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पिछले साल के पौधों की सुध नहीं, नए की तैयारियों में जुटा वन विभाग
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झांसी। पिछले साल मंडल के झांसी, ललितपुर व जालौन में वन विभाग व अन्य विभागों द्वारा डेढ़ करोड़ से अधिक पौधों को लगाया गया था। लेकिन अब यह पौधे तलाशे से भी नहीं मिल रहे हैं। विभाग द्वारा इस वर्ष लगभग पौने दो करोड़ पौधों को रोपने की तैयारी है।
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के लिए वन विभाग द्वारा हर साल पौधरोपण किया जाता है। इसके लिए विभाग द्वारा मंडल की सभी नर्सरी में पौधों को तैयार किया जाता है। जिस पर सरकार का करोड़ों रुपये खर्च होता है। नर्सरियों में पौधों को तैयार कर वन विभाग द्वार अन्य विभागों को पौधे दिए जाते हैं। शासन का आदेश आते ही मंडल में एक ही दिन में करोड़ों पौधों को लगाया जाता है। लेकिन देखरेख नहीं होने के कारण अधिकांश पौधे सूख कर खत्म हो जाते हैं। जिंदा पौधों का कोई भी लेखा-जोखा अथवा शासन स्तर पर रिपोर्टिंग नहीं होेने के कारण कार्रवाई भी आसान नहीं होती है। विभाग द्वारा इस वर्ष भी मंडल की 83 नर्सरियों में लगभग पौने दो करोड़ पौधों को तैयार किया जा रहा है। जिसमें नीम, महुआ, बांस, चिलबिल, आंवला, सागौन सहित कई पौधों को तैयार किया जा रहा है।
इस संबंध में वन संरक्षक बीआर अहिरवार ने बताया कि पौधों का सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। विभाग द्वारा मूल्यांकन और सत्यापन भी कराया जाता है। इस वर्ष भी सत्यापन की प्रक्रिया को अमल में लाया जाएगा।
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पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के लिए वन विभाग द्वारा हर साल पौधरोपण किया जाता है। इसके लिए विभाग द्वारा मंडल की सभी नर्सरी में पौधों को तैयार किया जाता है। जिस पर सरकार का करोड़ों रुपये खर्च होता है। नर्सरियों में पौधों को तैयार कर वन विभाग द्वार अन्य विभागों को पौधे दिए जाते हैं। शासन का आदेश आते ही मंडल में एक ही दिन में करोड़ों पौधों को लगाया जाता है। लेकिन देखरेख नहीं होने के कारण अधिकांश पौधे सूख कर खत्म हो जाते हैं। जिंदा पौधों का कोई भी लेखा-जोखा अथवा शासन स्तर पर रिपोर्टिंग नहीं होेने के कारण कार्रवाई भी आसान नहीं होती है। विभाग द्वारा इस वर्ष भी मंडल की 83 नर्सरियों में लगभग पौने दो करोड़ पौधों को तैयार किया जा रहा है। जिसमें नीम, महुआ, बांस, चिलबिल, आंवला, सागौन सहित कई पौधों को तैयार किया जा रहा है।
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इस संबंध में वन संरक्षक बीआर अहिरवार ने बताया कि पौधों का सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। विभाग द्वारा मूल्यांकन और सत्यापन भी कराया जाता है। इस वर्ष भी सत्यापन की प्रक्रिया को अमल में लाया जाएगा।
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