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मिलावटी तेल से बने चिप्स खराब कर सकते पेट, फूड प्वॉइजनिंग का खतरा

Sat, 20 Mar 2021 01:25 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Mar 2021 01:25 AM IST
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Food poisining for milawati things
झांसी। होली के पर्व पर खोआ की गुजिया के साथ-साथ चिप्स, पापड़ और पकवान खूब खाए जाते है। ऐसे में तेल की खपत भी बढ़ जाती है। त्योहार के मद्देनजर अभी से मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में मिलावटी तेल खाने से लोगों को एसिडिटी, आंतों का संक्रमण, लिवर डैमेज, फूड प्वॉइजनिंग तक का खतरा हो सकता है। ऐसे में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
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तेल कारोबारी बाहर से टैंकर में सस्ता पॉम ऑयल, राइस ब्रान (चावल की भूसी का तेल) व मलेशिया से आयात होने वाला वेस्टेज खाने का तेल मंगाते हैं। मिलों के अंदर सुगंध रहित इस तेल को पीला रंग देने के लिए इसमें केमिकल मिलाया जाता है। इसके बाद सरसों तेल जैसी सुगंध लाने के लिए 10 से 20 फीसदी सरसों तेल मिला दिया जाता है। फिर इस मिलावटी तेल को 5, 10, 15 लीटर के जार एवं एक लीटर की बोतल में पैक कर देते हैं। पैकिंग के बाद बाजार में नामी ब्रांडेड तेल कंपनियों का स्टीकर लगाकर इसे बाजार में उतार दिया जाता है।
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इसको लेकर फिजीशियन डॉ. अनु निगम ने बताया कि मिलावटी सरसों के तेल के सेवन से शरीर के सभी अंगों पर प्रभाव पड़ता है। इससे फूड प्वॉइजनिंग, आंतों का संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। मिलावटी तेल लंबे समय तक इसका प्रयोग करने से लिवर डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास रुक जाता है। वर्तमान में जिले में पेट संबंधी बीमारी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। मिलावटी तेल से बनी सामग्री खाने से पेट में एसिडिटी बनना एक बड़ा कारण है।
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मिलावट की पहचान बहुत आसान
सरसों तेल की बोतल को फ्रिज में रखें। यदि तेल जमने लगे या उसमें सफेद दाग बनने लगे तो तेल सौ फीसदी मिलावटी है। तेल से बने व्यंजन खाने से यदि एसिडिटी ज्यादा होती है तो इसमें रसायन की मिलावट है। सरसों के तेल से बहुत तेज गंध या झांक आती है। इससे पता चलता है कि तेल असली है। तेल की एक-दो बूंद हथेलियों पर रगड़ें, तेल आपके हाथ पर रंग छोड़ दें तो समझ लीजिए कि उसमें मिलावट है। अगर रंग न छूटे केवल चिकनाई रहे तो समझ लें कि तेल शुद्ध है। रगड़ने पर भी तेल से कच्ची घानी यानी सरसों की तेज गंध आएगी।
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