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चेक बाउंस होने पर सजा व जुर्माना भी
Thu, 20 Dec 2018 12:51 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Thu, 20 Dec 2018 12:51 AM IST
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- फोटो : demo
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चेक बाउंस होने के दो मामलों में आरोप सिद्ध होने पर न्यायालय पीठासीन अधिकारी अतिरिक्त न्यायालय दिलीप सिंह ने दो लोगों को सजा व जुर्माना लगाया है।
रूद्रांश इंटरप्राइजेज के प्रो. नरेश कुमार श्रीवास्तव पुत्री रामजीवन लाल श्रीवास्तव ने न्यायालय में परिवार दायर कर बताया था कि अभियुक्त ने परिवादी से उधार रुपये की अदायगी के लिए चार लाख रुपये की चेक दी थी। यह चेक अभियुक्त के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गई थी। इस मुकदमे की सुनवाई दौरान न्यायालय ने अभियुक्त हरप्रसाद को 138 एनआई एक्ट के अपराध मेें दोषी मानते हुए एक वर्ष छह माह की सजा और पांच लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने चेक की धनराशि के बराबर चार लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति वादी को प्रदान किए जाने का भी आदेश पारित किया।
वहीं, लक्ष्मी इंटरप्राइजेज बबीना के प्रो.चंद्रशेखर ने भी न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया था कि अभियुक्त को रुपये अदायगी के लिए तीन लाख रुपये का चेक दिया था। यह चेक अभियुक्त के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया था। अदालत ने अभियुक्त हरप्रसाद को एक वर्ष छह माह की सजा और चार लाख का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने चेक की धनराशि के बराबर तीन लाख रुपये बतौर क्षतिपूूर्ति वादी को प्रदान किए जाने का आदेश दिया है।
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रूद्रांश इंटरप्राइजेज के प्रो. नरेश कुमार श्रीवास्तव पुत्री रामजीवन लाल श्रीवास्तव ने न्यायालय में परिवार दायर कर बताया था कि अभियुक्त ने परिवादी से उधार रुपये की अदायगी के लिए चार लाख रुपये की चेक दी थी। यह चेक अभियुक्त के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गई थी। इस मुकदमे की सुनवाई दौरान न्यायालय ने अभियुक्त हरप्रसाद को 138 एनआई एक्ट के अपराध मेें दोषी मानते हुए एक वर्ष छह माह की सजा और पांच लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने चेक की धनराशि के बराबर चार लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति वादी को प्रदान किए जाने का भी आदेश पारित किया।
वहीं, लक्ष्मी इंटरप्राइजेज बबीना के प्रो.चंद्रशेखर ने भी न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया था कि अभियुक्त को रुपये अदायगी के लिए तीन लाख रुपये का चेक दिया था। यह चेक अभियुक्त के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण बाउंस हो गया था। अदालत ने अभियुक्त हरप्रसाद को एक वर्ष छह माह की सजा और चार लाख का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह का कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने चेक की धनराशि के बराबर तीन लाख रुपये बतौर क्षतिपूूर्ति वादी को प्रदान किए जाने का आदेश दिया है।
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