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सीपरी ओवरब्रिज: गार्डरों को जोड़ने का काम शुरू

Tue, 18 Aug 2020 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2020 12:57 AM IST
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सीपरी बाजार ओरवब्रिज के लिए आए गार्डर। - फोटो : REPORTERS
झांसी। सीपरी बाजार ओवरब्रिज का थमा काम शुरू हो गया है। नोएडा से आए कंपनी कर्मचारियों की टीम ने 36 मीटर वाले गार्डरों को तैयार करने के लिए आठ- आठ मीटर के टुकड़ों को जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। इस हफ्ते 50 मीटर वाले गार्डर भी आना शुरू हो जाएंगे। गार्डरों का दिल्ली से चलना शुरू हो गया है। अगर तेजी से काम हुआ तो अगले छह महीने में ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा।
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सीपरी बाजार ओवरब्रिज का काम एक साल बाद फिर शुरू हो गया है। अधूरे काम को पूरा करने के लिए नया टेंडर नोएडा की गैलविनो कंपनी को दिया गया है। कंपनी को बचा काम 10.50 करोड़ में पूरा करना है। 50 मीटर के गार्डर न बन पाने के कारण कार्य बंद चल रहा है। कंपनी ने गार्डर तैयार कर लिया है और उनका कंपनी से चलना शुरू हो गया है। इधर, कंपनी ने आठ कर्मचारियों को काम शुरू करने के लिए झांसी भेज दिया है। ये कर्मचारी चित्रा चौराहे के निकट रखे आठ- आठ मीटर के टुकड़ों को टंकी के पास बने अस्थायी कारखाने में जोड़ने का काम कर रहे हैं। 36 मीटर का एक गार्डर तैयार कर लिया गया है। कंपनी सुपरवाइजर ने बताया कि अब तेजी से काम होगा। अगले छह महीने में ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा।
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प्रदेश सरकार ने 2012 में ओवरब्रिज निर्माण को स्वीकृति दी थी। कार्य 2014 में शुरू हुआ। राज्य सेतु निगम ने अपने हिस्से का काम 2016 में पूरा कर चुका है, जबकि रेलवे अपने हिस्से का काम पिछले चार साल से कर रहा है। शुरुआत में रेलवे ने दिल्ली की मैक्स आउट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ठेका दे रखा था। कंपनी को 22 करोड़ के काम को दो साल में पूरा करके देना था। मगर, कंपनी पौने तीन साल में अपने हिस्से का 55 फीसदी ही काम पूरा कर सकी थी।
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ये भी जानिए
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का पिछले डेढ़ साल से गार्डर न मिलने के कारण काम लटका है। पिछली कंपनी बार- बार कहती रही कि स्टील अथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) से लोहा न मिलने के कारण गार्डर नहीं बन पा रहे हैं। यहां के लिए उत्तराखंड के काशीपुर से गार्डर बनकर आने हैं। वहीं, तीसरी रेल लाइन के पुलों के लिए बराबर आ रहे गार्डरों के कारण निर्माण शाखा के अधिकारियों को शंका हुई। इस पर निर्माण शाखा के अफसरों को शंका होने पर कंपनी की कार्य प्रणाली की जांच करवाई थी। जांच में पता लगा कि कंपनी ने सेल में पैसा ही जमा नहीं किया था। इससे गार्डर नहीं मिल पा रहे थे। रेल प्रशासन को धोखे में रखने पर कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया गया था।

यह काम बाकी
अभी पटरियों के ऊपर 50 मीटर के छह और सीपरी बाजार टंकी की तरफ 36 मीटर के छह गार्डर रखने का काम बाकी रह गया है। पहले सीपरी बाजार टंकी की तरफ और फिर पटरियों के ऊपर गार्डर रखने का काम होगा। शटरिंग, सरिया बांधने और सड़क बनाने का काम होगा। 36 मीटर के गार्डर आ चुके हैं।
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