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Jhansi News: छोटी बचत का बड़ा भरोसा, डाकघर में 28.50 अरब रुपये जमा
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हिमांशु पांडेय
झांसी। बुंदेलखंड में सीमित आमदनी से भविष्य के लिए पूंजी जुटाने की प्रवृत्ति आज भी कायम है। कोई हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम जमा कर रहा है तो कोई बच्चों की पढ़ाई, बेटियों के भविष्य और बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा के लिए निवेश कर रहा है। डाकघर की बचत योजनाओं में जमा 28.50 अरब रुपये इसी भरोसे की तस्वीर पेश करते हैं।
झांसी मंडल में लोगों ने छोटी बचत को आर्थिक सुरक्षा का जरिया बनाया है। खास बात यह है कि महिलाएं भी बचत के मामले में आगे हैं। उनके नाम पर 50 हजार से अधिक खाते हैं, जिनमें करीब 2.50 अरब रुपये जमा हैं।
राष्ट्रीय बचत दिवस के अवसर पर बचत की यह आदत आर्थिक नियोजन के महत्व को भी रेखांकित करती है। डाकघर की बचत योजनाएं लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार रकम जमा करने का विकल्प देती हैं। सेविंग बैंक खाता, आवर्ती जमा (आरडी), टाइम डिपॉजिट, मासिक आय योजना, सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), सुकन्या समृद्धि योजना और राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) जैसी योजनाओं में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से निवेश किया जा रहा है।
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पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि इन योजनाओं में जमा राशि में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों का भरोसा बना हुआ है। वर्ष 2023-24 में 2,550.92 करोड़ रुपये जमा हुए थे। वर्ष 2024-25 में यह राशि बढ़कर 2,892.09 करोड़ रुपये हो गई, जबकि वर्ष 2025-26 में 2,786.42 करोड़ रुपये जमा हुए। बचत अधिकारियों का अनुमान है कि अगले वर्ष तक बचत का कुल कोष 30 अरब रुपये तक पहुंच सकता है।
आरडी और पीपीएफ जैसी योजनाओं में दिलचस्पी
डाकघर की योजनाओं में लोग नियमित बचत के साथ लंबी अवधि के निवेश को भी महत्व दे रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में सेविंग बैंक खातों में 1,295.80 करोड़ रुपये जमा हुए। एक वर्षीय टाइम डिपॉजिट में 523.94 करोड़ और आवर्ती जमा योजना में 354.82 करोड़ रुपये जमा किए गए। राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र में 137.64 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में 117.22 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि इस दौरान 51.21 करोड़ रुपये की निकासी हुई। ये आंकड़े बताते हैं कि लोग अपनी जरूरत और आर्थिक क्षमता के अनुसार बचत के अलग-अलग विकल्प अपना रहे हैं।
कोट
बचत योजनाओं को लेकर खासकर मध्यम वर्ग में दिलचस्पी बनी हुई है। पिछले दो वर्षों में लक्ष्य भी बढ़ाया गया है और लोगों को बचत के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है। - राजेश द्विवेदी, उपनिदेशक बचत, झांसी मंडल
महिलाओं के नाम 2.50 अरब रुपये की बचत
बचत के मामले में महिलाएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं। झांसी मंडल में महिलाओं के नाम पर 50 हजार से अधिक बचत खाते हैं, जिनमें करीब 2.50 अरब रुपये जमा हैं। वहीं, सुकन्या समृद्धि योजना में 3.59 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में न्यूनतम 250 रुपये से खाता खोला जा सकता है। इसकी परिपक्वता अवधि 21 वर्ष है।
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झांसी। बुंदेलखंड में सीमित आमदनी से भविष्य के लिए पूंजी जुटाने की प्रवृत्ति आज भी कायम है। कोई हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम जमा कर रहा है तो कोई बच्चों की पढ़ाई, बेटियों के भविष्य और बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा के लिए निवेश कर रहा है। डाकघर की बचत योजनाओं में जमा 28.50 अरब रुपये इसी भरोसे की तस्वीर पेश करते हैं।
झांसी मंडल में लोगों ने छोटी बचत को आर्थिक सुरक्षा का जरिया बनाया है। खास बात यह है कि महिलाएं भी बचत के मामले में आगे हैं। उनके नाम पर 50 हजार से अधिक खाते हैं, जिनमें करीब 2.50 अरब रुपये जमा हैं।
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राष्ट्रीय बचत दिवस के अवसर पर बचत की यह आदत आर्थिक नियोजन के महत्व को भी रेखांकित करती है। डाकघर की बचत योजनाएं लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार रकम जमा करने का विकल्प देती हैं। सेविंग बैंक खाता, आवर्ती जमा (आरडी), टाइम डिपॉजिट, मासिक आय योजना, सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), सुकन्या समृद्धि योजना और राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) जैसी योजनाओं में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से निवेश किया जा रहा है।
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पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि इन योजनाओं में जमा राशि में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों का भरोसा बना हुआ है। वर्ष 2023-24 में 2,550.92 करोड़ रुपये जमा हुए थे। वर्ष 2024-25 में यह राशि बढ़कर 2,892.09 करोड़ रुपये हो गई, जबकि वर्ष 2025-26 में 2,786.42 करोड़ रुपये जमा हुए। बचत अधिकारियों का अनुमान है कि अगले वर्ष तक बचत का कुल कोष 30 अरब रुपये तक पहुंच सकता है।
आरडी और पीपीएफ जैसी योजनाओं में दिलचस्पी
डाकघर की योजनाओं में लोग नियमित बचत के साथ लंबी अवधि के निवेश को भी महत्व दे रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में सेविंग बैंक खातों में 1,295.80 करोड़ रुपये जमा हुए। एक वर्षीय टाइम डिपॉजिट में 523.94 करोड़ और आवर्ती जमा योजना में 354.82 करोड़ रुपये जमा किए गए। राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र में 137.64 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में 117.22 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि इस दौरान 51.21 करोड़ रुपये की निकासी हुई। ये आंकड़े बताते हैं कि लोग अपनी जरूरत और आर्थिक क्षमता के अनुसार बचत के अलग-अलग विकल्प अपना रहे हैं।
कोट
बचत योजनाओं को लेकर खासकर मध्यम वर्ग में दिलचस्पी बनी हुई है। पिछले दो वर्षों में लक्ष्य भी बढ़ाया गया है और लोगों को बचत के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है। - राजेश द्विवेदी, उपनिदेशक बचत, झांसी मंडल
महिलाओं के नाम 2.50 अरब रुपये की बचत
बचत के मामले में महिलाएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं। झांसी मंडल में महिलाओं के नाम पर 50 हजार से अधिक बचत खाते हैं, जिनमें करीब 2.50 अरब रुपये जमा हैं। वहीं, सुकन्या समृद्धि योजना में 3.59 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में न्यूनतम 250 रुपये से खाता खोला जा सकता है। इसकी परिपक्वता अवधि 21 वर्ष है।