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पहली बार घरों में पहुंचा पानी, खिले चेहरे
Sat, 15 Jun 2019 03:20 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 15 Jun 2019 03:20 AM IST
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झांसी। कोछाभांवर को बराठा बेसिन पेयजल पाइप लाइन योजना से जोड़ दिया गया है। यहां पर 12 स्टैंड पोस्ट (सरकारी नल) लगा दिए गए हैं, जिनसे अभी पानी दिया जा रहा है। शुक्रवार को जलनिगम ने शुभारंभ कार्यक्रम किया। इसमें यहां के 128 लोगों को कनेक्शन भी दिए गए। घरों में पानी पहुंचने से लोगों को चेहरे भी खुशी से खिल गए।
झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत सबसे पहले कोछाभांवर, मेडिकल कॉलेज एवं गुमनावारा क्षेत्र में बराठा योजना को चालू कर नलकूपों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति दी जानी है, जिसमें बराठा योजना को चालू कर कोछाभांवर क्षेत्र में स्टैंड पोस्ट के माध्यम से आपूर्ति चालू कर दी गई है।
शुक्रवार को निर्माणाधीन पानी की टंकी के नजदीक शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अतिथि विधायक रवि शर्मा व महापौर रामतीर्थ सिंघल ने क्षेत्र के लोगों से कहा कि अब उनको दूर-दूर तक पीने के पानी के लिए नहीं भटकना होगा। घर बैठे पानी मिलने यहां की एक बड़ी समस्या खत्म हो गई है। पानी को बर्बाद न होने दें। अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जिन गलियों में अभी पाइप लाइन नहीं डली है, वहां इस महीने के आखिर तक काम पूरा हो जाएगा। इस योजना के चालू होने से कोछाभांवर की करीब दस हजार आबादी को लाभ मिलेगा। इस मौके पर मुख्य अभियंता राजेश कुमार, अधीक्षण अभियंता आरके अग्रवाल, अधिशासी अभियंता कौशल किशोर, प्रियांशु पटैरिया आदि मौजूद रहे।
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हैंडपंप से डिब्बों में पानी भरने के बाद उनको घर तक लाना पड़ता था। हर दिन की समस्या थी लेकिन अब ऐसा नहीं करना होगा।
महेंद्र कुमार।
मेरा परिवार एक किलोमीटर दूर खेत पर स्थित कुएं से पानी लाता था। पाइप लाइन डलने से हम लोगों को एक बड़ी राहत मिल गई है।
रुपेंद्र यादव।
गर्मियों में तो हैंडपंप तक सूख जाते हैं। एक- एक दिन काटना मुश्किल होता है। पाइप लाइन डलने से अब गर्मियों में पानी की किल्लत नहीं होगी।
महीपत सिंह।
यहां रहने वाले प्रभावशाली लोगों की गलियों में ही पाइप लाइन डाली गई है। हम लोग जहां रहते हैं वहां अभी पाइप लाइन नहीं डली है। इससे वह चिंतित हैं।
सपना।
साल 2048 तक नहीं रहेगी पानी की समस्या
महानगर के विस्तारित क्षेत्रों व शामिल किए 15 गांवों में पाइप लाइन से पानी पहुंचाने के लिए अमृत कार्यक्रम के अंतर्गत 20 फरवरी 2016 को झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना प्रथम चरण की 219.51 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई थी। दूसरे चरण की 600.43 करोड़ की योजना 30 अक्तूबर 2018 को स्वीकृत हुई थी। योजना के हिसाब से माताटीला बांध से 195 एमएलडी (19 करोड़ 500 लीटर पानी) अतिरिक्त पानी लेकर बबीना में जल शोधन संयंत्र का निर्माण कर (यहां पानी का जलशोधन करने के बाद) महानगर को पानी उपलब्ध कराना है। यह पानी साल 2048 तक 1173450 आबादी (प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर के हिसाब) के लिए पर्याप्त होगा। झांसी नगर निगम क्षेत्र के 60 वार्डों को 29 जोन में विभक्त कर 20 नग भूमिगत जलाशयों तथा 22 नग उच्च जलाशयों का निर्माण कार्य होना है। 532 किलोमीटर वितरण पाइप लाइन डाली जाएगी। लोगों को कनेक्शन देकर वाटर मीटर भी लगाए जाएंगे।
वर्ष 1999 में तैयार की गई थी बराठा योजना
महानगर के मेडिकल कॉलेज से जुड़े क्षेत्रों की पेयजल समस्या को हल करने के लिए वर्ष 1999 में बराठा बेसिन पेयजल योजना शुरू की गई थी। योजना के अंतर्गत पाइप लाइन डल ही पाई थी कि फोरलेन निर्माण के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने अप्रैल 2008 में इसे पूरा कराने की बात कही। इसके तहत सात किलोमीटर पाइप लाइन बदलने का काम अगस्त 2009 में पूरा होना था, लेकिन जल निगम को कार्य पूरा कराने में दो साल से अधिक का समय लग गया। इसके लिए एनएचएआई ने जल निगम को समय से दो करोड़ अड़सठ लाख रुपये उपलब्ध करा दिए थे। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने मई 2011 में टेस्टिंग की। योजना शुरू हो पाती कि कानपुर रोड पर ट्यूबवेल स्थल से बड़ागांव तक पड़ी पुरानी साढ़े तीन किलोमीटर पाइप लाइन में लीकेज हो गए। इसके बाद योजना को चालू करने का कोई कदम नहीं उठाया गया।
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झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत सबसे पहले कोछाभांवर, मेडिकल कॉलेज एवं गुमनावारा क्षेत्र में बराठा योजना को चालू कर नलकूपों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति दी जानी है, जिसमें बराठा योजना को चालू कर कोछाभांवर क्षेत्र में स्टैंड पोस्ट के माध्यम से आपूर्ति चालू कर दी गई है।
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शुक्रवार को निर्माणाधीन पानी की टंकी के नजदीक शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अतिथि विधायक रवि शर्मा व महापौर रामतीर्थ सिंघल ने क्षेत्र के लोगों से कहा कि अब उनको दूर-दूर तक पीने के पानी के लिए नहीं भटकना होगा। घर बैठे पानी मिलने यहां की एक बड़ी समस्या खत्म हो गई है। पानी को बर्बाद न होने दें। अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जिन गलियों में अभी पाइप लाइन नहीं डली है, वहां इस महीने के आखिर तक काम पूरा हो जाएगा। इस योजना के चालू होने से कोछाभांवर की करीब दस हजार आबादी को लाभ मिलेगा। इस मौके पर मुख्य अभियंता राजेश कुमार, अधीक्षण अभियंता आरके अग्रवाल, अधिशासी अभियंता कौशल किशोर, प्रियांशु पटैरिया आदि मौजूद रहे।
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हैंडपंप से डिब्बों में पानी भरने के बाद उनको घर तक लाना पड़ता था। हर दिन की समस्या थी लेकिन अब ऐसा नहीं करना होगा।
महेंद्र कुमार।
मेरा परिवार एक किलोमीटर दूर खेत पर स्थित कुएं से पानी लाता था। पाइप लाइन डलने से हम लोगों को एक बड़ी राहत मिल गई है।
रुपेंद्र यादव।
गर्मियों में तो हैंडपंप तक सूख जाते हैं। एक- एक दिन काटना मुश्किल होता है। पाइप लाइन डलने से अब गर्मियों में पानी की किल्लत नहीं होगी।
महीपत सिंह।
यहां रहने वाले प्रभावशाली लोगों की गलियों में ही पाइप लाइन डाली गई है। हम लोग जहां रहते हैं वहां अभी पाइप लाइन नहीं डली है। इससे वह चिंतित हैं।
सपना।
साल 2048 तक नहीं रहेगी पानी की समस्या
महानगर के विस्तारित क्षेत्रों व शामिल किए 15 गांवों में पाइप लाइन से पानी पहुंचाने के लिए अमृत कार्यक्रम के अंतर्गत 20 फरवरी 2016 को झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना प्रथम चरण की 219.51 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई थी। दूसरे चरण की 600.43 करोड़ की योजना 30 अक्तूबर 2018 को स्वीकृत हुई थी। योजना के हिसाब से माताटीला बांध से 195 एमएलडी (19 करोड़ 500 लीटर पानी) अतिरिक्त पानी लेकर बबीना में जल शोधन संयंत्र का निर्माण कर (यहां पानी का जलशोधन करने के बाद) महानगर को पानी उपलब्ध कराना है। यह पानी साल 2048 तक 1173450 आबादी (प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर के हिसाब) के लिए पर्याप्त होगा। झांसी नगर निगम क्षेत्र के 60 वार्डों को 29 जोन में विभक्त कर 20 नग भूमिगत जलाशयों तथा 22 नग उच्च जलाशयों का निर्माण कार्य होना है। 532 किलोमीटर वितरण पाइप लाइन डाली जाएगी। लोगों को कनेक्शन देकर वाटर मीटर भी लगाए जाएंगे।
वर्ष 1999 में तैयार की गई थी बराठा योजना
महानगर के मेडिकल कॉलेज से जुड़े क्षेत्रों की पेयजल समस्या को हल करने के लिए वर्ष 1999 में बराठा बेसिन पेयजल योजना शुरू की गई थी। योजना के अंतर्गत पाइप लाइन डल ही पाई थी कि फोरलेन निर्माण के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन ने अप्रैल 2008 में इसे पूरा कराने की बात कही। इसके तहत सात किलोमीटर पाइप लाइन बदलने का काम अगस्त 2009 में पूरा होना था, लेकिन जल निगम को कार्य पूरा कराने में दो साल से अधिक का समय लग गया। इसके लिए एनएचएआई ने जल निगम को समय से दो करोड़ अड़सठ लाख रुपये उपलब्ध करा दिए थे। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने मई 2011 में टेस्टिंग की। योजना शुरू हो पाती कि कानपुर रोड पर ट्यूबवेल स्थल से बड़ागांव तक पड़ी पुरानी साढ़े तीन किलोमीटर पाइप लाइन में लीकेज हो गए। इसके बाद योजना को चालू करने का कोई कदम नहीं उठाया गया।