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Jhansi News: प्रदेश के पूर्व गृह राज्यमंत्री रणजीत सिंह जूदेव का निधन
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झांसी। जिले की गरौठा विधानसभा से छह बार विधायक और एक बार विधान परिषद के सदस्य रहे प्रदेश के पूर्व गृह राज्यमंत्री रणजीत सिंह जूदेव का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें समथर के राजा के रूप में पहचाना जाता था। बृहस्पतिवार को उनका पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
समथर रियासत के अंतिम शासक राधाचरण सिंह जूदेव के पुत्र रणजीत सिंह जूदेव 50 सालों तक सक्रिय राजनीति में रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के पद से की थी। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने गरौठा से सन 1974, 1977 व 1980 में चुनाव जीता। इस दौरान उन्हें प्रदेश सरकार में गृह राज्यमंत्री बनाया गया था। उनके पास नगर विकास, पीडब्ल्यूडी और वन विभाग भी रहा। हालांकि, वे 1985 का चुनाव हार गए थे। लेकिन, इसके बाद उन्होंने फिर से वापसी की और 1989, 1991 व 1993 में हुए चुनावों में जीत हासिल की। साल 2003 में कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद भेजा था। 2012 में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। कांग्रेस पार्टी में भी वे कई बड़े पदों पर रहे। वर्तमान में कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य थे। इंदिरा गांधी और उनके बाद राजीव गांधी के भी वे करीबियों में थे। ओलंपिक तैराकी संघ के भी वे अध्यक्ष रहे थे।
बता दें कि कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भइया) दिवंगत जूदेव के भांजे हैं। जबकि, उनकी बेटी निहारिका राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की बहू हैं। जूदेव के दामाद दुष्यंत प्रताप सिंह सांसद हैं। जूदेव ने मंत्री रहते हुए एरच घाट पर पुल का निर्माण कराया था। इसके अलावा क्षेत्र के लोगों की इलाज में भी वह बहुत मदद करते थे।
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किले में रखा गया पार्थिव शरीर, अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग
झांसी। बृहस्पतिवार को पूर्व मंत्री जूदेव का पार्थिव शरीर समथर किले के प्रांगण में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने यहां लोगों की भारी भीड़ पहुंची। राज परिवार परंपरा के अनुसार वृंदावन बाग में उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनके पुत्र समरजीत सिंह जूदेव ने मुखाग्नि दी। इससे पहले उन्हें 11 तोपों की सलामी दी गयी। पुलिस बैंड भी बजाया गया व गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जबकि, कलाकारों ने कीर्तन कर उन्हें विदाई दी।
इस मौके पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री भानुप्रताप वर्मा, विधायक रघुराज प्रताप सिंह, नेपाल के समशेर सिंह राणा, सांसद दुष्यंत सिंह, विनायक राजे, पूर्व मंत्री जय प्रताप सिंह, अक्षय प्रताप सिंह, गोपालजी, मप्र के पूर्व मंत्री ध्यानेन्द्र सिंह, रविंद्र सिंह जूदेव, पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत, पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, दतिया नरेश घनश्याम सिंह, एमएलसी बाबूलाल तिवारी, विधायक जवाहरलाल राजपूत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी, पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह लहार, विधायक विनोद चतुर्वेदी, सिदार्थ दिवोलिया, पूर्व मंत्री विहारीलाल आर्य, रामजी परिहार, कपिल मुदगिल, पूर्व एमएलसी श्यामसुंदर सिंह, पूर्व विधायक निवाडी मीरा यादव, मून यादव, संत सिंह सेरसा समेत डीआईजी जोगिन्दर सिंह, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार, एसएसपी राजेश एस, एसडीएम मोंठ जितेंद्र सिंह वीरवाल, सीओ मोंठ स्नेहा तिवारी ने समथर किला पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। दोपहर दो बजे किले से निकली अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। शोक में समथर नगर का बाजार बंद रहा। अंतिम संस्कार के दौरान लोग महाराज समथर अमर रहे के नारे लगाते रहे। अंतिम संस्कार के दौरान भारी संख्या में पुलिस तैनात रही।
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समथर रियासत के अंतिम शासक राधाचरण सिंह जूदेव के पुत्र रणजीत सिंह जूदेव 50 सालों तक सक्रिय राजनीति में रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के पद से की थी। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने गरौठा से सन 1974, 1977 व 1980 में चुनाव जीता। इस दौरान उन्हें प्रदेश सरकार में गृह राज्यमंत्री बनाया गया था। उनके पास नगर विकास, पीडब्ल्यूडी और वन विभाग भी रहा। हालांकि, वे 1985 का चुनाव हार गए थे। लेकिन, इसके बाद उन्होंने फिर से वापसी की और 1989, 1991 व 1993 में हुए चुनावों में जीत हासिल की। साल 2003 में कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद भेजा था। 2012 में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। कांग्रेस पार्टी में भी वे कई बड़े पदों पर रहे। वर्तमान में कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य थे। इंदिरा गांधी और उनके बाद राजीव गांधी के भी वे करीबियों में थे। ओलंपिक तैराकी संघ के भी वे अध्यक्ष रहे थे।
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बता दें कि कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भइया) दिवंगत जूदेव के भांजे हैं। जबकि, उनकी बेटी निहारिका राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की बहू हैं। जूदेव के दामाद दुष्यंत प्रताप सिंह सांसद हैं। जूदेव ने मंत्री रहते हुए एरच घाट पर पुल का निर्माण कराया था। इसके अलावा क्षेत्र के लोगों की इलाज में भी वह बहुत मदद करते थे।
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किले में रखा गया पार्थिव शरीर, अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग
झांसी। बृहस्पतिवार को पूर्व मंत्री जूदेव का पार्थिव शरीर समथर किले के प्रांगण में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने यहां लोगों की भारी भीड़ पहुंची। राज परिवार परंपरा के अनुसार वृंदावन बाग में उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनके पुत्र समरजीत सिंह जूदेव ने मुखाग्नि दी। इससे पहले उन्हें 11 तोपों की सलामी दी गयी। पुलिस बैंड भी बजाया गया व गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जबकि, कलाकारों ने कीर्तन कर उन्हें विदाई दी।
इस मौके पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री भानुप्रताप वर्मा, विधायक रघुराज प्रताप सिंह, नेपाल के समशेर सिंह राणा, सांसद दुष्यंत सिंह, विनायक राजे, पूर्व मंत्री जय प्रताप सिंह, अक्षय प्रताप सिंह, गोपालजी, मप्र के पूर्व मंत्री ध्यानेन्द्र सिंह, रविंद्र सिंह जूदेव, पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत, पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, दतिया नरेश घनश्याम सिंह, एमएलसी बाबूलाल तिवारी, विधायक जवाहरलाल राजपूत, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी, पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह लहार, विधायक विनोद चतुर्वेदी, सिदार्थ दिवोलिया, पूर्व मंत्री विहारीलाल आर्य, रामजी परिहार, कपिल मुदगिल, पूर्व एमएलसी श्यामसुंदर सिंह, पूर्व विधायक निवाडी मीरा यादव, मून यादव, संत सिंह सेरसा समेत डीआईजी जोगिन्दर सिंह, जिलाधिकारी रविंद्र कुमार, एसएसपी राजेश एस, एसडीएम मोंठ जितेंद्र सिंह वीरवाल, सीओ मोंठ स्नेहा तिवारी ने समथर किला पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। दोपहर दो बजे किले से निकली अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। शोक में समथर नगर का बाजार बंद रहा। अंतिम संस्कार के दौरान लोग महाराज समथर अमर रहे के नारे लगाते रहे। अंतिम संस्कार के दौरान भारी संख्या में पुलिस तैनात रही।