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कूड़े के ढेर में सड़ते हैं मृत गोवंश, नोच-नोचकर खाते हैं कुत्ते
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झांसी। प्रदेश सरकार गोवंश को बचाने और संरक्षित करने के लिए गोवंश आश्रय स्थल खुलवा रही है, लेकिन नगर निगम जिंदा तो छोड़िए मृत गोवंश की भी कद्र नहीं कर पा रहा है। मृत गोवंश को उठाकर गरिया गांव में डंपिंग ग्राउंड पर कूड़े के ढेर में फेंक दिया जाता है। गोवंश यहां पर पड़ा सड़ता रहता है और कु त्ते नोच-नोचकर खाते हैं। वहीं, गोवंश को अगले दिन दफन किया जाता है। इसके चलते क्षेत्र में बदबू फैल रही है। मामले को लेकर पार्षद ने भी शिकायत की है।
महानगर में गोवंश मृत पड़े होने और घायल होने के करीब 20 मामले हर महीने नगर निगम के पास पहुंचते हैं। सूचना मिलने पर नगर निगम की टीम गोवंश को संबंधित स्थान से उठाती है। निर्देशों के मुताबिक मृत गोवंश को शहर से बाहर बने डंपिंग ग्राउंड पर ले जाकर दफनाना चाहिए, लेकिन इसे लेकर लापरवाही बरती जा रही है। मृत गोवंश को गरिया गांव में बने डंपिंग ग्राउंड पर फेंक दिया जाता है। यहां कूड़े के ढेर के बीच गोवंश सड़ता रहता है और कुत्ते नोच-नोचकर खाते हैं।
लोगों का कहना है कि यहां से बदबू उठती है, तो लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मामले को लेकर पार्षद ने भी शिकायत की है। पार्षद छोटेलाल का कहना है कि डंपिंग ग्राउंड पर मृत गोवंश को तुरंत दफनाया नहीं जाता। कभी शाम को तो कभी अगले दिन सुबह दफ नाया जाता है। इस बीच गोवंश सड़ता रहता है। आवारा जानवर घूमते हैं। उन्होंने बताया कि डंपिंग ग्राउंड के आसपास खेतों में काम करने वाले लोग कई बार इसे लेकर शिकायत कर चुके हैं।
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बचाव के इंतजाम भी दुरुस्त नहीं
महानगर में घायल और मृत गोवंश को उठाने के इंतजाम दुरुस्त नहीं है। खुशीपुरा निवासी उमाशंकर पिपरिया बताते हैं कि दो दिन पहले नाले में गाय गिर गई। नगर निगम के कंट्रोल रूम पर फोन किया, लेकिन कोई गाड़ी नहीं आई। बाद में लोगों ने मिलकर गोवंश को निकाला। इसके साथ ही, पुलिया नंबर नौ के महेश कुमार कहते हैं कि पुलिया नंबर नौ में हनुमान मंदिर के सामने मृत गोवंश को उठाने की सूचना निगम को दी गई, लेकिन कोई नहीं आया। बाद में लोगों ने चंदा कर गोवंश को उठवाया।
सूचना मिलने पर मृत गोवंश को तुरंत उठवाया जाता है। साथ ही, गरिया गांव में डंपिंग ग्राउंड पर दफनाया जाता है। मैनें यहां कई बार निरीक्षण किया है। हो सकता है जेसीबी देर से पहुंचने से गोवंश दफनाया न जा सका हो। गोवंश के संरक्षण के लिए नगर निगम सकारात्मक प्रयास कर रहा है।
डॉ. राघवेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम
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महानगर में गोवंश मृत पड़े होने और घायल होने के करीब 20 मामले हर महीने नगर निगम के पास पहुंचते हैं। सूचना मिलने पर नगर निगम की टीम गोवंश को संबंधित स्थान से उठाती है। निर्देशों के मुताबिक मृत गोवंश को शहर से बाहर बने डंपिंग ग्राउंड पर ले जाकर दफनाना चाहिए, लेकिन इसे लेकर लापरवाही बरती जा रही है। मृत गोवंश को गरिया गांव में बने डंपिंग ग्राउंड पर फेंक दिया जाता है। यहां कूड़े के ढेर के बीच गोवंश सड़ता रहता है और कुत्ते नोच-नोचकर खाते हैं।
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लोगों का कहना है कि यहां से बदबू उठती है, तो लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मामले को लेकर पार्षद ने भी शिकायत की है। पार्षद छोटेलाल का कहना है कि डंपिंग ग्राउंड पर मृत गोवंश को तुरंत दफनाया नहीं जाता। कभी शाम को तो कभी अगले दिन सुबह दफ नाया जाता है। इस बीच गोवंश सड़ता रहता है। आवारा जानवर घूमते हैं। उन्होंने बताया कि डंपिंग ग्राउंड के आसपास खेतों में काम करने वाले लोग कई बार इसे लेकर शिकायत कर चुके हैं।
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बचाव के इंतजाम भी दुरुस्त नहीं
महानगर में घायल और मृत गोवंश को उठाने के इंतजाम दुरुस्त नहीं है। खुशीपुरा निवासी उमाशंकर पिपरिया बताते हैं कि दो दिन पहले नाले में गाय गिर गई। नगर निगम के कंट्रोल रूम पर फोन किया, लेकिन कोई गाड़ी नहीं आई। बाद में लोगों ने मिलकर गोवंश को निकाला। इसके साथ ही, पुलिया नंबर नौ के महेश कुमार कहते हैं कि पुलिया नंबर नौ में हनुमान मंदिर के सामने मृत गोवंश को उठाने की सूचना निगम को दी गई, लेकिन कोई नहीं आया। बाद में लोगों ने चंदा कर गोवंश को उठवाया।
सूचना मिलने पर मृत गोवंश को तुरंत उठवाया जाता है। साथ ही, गरिया गांव में डंपिंग ग्राउंड पर दफनाया जाता है। मैनें यहां कई बार निरीक्षण किया है। हो सकता है जेसीबी देर से पहुंचने से गोवंश दफनाया न जा सका हो। गोवंश के संरक्षण के लिए नगर निगम सकारात्मक प्रयास कर रहा है।
डॉ. राघवेंद्र सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम