{"_id":"5d67f9508ebc3e939e46e788","slug":"ganesh-chaturthi-and-hartalika-teej-on-same-day-jhansi-news-jhs1468381172","type":"story","status":"publish","title_hn":"गणेश चतुर्थी संग मनेगी हरितालिका तीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गणेश चतुर्थी संग मनेगी हरितालिका तीज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गणेश चतुर्थी संग मनेगी हरितालिका तीज
झांसी। इस साल गणेश चतुर्थी एवं हरितालिका तीज का पर्व एक ही दिन सोमवार 2 सितंबर को मनाया जाएगा। करवा चौथ, कजरी तीज की तरह ही हरियाली तीज भी सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं 24 घंटे का निर्जल व्रत धारण कर मां गौरी व भगवान शिव की आराधना करती है।
एक सितंबर रविवार की सुबह भादो शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 11 बजे से प्रारंभ हो जाएगी। जो सोमवार की सुबह 9 बजकर एक मिनट तक रहेगी। इसके बाद भादो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की तिथि लग जाएगी और गणेश उत्सव प्रारंभ हो जाएगा। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार हरियाली तीज की उदया तिथि सोमवार दो सितंबर को है। ऐसे में व्रत व पूजा का महत्व दिन और रात के लिए शुभ है। आचार्य शांतनू पांडेय के अनुसार इस त्योहार का बुंदेलखंड में विशेष महत्व है। इसका व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है और चित्रा नक्षत्र में खोला जाता है। दो सितंबर को हस्त नक्षत्र दिन में एक बजकर 26 मिनट तक है। चित्रा नक्षत्र तीन सितंबर को दोपहर 12 बजकर 3 मिनट तक रहेगा।
रात भर जागरण कर पूजा करती हैं महिलाएं
बुंदेलखंड में हरियाली तीज का बड़ा महत्व है। सुहागिन महिलाएं इसमें 24 घंटे का कठिन व्रत रखती है और पानी भी नहीं पीती है। महिलाएं त्योहार की रात में साड़ियों से झांकी सजाती है। इसमें मां पार्वती, शिव जी को विराजमान कर रात भर जागरण कर भजन गाती है। तीन प्रहर में पूजा करती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार पूजा में सुहाग की सामग्री मां पार्वती को अर्पित की जाती है। इनमें सिंदूर, बिंदी, कुमकुम, बिछियां आदि रहता है। वहीं झांकी में केला के पत्तों का भी उपयोग होता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को पाने के लिए मां पार्वती ने पहली बार इस व्रत को धारण किया था। उन्होंने अन्न जल धारण नहीं किया था। वहीं कई अविवाहित कन्याएं भी इच्छित वर को प्राप्त करने के लिए यह व्रत धारण करतीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। इस साल गणेश चतुर्थी एवं हरितालिका तीज का पर्व एक ही दिन सोमवार 2 सितंबर को मनाया जाएगा। करवा चौथ, कजरी तीज की तरह ही हरियाली तीज भी सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं 24 घंटे का निर्जल व्रत धारण कर मां गौरी व भगवान शिव की आराधना करती है।
एक सितंबर रविवार की सुबह भादो शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 11 बजे से प्रारंभ हो जाएगी। जो सोमवार की सुबह 9 बजकर एक मिनट तक रहेगी। इसके बाद भादो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की तिथि लग जाएगी और गणेश उत्सव प्रारंभ हो जाएगा। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार हरियाली तीज की उदया तिथि सोमवार दो सितंबर को है। ऐसे में व्रत व पूजा का महत्व दिन और रात के लिए शुभ है। आचार्य शांतनू पांडेय के अनुसार इस त्योहार का बुंदेलखंड में विशेष महत्व है। इसका व्रत हस्त नक्षत्र में किया जाता है और चित्रा नक्षत्र में खोला जाता है। दो सितंबर को हस्त नक्षत्र दिन में एक बजकर 26 मिनट तक है। चित्रा नक्षत्र तीन सितंबर को दोपहर 12 बजकर 3 मिनट तक रहेगा।
विज्ञापन
रात भर जागरण कर पूजा करती हैं महिलाएं
बुंदेलखंड में हरियाली तीज का बड़ा महत्व है। सुहागिन महिलाएं इसमें 24 घंटे का कठिन व्रत रखती है और पानी भी नहीं पीती है। महिलाएं त्योहार की रात में साड़ियों से झांकी सजाती है। इसमें मां पार्वती, शिव जी को विराजमान कर रात भर जागरण कर भजन गाती है। तीन प्रहर में पूजा करती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार पूजा में सुहाग की सामग्री मां पार्वती को अर्पित की जाती है। इनमें सिंदूर, बिंदी, कुमकुम, बिछियां आदि रहता है। वहीं झांकी में केला के पत्तों का भी उपयोग होता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को पाने के लिए मां पार्वती ने पहली बार इस व्रत को धारण किया था। उन्होंने अन्न जल धारण नहीं किया था। वहीं कई अविवाहित कन्याएं भी इच्छित वर को प्राप्त करने के लिए यह व्रत धारण करतीं है।
विज्ञापन