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अयोग्य को दे दिया उपाचार्य का वेतन
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Thu, 28 May 2015 12:34 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में पूर्व के अधिकारियों के कार्यकालों में चहेतों को मनमाने ढंग से बांटी गईं रेवड़ियों पर अब शिकंजा कसने लगा है। ऑडिट रिपोर्ट में पद के लिए अयोग्य की नियुक्ति और वेतन से अधिक भुगतान करने की बात सामने आने के बाद शासन ने तीन कार्यालय अधीक्षकों से रिकवरी के आदेश जारी किए हैं।
बीयू में कार्यरत एक अनुभाग अधिकारी को वर्ष 2005 में एससी/एसटी समन्वयक पद पर तैनात किया गया था। ऑडिट टीम ने अपनी रिपोर्ट में आपत्ति जताई थी कि इस पद पर रहते हुए उन्हें जो वेतन भत्तों का भुगतान किया गया वह अमान्य था। समन्वयक पद के लिए न तो कोई साक्षात्कार हुआ न चयन समिति गठित की गई। जो वेतनमान दिया गया वह उपाचार्य के समकक्ष था लेकिन उनकी योग्यता इसके तुल्य नहीं थी। इसलिए पदोन्नति नहीं की जा सकती थी। अत: समन्वयक पद पर तैनात रहते हुए जो 2.40 लाख रुपये का भुगतान किया गया शासन ने उसकी रिकवरी के आदेश जारी करते हुए आख्या मांगी है।
इनके अलावा दो और अनुभाग अधिकारियों से भी रिकवरी की जाएगी। इन दोनों अधिकारियों को वेतन भत्तों का भुगतान अधिक कर दिया गया था। इस पर शासन ने व्यक्तिगत पत्रावली और वेतन के अनुसार दोनों से 32-32 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश दिए हैं।
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बीयू में कार्यरत एक अनुभाग अधिकारी को वर्ष 2005 में एससी/एसटी समन्वयक पद पर तैनात किया गया था। ऑडिट टीम ने अपनी रिपोर्ट में आपत्ति जताई थी कि इस पद पर रहते हुए उन्हें जो वेतन भत्तों का भुगतान किया गया वह अमान्य था। समन्वयक पद के लिए न तो कोई साक्षात्कार हुआ न चयन समिति गठित की गई। जो वेतनमान दिया गया वह उपाचार्य के समकक्ष था लेकिन उनकी योग्यता इसके तुल्य नहीं थी। इसलिए पदोन्नति नहीं की जा सकती थी। अत: समन्वयक पद पर तैनात रहते हुए जो 2.40 लाख रुपये का भुगतान किया गया शासन ने उसकी रिकवरी के आदेश जारी करते हुए आख्या मांगी है।
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इनके अलावा दो और अनुभाग अधिकारियों से भी रिकवरी की जाएगी। इन दोनों अधिकारियों को वेतन भत्तों का भुगतान अधिक कर दिया गया था। इस पर शासन ने व्यक्तिगत पत्रावली और वेतन के अनुसार दोनों से 32-32 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश दिए हैं।
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