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जनरल रावत ने तीन महीने पहले पीतांबरा पीठ में किया था अनुष्ठान
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झांसी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत तीन महीने पहले दतिया आए थे। यहां उन्होंने पीतांबरा पीठ में विशेष अनुष्ठान किया था। साथ ही शिवजी का जलाभिषेक भी किया था। उनके साथ उनकी पत्नी मधुलिका भी थीं। वह छह घंटे से अधिक समय तक मंदिर में रहे थे। उनका ये दौरा पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था।
बुधवार को हेलीकॉप्टर क्रेश होने की वजह से सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका की मृत्यु हो गई। सीडीएस रावत 14 सितंबर को पत्नी मधुलिका के साथ झांसी से सटे मध्य प्रदेश के दतिया आए थे। हवाई जहाज से उतरने के बाद वे सीधे पीतांबरा पीठ पहुंच गए थे। मंदिर के भीतर मौजूद लोग एक बार में उन्हें पहचान भी नहीं पाए थे, क्योंकि हमेशा सेना की वर्दी में नजर आने वाले सीडीएस मंदिर के भीतर पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंगे हुए थे। उन्होंने पारंपरिक वस्त्र धोती-कुर्ता पहन रखा था और माथे पर तिलक लगा हुआ था। जबकि, पत्नी मधुलिका साड़ी में थीं। मंदिर में पहुंचते ही पहले पत्नी-पत्नी दोनों ने मां पीतांबरा के दर्शन किए थे। मां को हार-फूल और प्रसाद अर्पित किया था। इसके बाद उन्होंने वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया था। इसी बीच उन्होंने मंदिर परिसर में आयोजित एक विशेष अनुष्ठान में भी हिस्सा लिया था। ये अनुष्ठान चार घंटे से अधिक समय तक चला था। अनुष्ठान के दौरान पुरोहित जब मंत्रोच्चारण करते थे, तब जनरल रावत आंख बंद कर हाथ जोड़कर ध्यान की मुद्रा में आ जाते थे। बीच-बीच में पुरोहितों के कहने पर जलार्चन व अन्य क्रिया करते थे। इस दौरान उन्होंने पूरे मंदिर परिसर का भ्रमण किया था। वो स्थान भी देखा था, जहां 1962 में भारत-चीन युद्ध को रोकने के लिए यज्ञ किया गया था।
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बुधवार को हेलीकॉप्टर क्रेश होने की वजह से सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका की मृत्यु हो गई। सीडीएस रावत 14 सितंबर को पत्नी मधुलिका के साथ झांसी से सटे मध्य प्रदेश के दतिया आए थे। हवाई जहाज से उतरने के बाद वे सीधे पीतांबरा पीठ पहुंच गए थे। मंदिर के भीतर मौजूद लोग एक बार में उन्हें पहचान भी नहीं पाए थे, क्योंकि हमेशा सेना की वर्दी में नजर आने वाले सीडीएस मंदिर के भीतर पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंगे हुए थे। उन्होंने पारंपरिक वस्त्र धोती-कुर्ता पहन रखा था और माथे पर तिलक लगा हुआ था। जबकि, पत्नी मधुलिका साड़ी में थीं। मंदिर में पहुंचते ही पहले पत्नी-पत्नी दोनों ने मां पीतांबरा के दर्शन किए थे। मां को हार-फूल और प्रसाद अर्पित किया था। इसके बाद उन्होंने वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया था। इसी बीच उन्होंने मंदिर परिसर में आयोजित एक विशेष अनुष्ठान में भी हिस्सा लिया था। ये अनुष्ठान चार घंटे से अधिक समय तक चला था। अनुष्ठान के दौरान पुरोहित जब मंत्रोच्चारण करते थे, तब जनरल रावत आंख बंद कर हाथ जोड़कर ध्यान की मुद्रा में आ जाते थे। बीच-बीच में पुरोहितों के कहने पर जलार्चन व अन्य क्रिया करते थे। इस दौरान उन्होंने पूरे मंदिर परिसर का भ्रमण किया था। वो स्थान भी देखा था, जहां 1962 में भारत-चीन युद्ध को रोकने के लिए यज्ञ किया गया था।
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