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पहले दिन 88 हजार में 4 हजार बच्चे भी नहीं पहुंचे स्कूल
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स्कूल खुलने पर आर्य कन्या इंटर कॉलेज में प्रार्थना गीत गातीं छात्राएं । अमर उजाला
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झांसी। अभिभावक कोरोना से भयभीत हैं। उन्हें स्कूल खोलने का सरकार का निर्णय रास नहीं आ रहा है। यही वजह है कि कक्षा नौ से 12वीं तक की सोमवार से शुरू हुईं कक्षाओं में जिले के 88 हजार से अधिक बच्चों में से महज चार हजार ने ही उपस्थिति दर्ज कराई। कक्षाओं में इक्का-दुक्का बच्चे ही नजर आए।
कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए 17 मार्च को विद्यालय बंद कर दिए गए थे। सात माह की लंबी बंदी के बाद सोमवार से स्कूल खुले। लेकिन कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर ही रही। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले के 230 माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से बारहवीं तक के 88,514 विद्यार्थी हैं, लेकिन इनमें से लगभग आठ हजार के अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति नहीं जताई थी, परंतु इनमें से जिले भर में चार हजार से भी कम बच्चों ने उपस्थिति दर्ज कराई। अभिभावकों का कहना है कि न तो अभी कोरोना खत्म हुआ है और न ही दवा आई है, ऐसे में बच्चों को विद्यालय बुलाना लाजिमी नहीं है।
सुरक्षा उपायों के साथ पहुंचे बच्चे
झांसी। पहले दिन बच्चे पूरे सुरक्षा उपायों के साथ विद्यालय पहुंचे। बच्चों के चेहरे पर मास्क थे और सैनिटाइजर साथ में लिए हुए थे। ज्यादातर बच्चों को उनके अभिभावक स्कूल छोड़ने व लेने पहुंचे। स्कूलों में भी कोविड सुरक्षा के उपाय किए गए थे।
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कोरोना वायरस संक्रमण के नए मरीजों का मिलना लगातार जारी है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं हैं।
- कमल मल्होत्रा, सीपरी बाजार
पूरे कोरोना काल में बच्चों की घर में भी निगरानी करनी पड़ी। लेकिन, बाहर जाकर बच्चे मनमानी कर सकते हैं, जो खतरनाक है।
- कमलेश झा, भैरो खिड़की
कोरोना के नए मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में अभी बच्चों को स्कूल नहीं बुलाना चाहिए। थोड़ा इंतजार करना चाहिए।
- रिंकी श्रीवास्तव, मेहंदी बाग
बताया जा रहा है कि फरवरी में कोरोना की दवा आ जाएगी। ऐसे में दवा आने के बाद ही स्कूल खोने चाहिए। अभी रिस्क नहीं लेना चाहिए।
- पुष्पा सिंघानिया, सिविल लाइन
---- छात्राएं बोलीं ----
ऑनलाइन पढ़ाई में परेशानी बहुत होती थी। हम चाह रहे थे कि स्कूल खुल जाएं। इसमें परेशानी नहीं है।
- भारती, नंदनपुरा
घर में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता है। स्कूल में पढ़ाई बेहतर होती है। स्कूल खोलने का निर्णय ठीक है।
- अंजली, लहरगिर्द
हम पूरे सुरक्षा उपायों के साथ विद्यालय आए हैं। ऐसे में विद्यालय आने में किसी को कोई खतरा नहीं है।
- शैली, गुसाईंपुरा
काफी दिनों बाद स्कूल आकर अच्छा लग रहा है। अपनी और अपने साथियों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखेंगे।
- दिव्या गुप्ता, शहर
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कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए 17 मार्च को विद्यालय बंद कर दिए गए थे। सात माह की लंबी बंदी के बाद सोमवार से स्कूल खुले। लेकिन कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर ही रही। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले के 230 माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से बारहवीं तक के 88,514 विद्यार्थी हैं, लेकिन इनमें से लगभग आठ हजार के अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति नहीं जताई थी, परंतु इनमें से जिले भर में चार हजार से भी कम बच्चों ने उपस्थिति दर्ज कराई। अभिभावकों का कहना है कि न तो अभी कोरोना खत्म हुआ है और न ही दवा आई है, ऐसे में बच्चों को विद्यालय बुलाना लाजिमी नहीं है।
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सुरक्षा उपायों के साथ पहुंचे बच्चे
झांसी। पहले दिन बच्चे पूरे सुरक्षा उपायों के साथ विद्यालय पहुंचे। बच्चों के चेहरे पर मास्क थे और सैनिटाइजर साथ में लिए हुए थे। ज्यादातर बच्चों को उनके अभिभावक स्कूल छोड़ने व लेने पहुंचे। स्कूलों में भी कोविड सुरक्षा के उपाय किए गए थे।
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कोरोना वायरस संक्रमण के नए मरीजों का मिलना लगातार जारी है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं हैं।
- कमल मल्होत्रा, सीपरी बाजार
पूरे कोरोना काल में बच्चों की घर में भी निगरानी करनी पड़ी। लेकिन, बाहर जाकर बच्चे मनमानी कर सकते हैं, जो खतरनाक है।
- कमलेश झा, भैरो खिड़की
कोरोना के नए मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में अभी बच्चों को स्कूल नहीं बुलाना चाहिए। थोड़ा इंतजार करना चाहिए।
- रिंकी श्रीवास्तव, मेहंदी बाग
बताया जा रहा है कि फरवरी में कोरोना की दवा आ जाएगी। ऐसे में दवा आने के बाद ही स्कूल खोने चाहिए। अभी रिस्क नहीं लेना चाहिए।
- पुष्पा सिंघानिया, सिविल लाइन
---- छात्राएं बोलीं ----
ऑनलाइन पढ़ाई में परेशानी बहुत होती थी। हम चाह रहे थे कि स्कूल खुल जाएं। इसमें परेशानी नहीं है।
- भारती, नंदनपुरा
घर में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता है। स्कूल में पढ़ाई बेहतर होती है। स्कूल खोलने का निर्णय ठीक है।
- अंजली, लहरगिर्द
हम पूरे सुरक्षा उपायों के साथ विद्यालय आए हैं। ऐसे में विद्यालय आने में किसी को कोई खतरा नहीं है।
- शैली, गुसाईंपुरा
काफी दिनों बाद स्कूल आकर अच्छा लग रहा है। अपनी और अपने साथियों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखेंगे।
- दिव्या गुप्ता, शहर