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शादी में खड़े होकर खिलाया जा रहा था खाना, काजी का निकाह पढ़ाने से इनकार
Mon, 05 Apr 2021 03:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 05 Apr 2021 03:25 AM IST
सार
- शहर के कई काजियों के घरों पर दी दस्तक, कोई नहीं हुआ तैयार
- देर रात एक काजी को तैयार कर निकाह की हुई रस्म
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शनिवार को महानगर के फिल्टर मार्ग स्थित एक विवाह घर में चल रहे शादी समारोह के दौरान खड़े होकर खाना खिलाए जाने से नाराज काजी ने निकाह पढ़ाने से इंकार कर दिया। घरातियों ने कई काजियों के दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन कोई भी निकाह पढ़ाने के लिए तैयार नहीं हुआ। देर रात एक काजी को तैयार कर निकाह की रस्म को पूरा किया गया।
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पठौरिया स्थित ईदगाह में शिया, बरेलवी और देवबंदी सहित सभी मसलक के उलेमाओं की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में निर्णय लिया गया था कि जिस शादी में दहेज की नुमाइश, खड़े होकर खाना और डीजे अथवा बैंड-बाजा बजेगा उस शादी में शहर का कोई भी काजी निकाह नही पढ़ाएगा। जिस पर सभी ने सहमति जताई थी। शनिवार को शहर के एक शादी घर में शादी का आयोजन किया जा रहा था। निकाह पढ़ाने के लिए मुफ्ती साबिर कासमी को बुलाया गया था।
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मुफ्ती साबिर कासमी ने शरीयत के तरीके से हो रही शादी में निकाह पढ़ाने की हिदायत दी थी। लेकिन जब वह निकाह पढ़ाने के लिए पहुंचे तो शादी में खडे़ होकर खाना खिलाया जा रहा था। यह देखकर उन्होंने निकाह पढ़ाने से मना कर दिया। काफी मनाने के बाद भी उन्होंने निकाह नही पढ़ाया और विवाह घर से चले गए। इसके बाद घरातियों ने कई काजियों से निकाह पढ़ाने की गुहार लगाई लेकिन कोई भी तैयार नहीं हुआ। देर रात एक काजी को तैयार कर निकाह पढ़ाया गया।
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फिल्टर स्थित एक विवाह घर में निकाह पढ़ाने के लिए बुलाया गया था। दोपहर में ही नुमाइंदे को भेजकर शरीयत के तरीके से शादी करने की इत्तेला दी गई थी। जब निकाह पढ़ाने पहुंचे तो खड़े होकर खाना खाया जा रहा था। इसलिए बिना निकाह पढ़ाए ही वापस लौट आए।
- मुफ्ती साबिर कासमी