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गौरैया के लिए आशियाना बनाएगा वन विभाग
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झांसी। रोजाना घरों की छतों पर चहचहाने वाली गौरैया की संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। इन्हें बचाने के लिए वन विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। विभाग 20 मार्च को वर्ड स्पेरो डे पर लोगों को जागरूक करते हुए घरों के लिए घोंसले देगा।
घर, आंगन और मुंडेरों पर बैठकर चीं-चीं कर शोर करने वाली गौरैया पूरी तरह से गायब होती जा रही है। इसके लिए लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मोबाइल टावरों से पैदा होने वाली रेडिएशन ने गौरैया को गायब कर दिया है। वहीं, कुछ लोगों के अनुसार जैविक खेती का चलन खत्म होने के कारण यह प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। हालांकि, वन विभाग इन सब दलीलों को खारिज करते हुए पर्यावरण प्रदूषण को दोषी मानता है। विभाग चिड़ियों को बचाने के लिए हर साल 20 मार्च को वर्ड स्पेरो डे मनाता है। इस दिन लोगों को जागरूक किया जाता है। जिसके तहत विभाग द्वारा लकड़ी के घोंसले दिए जाते हैं। इसको लेकर विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
इस संबंध में जिला वनाधिकारी वीके मिश्रा ने बताया कि गौरैया चिड़ियों का वजूद बचाने के लिए विभाग द्वारा 20 मार्च को वर्ड स्पेरो डे मनाया जाता है। इस दिन लोगों को जागरूक कर लकड़ी के घोंसले दिए जाते हैं। जिसके लिए विभाग द्वारा तैयारियों में जुटा हुआ है।
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घर, आंगन और मुंडेरों पर बैठकर चीं-चीं कर शोर करने वाली गौरैया पूरी तरह से गायब होती जा रही है। इसके लिए लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मोबाइल टावरों से पैदा होने वाली रेडिएशन ने गौरैया को गायब कर दिया है। वहीं, कुछ लोगों के अनुसार जैविक खेती का चलन खत्म होने के कारण यह प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है। हालांकि, वन विभाग इन सब दलीलों को खारिज करते हुए पर्यावरण प्रदूषण को दोषी मानता है। विभाग चिड़ियों को बचाने के लिए हर साल 20 मार्च को वर्ड स्पेरो डे मनाता है। इस दिन लोगों को जागरूक किया जाता है। जिसके तहत विभाग द्वारा लकड़ी के घोंसले दिए जाते हैं। इसको लेकर विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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इस संबंध में जिला वनाधिकारी वीके मिश्रा ने बताया कि गौरैया चिड़ियों का वजूद बचाने के लिए विभाग द्वारा 20 मार्च को वर्ड स्पेरो डे मनाया जाता है। इस दिन लोगों को जागरूक कर लकड़ी के घोंसले दिए जाते हैं। जिसके लिए विभाग द्वारा तैयारियों में जुटा हुआ है।
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