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गोशाला खाली, गांवों में हांके जा रहे गोवंश
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झांसी। बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों से किसानों को निजात नहीं मिल रही। ग्रामीण इलाकों में बनाए गए गो-आश्रय स्थलों में पर्याप्त खुराक न मिलने से गोवंश बाहर हांक दिए जा रहे हैं। यह अवारा पशु इस समय किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बने हैं। उनसे फसल बचाने के लिए किसान रात भर खेतों में जागकर चौकीदारी करने को मजबूर हैं।
अन्ना जानवरों से निपटने के लिए यहां 226 गोशालाएं बनवाई गईं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें वर्तमान समय में 26 हजार पशु रखे गए हैं लेकिन हकीकत इसके उलट है। बताया जाता है कि इन गोआश्रयों में क्षमता के बीस फीसदी जानवर भी नहीं रखे गए हैं। इसके पीछे मुख्य वजह इनके लिए पर्याप्त पैसा न मिलना है। बजट न होने से गोवंशियों को पर्याप्त खुराक नहीं मिल रही। ऐसे में पशुओं को यहां रखने के बजाए सड़क एवं गांव की ओर हांक दिया जाता है। एक मवेशी की खुराक के लिए रोजाना 30 रुपये दिए जाते हैं। इस खुराक के मुताबिक भी इन पशुशालाओं पर सलाना करीब 27 करोड़ रुपये का खर्च है लेकिन, यह पैसा भी पूरा नहीं मिलता। किस्तों में पैसा दिए जाने के बावजूद चार करोड़ रुपये बकाया है।
इस वजह से यहां रखे गए जानवरों को पर्याप्त खुराक नहीं मिलती। इसे बचाने को कई गोआश्रय स्थलों से जानवर सड़क, गांव की ओर हांक दिए जाने है। इसकी शिकायत लगातार अफसरों को मिलती है लेकिन, वह चुप्पी साधे रहते हैं। पूछ, चिरगांव, बंगरा के नोटा आदि स्थानों में बने गोआश्रय स्थल में 15-20 पशु ही बचे हैं। नोटा गांव में पशुओं के फसल खराब किए जाने से ग्रामीणों ने इन जानवरों को पंचायत भवन में बांध दिया। उधर, इस बारे में पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ.वाईके तोमर का कहना है कि बजट के मुताबिक गोआश्रय स्थलों पर इंतजाम किए जाते हैं। जहां इस तरह की शिकायतें मिलेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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फसल की खातिर रात भर चौकीदारी कर रहे किसान
इन दिनों धान, मूंगफली, तिल, मूंग, उर्द आदि की फसल खेतों में लगी है। किसानों ने प्रतिकूल मौसम होने के बावजूद मेहनत के बलबूते फसल खेतों में लगा ली लेकिन, अब अन्ना जानवरों का डर उनको सता रहा है। फसल को नुकसान से बचाने के लिए अधिकांश किसान पूरी रात खेतों में ही चौकीदारी करते हैं। किसानों ने खेत में ही मचान, कटिया बनाई हुई है। बारिश आदि मौसम में भी किसान रात में अपना खेत नहीं छोड़ते। मऊरानीपुर, उल्दन गांव के रंजीत सिंह, सालिकराम मिश्रा, भगवत प्रसाद आदि का कहना है कि काफी पूंजी लगाकर बुवाई की गई है लेकिन, अन्ना जानवरों का खतरा लगातार बना हुआ है।
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अन्ना जानवरों से निपटने के लिए यहां 226 गोशालाएं बनवाई गईं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें वर्तमान समय में 26 हजार पशु रखे गए हैं लेकिन हकीकत इसके उलट है। बताया जाता है कि इन गोआश्रयों में क्षमता के बीस फीसदी जानवर भी नहीं रखे गए हैं। इसके पीछे मुख्य वजह इनके लिए पर्याप्त पैसा न मिलना है। बजट न होने से गोवंशियों को पर्याप्त खुराक नहीं मिल रही। ऐसे में पशुओं को यहां रखने के बजाए सड़क एवं गांव की ओर हांक दिया जाता है। एक मवेशी की खुराक के लिए रोजाना 30 रुपये दिए जाते हैं। इस खुराक के मुताबिक भी इन पशुशालाओं पर सलाना करीब 27 करोड़ रुपये का खर्च है लेकिन, यह पैसा भी पूरा नहीं मिलता। किस्तों में पैसा दिए जाने के बावजूद चार करोड़ रुपये बकाया है।
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इस वजह से यहां रखे गए जानवरों को पर्याप्त खुराक नहीं मिलती। इसे बचाने को कई गोआश्रय स्थलों से जानवर सड़क, गांव की ओर हांक दिए जाने है। इसकी शिकायत लगातार अफसरों को मिलती है लेकिन, वह चुप्पी साधे रहते हैं। पूछ, चिरगांव, बंगरा के नोटा आदि स्थानों में बने गोआश्रय स्थल में 15-20 पशु ही बचे हैं। नोटा गांव में पशुओं के फसल खराब किए जाने से ग्रामीणों ने इन जानवरों को पंचायत भवन में बांध दिया। उधर, इस बारे में पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ.वाईके तोमर का कहना है कि बजट के मुताबिक गोआश्रय स्थलों पर इंतजाम किए जाते हैं। जहां इस तरह की शिकायतें मिलेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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फसल की खातिर रात भर चौकीदारी कर रहे किसान
इन दिनों धान, मूंगफली, तिल, मूंग, उर्द आदि की फसल खेतों में लगी है। किसानों ने प्रतिकूल मौसम होने के बावजूद मेहनत के बलबूते फसल खेतों में लगा ली लेकिन, अब अन्ना जानवरों का डर उनको सता रहा है। फसल को नुकसान से बचाने के लिए अधिकांश किसान पूरी रात खेतों में ही चौकीदारी करते हैं। किसानों ने खेत में ही मचान, कटिया बनाई हुई है। बारिश आदि मौसम में भी किसान रात में अपना खेत नहीं छोड़ते। मऊरानीपुर, उल्दन गांव के रंजीत सिंह, सालिकराम मिश्रा, भगवत प्रसाद आदि का कहना है कि काफी पूंजी लगाकर बुवाई की गई है लेकिन, अन्ना जानवरों का खतरा लगातार बना हुआ है।