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बीएएमएस छात्रों के नंबर बढ़ाने का भंडाफोड़, यूनिवर्सिटी ने रिजल्ट रोका
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झांसी। ‘हैश टैग’ चिह्न से बीएएमएस छात्रों के नंबर बढ़ाने के बड़े खेल का भंडाफोड़ हो गया है। 500 ऐसी उत्तर पुस्तिकाएं सामने आईं हैं, जिनके पहले पेज पर एक सा चिन्ह बना हुआ है। खास बात यह है कि जिस कॉपी पर ‘हैश टैग’ बना था, वहां अच्छे नंबर दिए गए हैं। गोपनीय जांच के बाद इस प्रकरण को बृहस्पतिवार परीक्षा समिति की बैठक में रखा गया, जहां चिन्ह वाली उत्तर पुस्तिकाओं का रिजल्ट रोकने और जांच कमेटी के गठन का आदेश जारी कर दिया गया है।
बुंदेलखंड में तीन आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। इनमें झांसी में एक सरकारी, एक प्राइवेट, बांदा में एक सरकारी कॉलेज है। इन कॉलेजों में पढ़ने वाले बीएएमएस प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्र-छात्राओं की फरवरी-मार्च में परीक्षा हुई थी। मई में मूल्यांकन कराया गया। खास बात यह है कि मूल्यांकन के दौरान ही बुंदेलखंड विश्वविद्यालय अधिकारियों को इसकी सूचना मिल गई थी। तब तक इसे गोपनीय रखा गया। मूल्यांकन के बाद जब पड़ताल कराई गई तो सिलसिलेवार खुलासा हुआ। बीयू अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय में इन तीनों कॉलेजों की 3200 कॉपियां जमा हुईं। इनमें से 500 कॉपियों के पहले पन्ने पर ही ‘हैश टैग’ चिह्न बना हुआ था। मामला संज्ञान में आने के बाद बीयू ने इन कॉपियों का रिजल्ट रोक दिया है। साथ ही जांच कराने के लिए कमेटी बनाने के आदेश हो गए हैं।
आयुर्वेदिक कॉलेजों के 500 कॉपियों में ‘हैश टैग’ पहचान चिह्न मिला है। इतनी अधिक कॉपियों में एक सा पहचान चिह्न मिलना गंभीर मामला है। सभी छात्रों के रिजल्ट रोक दिए गए हैं। मामले की जांच के लिए कमेटी भी बनाई जा रही है। मामले में छात्र और शिक्षक जिसकी भी संलिप्तता पाई जाती है, उनकी खिलाफ कार्रवाई तय है। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी।
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बुंदेलखंड में तीन आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। इनमें झांसी में एक सरकारी, एक प्राइवेट, बांदा में एक सरकारी कॉलेज है। इन कॉलेजों में पढ़ने वाले बीएएमएस प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्र-छात्राओं की फरवरी-मार्च में परीक्षा हुई थी। मई में मूल्यांकन कराया गया। खास बात यह है कि मूल्यांकन के दौरान ही बुंदेलखंड विश्वविद्यालय अधिकारियों को इसकी सूचना मिल गई थी। तब तक इसे गोपनीय रखा गया। मूल्यांकन के बाद जब पड़ताल कराई गई तो सिलसिलेवार खुलासा हुआ। बीयू अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय में इन तीनों कॉलेजों की 3200 कॉपियां जमा हुईं। इनमें से 500 कॉपियों के पहले पन्ने पर ही ‘हैश टैग’ चिह्न बना हुआ था। मामला संज्ञान में आने के बाद बीयू ने इन कॉपियों का रिजल्ट रोक दिया है। साथ ही जांच कराने के लिए कमेटी बनाने के आदेश हो गए हैं।
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आयुर्वेदिक कॉलेजों के 500 कॉपियों में ‘हैश टैग’ पहचान चिह्न मिला है। इतनी अधिक कॉपियों में एक सा पहचान चिह्न मिलना गंभीर मामला है। सभी छात्रों के रिजल्ट रोक दिए गए हैं। मामले की जांच के लिए कमेटी भी बनाई जा रही है। मामले में छात्र और शिक्षक जिसकी भी संलिप्तता पाई जाती है, उनकी खिलाफ कार्रवाई तय है। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी।
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