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ग्रहण लगते ही सूर्य को देखने उमडे़ लोग
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झांसी में रविवार को पड़े सूर्य ग्रहण को एक्स-रे से देखते नगर बासी। अमर उजाला
ग्रहण लगते ही सूर्य को देखने उमडे़ लोग
झांसी। आषाढ़ कृष्ण अमावस्या रविवार को सूर्य ग्रहण पड़ा। वर्ष 2020 के पहले एवं सबसे लंबे सूर्य ग्रहण को देखने के लिए लोगों में काफी उत्सुकता रही। महानगर में सुबह 11:15 बजे से दोपहर 12:15 के दौरान ग्रहण का प्रभाव देखने को मिला। कई लोगों ने इष्ट देव के मंत्रों का जाप किया। ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान कर दान किया। वहीं, मंदिरों में भगवान का अभिषेक, श्रृंगार किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए पट खोले गए।
ग्रहण होते सूर्य को देखने के लिए सुबह 10 बजे से ही कई बच्चे एवं युवा अपने घरों की छतों पर पहुंच गए थे। जिन्होंने ग्रहण होते सूर्य को एक्सरे फिल्म के माध्यम देखा और उसे अपने मोबाइल के कैमरों में कैद किया। इस दौरान सूर्य कृष्ण पक्ष में घट रहे चंद्रमा की तरह नजर आया। धूप में चमक नदारद हो चली थी। कई बुजुर्गों ने अपने परिवार के साथ टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित हो रहे ग्रहण को देखा। दोपहर 3 बजे के बाद ग्रहण की समाप्ति पर घरों के प्रत्येक कोने में गंगाजल छिड़का और स्नान किया। इसके अलावा कई लोग उनाव बालाजी एवं ओरछा धाम भी पहुंचे। यहां पवित्र नदियों में स्नान किया और दान कर पुण्य प्राप्ति की।
अब चंद्रग्रहण, लेकिन प्रभाव नहीं
पांच जुलाई को आषाढ़ की पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भी चंद्रग्रहण रहेगा। लेकिन इसका प्रभाव भारत में नहीं होगा। इससे पहले पांच जून ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण था, जिसे उपच्छाया ग्रहण माना गया था। इसका भी धार्मिक रूप से कोई प्रभाव नहीं था।
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आज से शुरू होंगे गुप्त नवरात्र
आषाढ़ शुक्ल पक्ष सोमवार को आषाढ़ की गुप्त नवरात्र शुरू हो जाएंगे। यह नवरात्र आर्द्रा नक्षत्र में प्रारंभ होगा। देवी मंदिरों में पूजा अनुष्ठान की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। 26 जून को पंचमी तथा छठी एक साथ मनायी जाएगी।
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झांसी। आषाढ़ कृष्ण अमावस्या रविवार को सूर्य ग्रहण पड़ा। वर्ष 2020 के पहले एवं सबसे लंबे सूर्य ग्रहण को देखने के लिए लोगों में काफी उत्सुकता रही। महानगर में सुबह 11:15 बजे से दोपहर 12:15 के दौरान ग्रहण का प्रभाव देखने को मिला। कई लोगों ने इष्ट देव के मंत्रों का जाप किया। ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान कर दान किया। वहीं, मंदिरों में भगवान का अभिषेक, श्रृंगार किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए पट खोले गए।
ग्रहण होते सूर्य को देखने के लिए सुबह 10 बजे से ही कई बच्चे एवं युवा अपने घरों की छतों पर पहुंच गए थे। जिन्होंने ग्रहण होते सूर्य को एक्सरे फिल्म के माध्यम देखा और उसे अपने मोबाइल के कैमरों में कैद किया। इस दौरान सूर्य कृष्ण पक्ष में घट रहे चंद्रमा की तरह नजर आया। धूप में चमक नदारद हो चली थी। कई बुजुर्गों ने अपने परिवार के साथ टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित हो रहे ग्रहण को देखा। दोपहर 3 बजे के बाद ग्रहण की समाप्ति पर घरों के प्रत्येक कोने में गंगाजल छिड़का और स्नान किया। इसके अलावा कई लोग उनाव बालाजी एवं ओरछा धाम भी पहुंचे। यहां पवित्र नदियों में स्नान किया और दान कर पुण्य प्राप्ति की।
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अब चंद्रग्रहण, लेकिन प्रभाव नहीं
पांच जुलाई को आषाढ़ की पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भी चंद्रग्रहण रहेगा। लेकिन इसका प्रभाव भारत में नहीं होगा। इससे पहले पांच जून ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण था, जिसे उपच्छाया ग्रहण माना गया था। इसका भी धार्मिक रूप से कोई प्रभाव नहीं था।
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आज से शुरू होंगे गुप्त नवरात्र
आषाढ़ शुक्ल पक्ष सोमवार को आषाढ़ की गुप्त नवरात्र शुरू हो जाएंगे। यह नवरात्र आर्द्रा नक्षत्र में प्रारंभ होगा। देवी मंदिरों में पूजा अनुष्ठान की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। 26 जून को पंचमी तथा छठी एक साथ मनायी जाएगी।