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झांसी के चार नर्सिंगहोमों में लगेंगे ऑक्सीजन प्लांट
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झांसी। कोरोना काल में ऑक्सीजन की किल्लत के चलते अब नर्सिंगहोमों में प्लांट लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए चार नर्सिंगहोमों ने आवेदन भी कर दिया है। इन अस्पतालों में हवा से ऑक्सीजन गैस बनेगी।
कोरोना की दूसरी लहर से देशभर में ऑक्सीजन का अकाल पड़ गया है। झांसी में भी ऑक्सीजन का जबरदस्त टोटा होने से त्राहि-त्राहि मच गई। हालांकि, सरकार के तेज प्रयासों से अब हालात नियंत्रित होते दिख रहे हैं। ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता के लिए देशभर में कई बड़े प्लांट तो लगाए ही जा रहे हैं, वहीं नर्सिंगहोमों में भी ऑक्सीजन प्लांट शुरू किए जा रहे हैं। इसके लिए झांसी के चार नर्सिंगहोम भी आगे आए हैं। इन नर्सिंगहोमों में ऑक्सीजन सेपरेटर लगाए जाएंगे। ये सेपरेटर हवा से ऑक्सीजन बनाएंगे। एक टैंक में वातावरण से हवा को संरक्षित किया जाएगा। चूंकि, वातावरण में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों गैस होती हैं, फिर इनमें से ऑक्सीजन को अलग किया जाएगा। फिर इसी ऑक्सीजन का उपयोग अस्पताल में भर्ती मरीज कर सकेंगे।
रोज 100 सिलिंडर गैस बन सकेगी
ऑक्सीजन सेपरेटर से रोज 100 सिलिंडर तक ऑक्सीजन गैस बन सकेगी। मौजूदा समय में झांसी में किसी अस्पताल को 50, किसी को 100 तो 150 सिलिंडर तक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में कई अस्पतालों को तो ऑक्सीजन बाहर से नहीं लेनी पड़ेगी तो कइयों की काफी जरूरत तो प्लांट से ही पूरी हो जाएगी।
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पांच वेंटिलेटर, 30 बेड के आईसीयू के लिए पर्याप्त
नर्सिंगहोमों में ऑक्सीजन प्लांट लग जाने के बाद पांच वेंटिलेटर और 30 बेड का आईसीयू आराम से चल सकेगा। मौजूदा समय में झांसी में निजी अस्पतालों में आईसीयू बेड और वेंटिलेटर का यही मानक है। ऐसे में प्लांट काफी कारगर साबित होंगे।
तीन-चार नर्सिंगहोमों ने अपने यहां ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है। 10 से 15 दिनों के अंदर कुछ नर्सिंगहोमों में प्लांट शुरू होने की भी संभावना है। - सुधीर श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग।
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कोरोना की दूसरी लहर से देशभर में ऑक्सीजन का अकाल पड़ गया है। झांसी में भी ऑक्सीजन का जबरदस्त टोटा होने से त्राहि-त्राहि मच गई। हालांकि, सरकार के तेज प्रयासों से अब हालात नियंत्रित होते दिख रहे हैं। ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता के लिए देशभर में कई बड़े प्लांट तो लगाए ही जा रहे हैं, वहीं नर्सिंगहोमों में भी ऑक्सीजन प्लांट शुरू किए जा रहे हैं। इसके लिए झांसी के चार नर्सिंगहोम भी आगे आए हैं। इन नर्सिंगहोमों में ऑक्सीजन सेपरेटर लगाए जाएंगे। ये सेपरेटर हवा से ऑक्सीजन बनाएंगे। एक टैंक में वातावरण से हवा को संरक्षित किया जाएगा। चूंकि, वातावरण में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों गैस होती हैं, फिर इनमें से ऑक्सीजन को अलग किया जाएगा। फिर इसी ऑक्सीजन का उपयोग अस्पताल में भर्ती मरीज कर सकेंगे।
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रोज 100 सिलिंडर गैस बन सकेगी
ऑक्सीजन सेपरेटर से रोज 100 सिलिंडर तक ऑक्सीजन गैस बन सकेगी। मौजूदा समय में झांसी में किसी अस्पताल को 50, किसी को 100 तो 150 सिलिंडर तक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में कई अस्पतालों को तो ऑक्सीजन बाहर से नहीं लेनी पड़ेगी तो कइयों की काफी जरूरत तो प्लांट से ही पूरी हो जाएगी।
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पांच वेंटिलेटर, 30 बेड के आईसीयू के लिए पर्याप्त
नर्सिंगहोमों में ऑक्सीजन प्लांट लग जाने के बाद पांच वेंटिलेटर और 30 बेड का आईसीयू आराम से चल सकेगा। मौजूदा समय में झांसी में निजी अस्पतालों में आईसीयू बेड और वेंटिलेटर का यही मानक है। ऐसे में प्लांट काफी कारगर साबित होंगे।
तीन-चार नर्सिंगहोमों ने अपने यहां ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया है। 10 से 15 दिनों के अंदर कुछ नर्सिंगहोमों में प्लांट शुरू होने की भी संभावना है। - सुधीर श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग।