फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   ganesh ustav

सौभाग्य की होगी कामना, सुहागिनें लगाएंगी हल्दी-कुमकुम

Sat, 03 Sep 2016 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 03 Sep 2016 01:17 AM IST
विज्ञापन
झांसी। महाराष्ट्रियन समाज ने गणेश महोत्सव की तैयारियां तेज कर दी हैं। गणेशोत्सव में सुहागिन महिलाएं सौभाग्य की कामना कर एक दूसरे को हल्दी कुमकुम लगाएंगी। महानगर के गणेश मंदिर में चतुर्थी से दशमी तक महाराष्ट्रियन संस्कृति दिखेगी। गणेशोत्सव के अलावा मकर संक्रांति, चैत्र नवरात्र के पर्व पर भी महाराष्ट्रियन समाज की सुहागिन महिलाएं एक दूसरे को सौभाग्य के  रूप में सूखी हल्दी व कुमकुम लगाती है। हल्दी-कुमकु म मंगलवार व शुक्रवार को ही लगाया जाता है। यह महिलाओं को निरोगी भी बनाता है। महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सह सचिव उज्जवल देवधर ने बताया कि झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने इस परंपरा क ो आम मराठियों के सार्वजनिक समारोह में शुरू किया था।
विज्ञापन


ज्येष्ठ नक्षत्र में विराजती है महालक्ष्मी
 गणेश उत्सव में महालक्ष्मी का पूजन अनिवार्य है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्टी या सप्तमी में पड़ने वाले  ज्येष्ठ नक्षत्र में महालक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित कर उनका आह्वान किया जाता है। दूसरे दिन महालक्ष्मी को महाप्रसाद में 16 सब्जियां, 16 चटनियां तथा 16 मिठाइयां अर्पित की जाती है। दशमी पर मूल नक्षत्र में महालक्ष्मी की प्रतिमा का विसर्जन गणेश प्रतिमा के साथ होता है। सह सचिव के मुताबिक कई परिवारों में महालक्ष्मी की प्रतिमा तो, कु छ परिवार तालाब या नदी के किनारे के पांच पत्थर लेकर उन्हें महालक्ष्मी के रूप में पूजते हैं।
विज्ञापन


मोदक ही नहीं, दही-चावल भी है खास
भगवान गणेश को मोदक बहुत प्रिय है। लेकिन, विसर्जन वाले दिन भगवान को कई विशेष प्रसाद लगते है। उन्हें पंचमेवा की पंजीरी, गीले चने की दाल तथा खीरा का प्रसाद लगता है। विसर्जन अवसर पर भगवान को दही चावल का भी प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो प्रतिमा के साथ विसर्जित होता है। मान्यता है कि अपने धाम जा रहे अतिथि को खाने का प्रबंध कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पानी वाली धर्मशाला में विसर्जित होगी प्रतिमा
पानी वाली धर्मशाला में पिछले 106 वर्षों की तरह इस वर्ष भी गणेश मंदिर में विराजमान होने वाली मूर्ति दशमी पर विसर्जित की जाएगी। समिति के सदस्य सुरेश खेर के अनुसार 12 सितंबर को विसर्जन शोभायात्रा समूचे नगर क्षेत्र में भ्रमण कर पानी वाली धर्मशाला में पहुंचेगी। यहां विधिवत मूर्ति विसर्जित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि महानगर में सजने वाली लगभग सभी मूर्तियां लक्ष्मी तालाब, पहूंज बांध, ओरछा नदी में आदि जलाशयों में विसर्जित होती है।

 
भैरवी गायन से संपन्न होता है शास्त्रीय कार्यक्रम
गणेशोत्सव में नाटक व शास्त्रीय गायन की परंपरा महाराष्ट्रियन समाज में है। शास्त्रीय संगीत का प्रारंभ गणेश वंदना से, तो समापन भैरवी गायन से होता है। समापन सूर्योदय से ठीक पहले होता है। इसके अलावा भगवान गणेश की आरती में शंख, झांझ, चंद्रघंटा का ही इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed