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सालाना करीब एक लाख की दर से बढ़ रहे अन्ना जानवर
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शहर की सड़कों पर कब्जा जमाये आवारा जानवर।
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सालाना करीब एक लाख की दर से बढ़ रहे अन्ना जानवर
हिमांशु पांडेय
झांसी। किसानों की परेशानी का सबब बने अन्ना पशुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हाल में तैयार र्हुई पशु गणना की अंतरिम रिपोर्ट से मालूम चला कि हर वर्ष करीब एक लाख गोवंश सड़कों पर खुले छोड़ दिए जाते हैं। पूरे प्रदेश में सबसे अधिक अन्ना पशु सुल्तानपुर में पाए गए, जबकि झांसी में इनकी संख्या पांच साल में करीब दोगुनी हो गई।
केंद्र सरकार की ओर से हर पांच साल में पशु गणना कराई जाती है। पिछली गणना 2017 में होनी थी, लेकिन यह नहीं कराई जा सकी। उसकी जगह यह गणना 2019 में आरंभ कराई गई। इसका जिम्मा पशुपालन विभाग को सौंपा गया। गणना में गड़बड़ी रोकने के लिए पहली बार टेबलेट का इस्तेमाल किया गया। नौ माह तक विभिन्न चरणों में चली गणना के बाद अक्तूबर में यह काम पूरा कर लिया गया। अब निदेशालय स्तर पर आंकड़ों के मिलान का काम चल रहा है, लेकिन अंतरिम परिणामों में अन्ना जानवरों की संख्या हैरत में डालने वाली है।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछली गणना के दौरान पूरे प्रदेश में कुल 10,09,436 अन्ना जानवर थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 15,87,957 हो गई। इनमें सर्वाधिक आवारा पशु ग्रामीण इलाकों में 14,64,951 पाए गए, जबकि शहरी इलाकों में इनकी संख्या 1,23,006 मिली। इस तरह पिछले छह साल में करीब पौने छह लाख पशुओं की संख्या में इजाफा हो गया। आंकड़ों के मुताबिक पूरे सूबे में सर्वाधिक संख्या 73,952 आवारा जानवर सुल्तानपुर में मिले। इसके बाद सीतापुर में 68,161, गोंडा में 54,603, झांसी में 46709, उन्नाव में 46,121 एवं आगरा में 32,087 जानवर पाए गए।
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छह जिलों में कम हुई संख्या
सूबे के छह जिलों में अवारा गोवंश की संख्या में पिछली गणना के मुकाबले कमी भी आई है। इनमें प्रयागराज, मुरादाबाद, रामपुर, चंदौली, कानपुर नगर एवं कुशीनगर शामिल हैं-
जिले पिछली गणना में संख्या 2019 में हुई गणना में संख्या
प्रयागराज- 33887 29435
मुरादाबाद 3310 1806
रामपुर 2417 2138
चंदौली 6568 5882
कानपुर नगर 426006 34755
कुशीनगर 7608 1860
बुंदेलखंड में अन्ना जानवरोें की बढ़ती संख्या
जिले पिछली गणना में संख्या 2019 में हुई गणना में संख्या
बांदा 14590 36278
चित्रकूट 4210 24650
हमीरपुर 11332 40217
जालौन 15093 20716
झांसी 25258 46709
ललितपुर 22759 40996
महोबा 15574 63042
धरे रह गए तमाम उपाय, बढ़ते गए अन्ना जानवर
- फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ मार्ग दुर्घटनाओं की बने वजह
झांसी। फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही अन्ना जानवर मार्ग दुर्घटनाओं की भी बड़ी वजह बने हुए हैं। इन समस्याओं को देखते हुए शासन-प्रशासन ने इन पर काबू पाने की कई कवायदें शुरू कीं, लेकिन इनका फायदा होता नहीं दिखा।
अन्ना जानवरों की वजह से खेती खराब होने लगी। इस वजह से तमाम किसानों ने खेती-किसानी से किनारा कर लिया। इसी तरह मार्ग दुर्घटना की भी अन्ना जानवर सबसे बड़ी वजह बनने लगे। अन्ना जानवर सड़कों पर डेरा जमाए रहते हैं। रात के अंधेरे में कई लोगों की जान इसी वजह से हुई दुर्घटनाओं में चली गई। अन्ना जानवरों के आतंक से परेशान लोगों ने इनको स्कूलों में बंद करना शुरू कर दिया। लोगों के गुस्से को देखते हुए सरकार ने गो-आश्रय स्थल आरंभ किए लेकिन इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए यह आश्रय स्थल भी नाकाफी साबित हो रहे। प्रशासन ने गांवों में इनको रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाया लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ।
अन्ना जानवरों को छुट्टा छोड़ने के पीछे कई कारण हैं। बुंदलेखंड में गाय से दूध कम मिलता है, लोग इस वजह से इनको जल्दी बाहर छोड़ देते हैं। खेती किसानी कार्यों में गोवंशी पशुओं का काफी इस्तेमाल होता था, अब यह भी करीब बंद हो गया है। तमाम घरों में पशुपालन बंद कर दिया गया और पशुओं को आवारा छोड़ दिया गया। स्लाटर हाउस में पूरी तरह पाबंदी भी एक वजह है।
- डॉ.योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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हिमांशु पांडेय
झांसी। किसानों की परेशानी का सबब बने अन्ना पशुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हाल में तैयार र्हुई पशु गणना की अंतरिम रिपोर्ट से मालूम चला कि हर वर्ष करीब एक लाख गोवंश सड़कों पर खुले छोड़ दिए जाते हैं। पूरे प्रदेश में सबसे अधिक अन्ना पशु सुल्तानपुर में पाए गए, जबकि झांसी में इनकी संख्या पांच साल में करीब दोगुनी हो गई।
केंद्र सरकार की ओर से हर पांच साल में पशु गणना कराई जाती है। पिछली गणना 2017 में होनी थी, लेकिन यह नहीं कराई जा सकी। उसकी जगह यह गणना 2019 में आरंभ कराई गई। इसका जिम्मा पशुपालन विभाग को सौंपा गया। गणना में गड़बड़ी रोकने के लिए पहली बार टेबलेट का इस्तेमाल किया गया। नौ माह तक विभिन्न चरणों में चली गणना के बाद अक्तूबर में यह काम पूरा कर लिया गया। अब निदेशालय स्तर पर आंकड़ों के मिलान का काम चल रहा है, लेकिन अंतरिम परिणामों में अन्ना जानवरों की संख्या हैरत में डालने वाली है।
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रिपोर्ट के मुताबिक पिछली गणना के दौरान पूरे प्रदेश में कुल 10,09,436 अन्ना जानवर थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 15,87,957 हो गई। इनमें सर्वाधिक आवारा पशु ग्रामीण इलाकों में 14,64,951 पाए गए, जबकि शहरी इलाकों में इनकी संख्या 1,23,006 मिली। इस तरह पिछले छह साल में करीब पौने छह लाख पशुओं की संख्या में इजाफा हो गया। आंकड़ों के मुताबिक पूरे सूबे में सर्वाधिक संख्या 73,952 आवारा जानवर सुल्तानपुर में मिले। इसके बाद सीतापुर में 68,161, गोंडा में 54,603, झांसी में 46709, उन्नाव में 46,121 एवं आगरा में 32,087 जानवर पाए गए।
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छह जिलों में कम हुई संख्या
सूबे के छह जिलों में अवारा गोवंश की संख्या में पिछली गणना के मुकाबले कमी भी आई है। इनमें प्रयागराज, मुरादाबाद, रामपुर, चंदौली, कानपुर नगर एवं कुशीनगर शामिल हैं-
जिले पिछली गणना में संख्या 2019 में हुई गणना में संख्या
प्रयागराज- 33887 29435
मुरादाबाद 3310 1806
रामपुर 2417 2138
चंदौली 6568 5882
कानपुर नगर 426006 34755
कुशीनगर 7608 1860
बुंदेलखंड में अन्ना जानवरोें की बढ़ती संख्या
जिले पिछली गणना में संख्या 2019 में हुई गणना में संख्या
बांदा 14590 36278
चित्रकूट 4210 24650
हमीरपुर 11332 40217
जालौन 15093 20716
झांसी 25258 46709
ललितपुर 22759 40996
महोबा 15574 63042
धरे रह गए तमाम उपाय, बढ़ते गए अन्ना जानवर
- फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ मार्ग दुर्घटनाओं की बने वजह
झांसी। फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही अन्ना जानवर मार्ग दुर्घटनाओं की भी बड़ी वजह बने हुए हैं। इन समस्याओं को देखते हुए शासन-प्रशासन ने इन पर काबू पाने की कई कवायदें शुरू कीं, लेकिन इनका फायदा होता नहीं दिखा।
अन्ना जानवरों की वजह से खेती खराब होने लगी। इस वजह से तमाम किसानों ने खेती-किसानी से किनारा कर लिया। इसी तरह मार्ग दुर्घटना की भी अन्ना जानवर सबसे बड़ी वजह बनने लगे। अन्ना जानवर सड़कों पर डेरा जमाए रहते हैं। रात के अंधेरे में कई लोगों की जान इसी वजह से हुई दुर्घटनाओं में चली गई। अन्ना जानवरों के आतंक से परेशान लोगों ने इनको स्कूलों में बंद करना शुरू कर दिया। लोगों के गुस्से को देखते हुए सरकार ने गो-आश्रय स्थल आरंभ किए लेकिन इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए यह आश्रय स्थल भी नाकाफी साबित हो रहे। प्रशासन ने गांवों में इनको रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाया लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ।
अन्ना जानवरों को छुट्टा छोड़ने के पीछे कई कारण हैं। बुंदलेखंड में गाय से दूध कम मिलता है, लोग इस वजह से इनको जल्दी बाहर छोड़ देते हैं। खेती किसानी कार्यों में गोवंशी पशुओं का काफी इस्तेमाल होता था, अब यह भी करीब बंद हो गया है। तमाम घरों में पशुपालन बंद कर दिया गया और पशुओं को आवारा छोड़ दिया गया। स्लाटर हाउस में पूरी तरह पाबंदी भी एक वजह है।
- डॉ.योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी