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लिंग परीक्षण से लेकर प्रसव के अवैध कारोबार का गढ़ है झांसी
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झांसी। बुंदेलखंड ही नहीं आसपास के राज्यों, जिलों से लोग झांसी में लिंग परीक्षण, गर्भपात कराने के लिए आते हैं। इस तरह के अवैध कारोबार का झांसी गढ़ है। मेडिकल कॉलेज के सामने खुले दो-दो कमरों के अस्पतालों में यह कारोबार तेजी से फल फूल रहा है। स्वास्थ्य विभाग का ढुलमुल रवैया भी इसके लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है। आज तक विभाग की तरफ से अवैध कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे जिले में लिंग परीक्षण से लेकर गर्भपात, प्रसव के अवैध कारोबार चल रहा है। इसके लिए बाकायदा एजेंट सक्रिय हैं। महज दस हजार रुपये में लिंग की जांच कराकर पता लगाया जा सकता है कि कोख में पल रहा लड़का है या लड़की। खास बात ये है कि जनपद में लिंग परीक्षण ज्यादातर बाहरी शहरों और राज्यों के लोगों का कराया जा रहा है। ताकि, शहर में इस खेल का ‘शोर’ सुनाई न हो। जिले में 70-75 अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। इनमें से कम से कम दस सेंटरों में लिंग परीक्षण का खेल चल रहा है। ठेका लेकर दूरदराज के लोगों को लिंग परीक्षण के लिए झांसी लाया जाता है। यहां ग्राहक की एजेंट से मुलाकात कराई जाती है।
इसके बाद एजेंट ग्राहक को अपने सेटिंग वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ले जाता है। जिस मशीन का स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण और ट्रैकर लगा होता है, उससे लिंग की जांच नहीं की जाती है। इस गोरखधंधा में लिप्त सेंटर दूसरी अल्ट्रासाउंड मशीन भी रखे रहते हैं, जिसमें ट्रैकर नहीं लगा होता है। उससे ही लिंग परीक्षण किया जाता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के ढुलमुल रवैये की वजह से यह धंधा फलफूल रहा है। इसके अलावा गर्भपात का भी खेल भी जमकर चल रहा है। मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित दो-दो कमरों में चलने वाले कथित अस्पतालों में अवैध गर्भपात कराया जा रहा है।
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दस सेंटरों पर नहीं लगे ट्रैकर
शहर में संचालित दस अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ट्रैकर तक नहीं लगे हैं। जबकि, बिना ट्रैकर के अल्ट्रासाउंड मशीन चलनी ही नहीं चाहिए। इसे स्वास्थ्य विभाग का लचर रवैया न कहें तो भला क्या कहें। इन सेंटरों को विभाग नोटिस जारी कर चुप्पी साध लेता है। किसी का भी लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
सात साल में सिर्फ दो मामले पकड़े
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पीएनडीटी एक्ट के तहत पिछले सात साल में लिंग परीक्षण में लिप्त सिर्फ दो मामले पकड़े गए हैं। वह भी एक हरियाणा पुलिस तो दूसरा मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने पकड़ा है। झांसी के स्वास्थ्य विभाग को कुछ दिखाई नहीं देता है। सबकुछ दुरुस्त होने की बात कही जाती है।
ये रेट हैं तय
गर्भपात कराना: 20 हजार
लिंग की जांच: 10 हजार
अवैध डिलीवरी: 30 हजार
ये है कानून
- गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत गर्भधारण पूर्व या बाद में लिंग चयन और जन्म से पहले कन्या भ्रूण हत्या के लिए लिंग परीक्षण कराना गुनाह है।
- भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत तीन से पांच साल तक की जेल व दस हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- गर्भवती स्त्री का जबरदस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
- धारा 313 के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
- धारा 314 के तहत गर्भपात करने के मकसद से किए गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
- आईपीसी की धारा 315 के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध है। इस पर दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।
जिले के सभी नर्सिंगहोमों का सत्यापन कराया जाएगा कि उनके यहां क्या सुविधाएं हैं। यदि कहीं पर भी कमी मिलती है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा लिंग परीक्षण से लेकर किसी भी तरह का गलत काम की किसी व्यक्ति के पास जानकारी है तो वह सीधे आकर सूचित करे। जानकारी देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वीके सिन्हा, एडी हेल्थ।
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जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे जिले में लिंग परीक्षण से लेकर गर्भपात, प्रसव के अवैध कारोबार चल रहा है। इसके लिए बाकायदा एजेंट सक्रिय हैं। महज दस हजार रुपये में लिंग की जांच कराकर पता लगाया जा सकता है कि कोख में पल रहा लड़का है या लड़की। खास बात ये है कि जनपद में लिंग परीक्षण ज्यादातर बाहरी शहरों और राज्यों के लोगों का कराया जा रहा है। ताकि, शहर में इस खेल का ‘शोर’ सुनाई न हो। जिले में 70-75 अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। इनमें से कम से कम दस सेंटरों में लिंग परीक्षण का खेल चल रहा है। ठेका लेकर दूरदराज के लोगों को लिंग परीक्षण के लिए झांसी लाया जाता है। यहां ग्राहक की एजेंट से मुलाकात कराई जाती है।
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इसके बाद एजेंट ग्राहक को अपने सेटिंग वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर पर ले जाता है। जिस मशीन का स्वास्थ्य विभाग से पंजीकरण और ट्रैकर लगा होता है, उससे लिंग की जांच नहीं की जाती है। इस गोरखधंधा में लिप्त सेंटर दूसरी अल्ट्रासाउंड मशीन भी रखे रहते हैं, जिसमें ट्रैकर नहीं लगा होता है। उससे ही लिंग परीक्षण किया जाता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के ढुलमुल रवैये की वजह से यह धंधा फलफूल रहा है। इसके अलावा गर्भपात का भी खेल भी जमकर चल रहा है। मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित दो-दो कमरों में चलने वाले कथित अस्पतालों में अवैध गर्भपात कराया जा रहा है।
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दस सेंटरों पर नहीं लगे ट्रैकर
शहर में संचालित दस अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ट्रैकर तक नहीं लगे हैं। जबकि, बिना ट्रैकर के अल्ट्रासाउंड मशीन चलनी ही नहीं चाहिए। इसे स्वास्थ्य विभाग का लचर रवैया न कहें तो भला क्या कहें। इन सेंटरों को विभाग नोटिस जारी कर चुप्पी साध लेता है। किसी का भी लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
सात साल में सिर्फ दो मामले पकड़े
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पीएनडीटी एक्ट के तहत पिछले सात साल में लिंग परीक्षण में लिप्त सिर्फ दो मामले पकड़े गए हैं। वह भी एक हरियाणा पुलिस तो दूसरा मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने पकड़ा है। झांसी के स्वास्थ्य विभाग को कुछ दिखाई नहीं देता है। सबकुछ दुरुस्त होने की बात कही जाती है।
ये रेट हैं तय
गर्भपात कराना: 20 हजार
लिंग की जांच: 10 हजार
अवैध डिलीवरी: 30 हजार
ये है कानून
- गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 के तहत गर्भधारण पूर्व या बाद में लिंग चयन और जन्म से पहले कन्या भ्रूण हत्या के लिए लिंग परीक्षण कराना गुनाह है।
- भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत तीन से पांच साल तक की जेल व दस हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- गर्भवती स्त्री का जबरदस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
- धारा 313 के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
- धारा 314 के तहत गर्भपात करने के मकसद से किए गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।
- आईपीसी की धारा 315 के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध है। इस पर दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।
जिले के सभी नर्सिंगहोमों का सत्यापन कराया जाएगा कि उनके यहां क्या सुविधाएं हैं। यदि कहीं पर भी कमी मिलती है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा लिंग परीक्षण से लेकर किसी भी तरह का गलत काम की किसी व्यक्ति के पास जानकारी है तो वह सीधे आकर सूचित करे। जानकारी देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वीके सिन्हा, एडी हेल्थ।