होती है। मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद कनकने ने बताया कि दिमाग के अंदर वेसल गैग्लिया नामक हिस्से में डोपामीन और एसीटाइल कोलीन नामक रसायन सामंजस्य बनाकर शरीर की गति को नियंत्रित करते हैं। डोपामीन रसायन की कमी और इसको बनाने वाली कोशिकाओं के नष्ट हो जाने से शरीर में कंपन या धीमापन आने लगता है।
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ये पार्किंसंस बीमारी की प्रमुख वजह है। वैसे तो इस पार्किंसंस बीमारी का कोई स्पष्ट कारण नहीं पता चल पाया है। मगर आनुवांशिक कारण, कुछ दवाएं, कीटनाशक, सिर की चोट या संक्रमण इसके कुछ कारण पता चले हैं। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले तक 10 से 12 मरीज हर महीने ओपीडी में आते थे। अब इनकी संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ गई है।
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जब दवाएं नहीं काम करती तब सर्जरी, पेसमेकर की जरूरत पड़ती है
झांसी। पार्किंसंस का इलाज बीमारी की तीव्रता पर निर्भर करता है। इसके लक्षण को नियंत्रित करने के लिए ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जो दिमाग के अंदर डोपामीन नामक रसायन का स्तर बनाकर रखती हैं। बीमारी की तीव्रता एवं लक्षणों के आधार पर कई दवाओं का इस्तेमाल होता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, दवाएं अपना काम करना कम कर देती हैं। ऐसी स्थिति में दिमाग की सर्जरी या डीप ब्रेन स्टीमुलेशन (पेसमेकर) से शरीर की गति को नियंत्रित किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज में सर्जरी, पेसमेकर की सुविधा नहीं है। दवाओं से रोगियों का इलाज किया जाता है।
ये हैं लक्षण
- कंपन
- शरीर में धीमापन
- मांसपेशियां कठोर हो जाना
- संतुलन में परेशानी
- बोली या लिखावट में बदलाव
- याददाश्त में कमजोरी
- व्यवहार में बदलाव
- निगलने में तकलीफ
- नींद न आने की समस्या
- अधिक पसीना आना
बीमारी से ऐसे बच सकते
- नियमित व्यायाम
- स्वस्थ जीवनशैली
- तनाव कम रखना
- पौष्टिक आहार
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