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गेहूं तुलाई के नाम पर किसानों से वसूली जा रही रकम
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क्रय केंद्रों पर गेहूं तुलाई के नाम पर किसानों से हो रही वसूली
झांसी। कोरोना काल में गेहूं खरीद काफी धीमी चल रही है लेकिन, इसके बावजूद कई क्रय केंद्र ऐसे हैं जहां तुलाई के नाम पर किसानों से पैसे वसूले जा रहे हैं। किसानों का आरोप है उनसे 100-150 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसा मांगा जाता है। न देने वाले किसानों से गेहूं खरीद नहीं की जाती। सबसे अधिक पीसीएफ एवं पीसीयू क्रय केंद्रों की सामने आई है। इस वजह से किसान परेशान हैं।
अप्रैल माह से जनपद में गेहूं खरीद आरंभ हुई लेकिन, कोरोना के कहर के चलते यह रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। अभी तक जनपद में 452 किसानों से कुल 20,930 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका जबकि इसके लिए सौ से अधिक केंद्र खोले गए। नियमानुसार शासन ने पल्लेदारी के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की है लेकिन, अधिकांश क्रय केंद्रों में कई गुना अधिक पैसा वसूला जा रहा। भुक्तभोगी किसानों का कहना है किसी भी केंद्र में तुलाई से पहले 100-150 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसे देने पड़ते हैं। कई किसान इतना नकद पैसा लेकर केंद्रों पर नहीं जाते। कई दिन इंतजार के बाद उनका नंबर आता है लेकिन, पास में पैसा न होने से इन किसानों को लौटा दिया जाता है। सबसे अधिक शिकायतें पीसीएफ एवं पीसीयू की सामने आई हैं। वहीं, एआर अनूप कुमार द्विवेदी का कहना है ऐसी शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
इनसेट
संचालकों ने एफसीआई पर फोड़ा ठीकरा
गेहूं क्रय केंद्र संचालकों का कहना है गेहूं खरीदने के बाद एफसीआई गोदाम में जमा कराना होता है। केंद्र संचालक को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। संचालकों का कहना है एफसीआई गोदाम में आसानी से अनलोडिंग नहीं होती। समय पर अनलोडिंग न होने से माल-भाड़े की लागत बढ़ जाती है। कई बार क्वालिटी कंट्रोल के नाम पर एफसीआई से जबरन गेेहूं रिजेक्ट हो जाता है। क्रय केंद्र संचालकों का कहना है एफसीआई ने भी गोदाम मेें रखवाने के लिए शुल्क तय कर रखा है।
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इनसेट
विधायक ने सीएम से की शिकायत
गेहूं खरीद के नाम पर किसानों से हो रही वसूली की शिकायत बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा ने मुख्यमंत्री से भी की। मुख्यमंत्री को उन्होंने बताया खरीद केंद्रों पर 100 रुपये प्रति क्विंटल तक वसूली हो रही। जिन किसानों से पैसा मिलता है उनके अनाज की तुलाई तुरंत हो जाती है जबकि जिनसे पैसा नहीं मिलता उनको एक सप्ताह से लेकर दस दिन तक रोके रखा जाता है। विधायक ने कहा पिछली बार भोजिला मंडी में गड़बड़ी पकड़ी गई लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिर गेहूं खरीद में भी गड़बड़ी शुरू हो गई। उन्होंने कहा इस गड़बड़ी से सरकार की छवि खराब हो रही है।
0000000
- खरीद केंद्र में बिना पैसा दिए खरीद नहीं हो रही है। जिन किसानों के पास नकद पैसा नहीं होता, उनका गेहूं नहीं लिया जाता। शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही।
मोहर सिंह
- गेहूं जमा कराने के नाम पर पैसा मांगा जाता है। कई दिन इंतजार करने के बाद नंबर आता है। ऐसे में मजबूरी में पैसा देना पड़ता है।
रवींद्र
- टोकन लेने के कई दिन बाद नंबर आता है। तुलाई के समय सौ रुपये क्विंटल के हिसाब से पैसे मांगे जाते हैं। पैसा न देने पर नंबर आने के बाद भी तुलाई नहीं होती है।
अविनाश कुमार भार्गव
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झांसी। कोरोना काल में गेहूं खरीद काफी धीमी चल रही है लेकिन, इसके बावजूद कई क्रय केंद्र ऐसे हैं जहां तुलाई के नाम पर किसानों से पैसे वसूले जा रहे हैं। किसानों का आरोप है उनसे 100-150 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसा मांगा जाता है। न देने वाले किसानों से गेहूं खरीद नहीं की जाती। सबसे अधिक पीसीएफ एवं पीसीयू क्रय केंद्रों की सामने आई है। इस वजह से किसान परेशान हैं।
अप्रैल माह से जनपद में गेहूं खरीद आरंभ हुई लेकिन, कोरोना के कहर के चलते यह रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। अभी तक जनपद में 452 किसानों से कुल 20,930 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका जबकि इसके लिए सौ से अधिक केंद्र खोले गए। नियमानुसार शासन ने पल्लेदारी के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की है लेकिन, अधिकांश क्रय केंद्रों में कई गुना अधिक पैसा वसूला जा रहा। भुक्तभोगी किसानों का कहना है किसी भी केंद्र में तुलाई से पहले 100-150 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसे देने पड़ते हैं। कई किसान इतना नकद पैसा लेकर केंद्रों पर नहीं जाते। कई दिन इंतजार के बाद उनका नंबर आता है लेकिन, पास में पैसा न होने से इन किसानों को लौटा दिया जाता है। सबसे अधिक शिकायतें पीसीएफ एवं पीसीयू की सामने आई हैं। वहीं, एआर अनूप कुमार द्विवेदी का कहना है ऐसी शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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संचालकों ने एफसीआई पर फोड़ा ठीकरा
गेहूं क्रय केंद्र संचालकों का कहना है गेहूं खरीदने के बाद एफसीआई गोदाम में जमा कराना होता है। केंद्र संचालक को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। संचालकों का कहना है एफसीआई गोदाम में आसानी से अनलोडिंग नहीं होती। समय पर अनलोडिंग न होने से माल-भाड़े की लागत बढ़ जाती है। कई बार क्वालिटी कंट्रोल के नाम पर एफसीआई से जबरन गेेहूं रिजेक्ट हो जाता है। क्रय केंद्र संचालकों का कहना है एफसीआई ने भी गोदाम मेें रखवाने के लिए शुल्क तय कर रखा है।
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विधायक ने सीएम से की शिकायत
गेहूं खरीद के नाम पर किसानों से हो रही वसूली की शिकायत बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा ने मुख्यमंत्री से भी की। मुख्यमंत्री को उन्होंने बताया खरीद केंद्रों पर 100 रुपये प्रति क्विंटल तक वसूली हो रही। जिन किसानों से पैसा मिलता है उनके अनाज की तुलाई तुरंत हो जाती है जबकि जिनसे पैसा नहीं मिलता उनको एक सप्ताह से लेकर दस दिन तक रोके रखा जाता है। विधायक ने कहा पिछली बार भोजिला मंडी में गड़बड़ी पकड़ी गई लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिर गेहूं खरीद में भी गड़बड़ी शुरू हो गई। उन्होंने कहा इस गड़बड़ी से सरकार की छवि खराब हो रही है।
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- खरीद केंद्र में बिना पैसा दिए खरीद नहीं हो रही है। जिन किसानों के पास नकद पैसा नहीं होता, उनका गेहूं नहीं लिया जाता। शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही।
मोहर सिंह
- गेहूं जमा कराने के नाम पर पैसा मांगा जाता है। कई दिन इंतजार करने के बाद नंबर आता है। ऐसे में मजबूरी में पैसा देना पड़ता है।
रवींद्र
- टोकन लेने के कई दिन बाद नंबर आता है। तुलाई के समय सौ रुपये क्विंटल के हिसाब से पैसे मांगे जाते हैं। पैसा न देने पर नंबर आने के बाद भी तुलाई नहीं होती है।
अविनाश कुमार भार्गव