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राज्यपाल ने लोकार्पण किया फिर भी आवंटन नहीं हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 May 2016 12:34 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के फ्लैटों का राज्यपाल राम नाईक द्वारा लोकार्पण करने के बावजूद अब तक आवंटन नहीं हो सका है। इसकी वजह पानी की सप्लाई की व्यवस्था नहीं हो पाना है। इससे आस लगाए बैठे कर्मचारी निराश हैं।
विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों के लिए करीब 50 करोड़ की लागत से डेढ़ सौ फ्लैट बनाए गए थे। नवंबर 2015 में बीयू आए राज्यपाल ने नवनिर्मित फ्लैटों, आगंतुक कक्ष, परीक्षा भवन के मूल्यांकन केंद्र का लोकार्पण और पशु अनुसंधान कार्यशाला की नींव रखी थी। इसके बाद फ्लैटों के आवंटन की चर्चाएं शुरू हो गई थी। फ्लैटों में पानी की उपलब्धता न हो पाने की वजह से आवंटन प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी।
इससे फ्लैट की उम्मीद लगाए शिक्षक, कर्मचारी मायूस हैं। अब पानी की सप्लाई न होने से यह फ्लैट सफेद हाथी बनकर रह गए हैं। विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के वरिष्ठ शिक्षक सहित पर्यावरण विभाग के शिक्षकों को बीयू अधिकारियों ने पानी की खोज के निर्देश दिए थे, लेकिन वह ‘अमृत मंथन’ नाकामयाब साबित हुए। वहीं, कार्यदायी संस्था के जेई का कहना है कि गर्मी में जलस्तर घटने से पानी मिलने में मुश्किल हो रही है। अब पाइप लाइन को कैंपस से लिंक कर फ्लैटों में पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
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नारियल लेकर की भूजल की पड़ताल
पानी के लिए क्या-क्या जतन नहीं किए गए। बताया गया कि पाइप लाइन की गणित बिगड़ने के बाद भूजल का पता लगाने के लिए नारियल तक का सहारा लिया गया। नारियल लेकर जानकारों ने भूजल की पड़ताल की। इसके बावजूद फ्लैटों के आसपास भूजल नहीं निकल सका।
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विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों के लिए करीब 50 करोड़ की लागत से डेढ़ सौ फ्लैट बनाए गए थे। नवंबर 2015 में बीयू आए राज्यपाल ने नवनिर्मित फ्लैटों, आगंतुक कक्ष, परीक्षा भवन के मूल्यांकन केंद्र का लोकार्पण और पशु अनुसंधान कार्यशाला की नींव रखी थी। इसके बाद फ्लैटों के आवंटन की चर्चाएं शुरू हो गई थी। फ्लैटों में पानी की उपलब्धता न हो पाने की वजह से आवंटन प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी।
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इससे फ्लैट की उम्मीद लगाए शिक्षक, कर्मचारी मायूस हैं। अब पानी की सप्लाई न होने से यह फ्लैट सफेद हाथी बनकर रह गए हैं। विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के वरिष्ठ शिक्षक सहित पर्यावरण विभाग के शिक्षकों को बीयू अधिकारियों ने पानी की खोज के निर्देश दिए थे, लेकिन वह ‘अमृत मंथन’ नाकामयाब साबित हुए। वहीं, कार्यदायी संस्था के जेई का कहना है कि गर्मी में जलस्तर घटने से पानी मिलने में मुश्किल हो रही है। अब पाइप लाइन को कैंपस से लिंक कर फ्लैटों में पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
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नारियल लेकर की भूजल की पड़ताल
पानी के लिए क्या-क्या जतन नहीं किए गए। बताया गया कि पाइप लाइन की गणित बिगड़ने के बाद भूजल का पता लगाने के लिए नारियल तक का सहारा लिया गया। नारियल लेकर जानकारों ने भूजल की पड़ताल की। इसके बावजूद फ्लैटों के आसपास भूजल नहीं निकल सका।