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Fighters Of Jhansi: 1857 के आंदोलन से स्वतंत्रता तक खूब लड़े झांसी के सेनानी, नहीं टूटा वीरों का हौसला

Sat, 06 Aug 2022 12:57 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sat, 06 Aug 2022 12:57 AM IST
सार

देश की आजादी में झांसी की बड़ी भूमिका रही है। स्वराज्य की खातिर 1857 में रानी लक्ष्मीबाई की अगुवाई में क्रांति का सूत्रपात झांसी से हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक इस युद्ध में रानी के साथ उनकी सेना के अलावा पूरी जनता ने साथ दिया था।

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Fighters of Jhansi fought a lot from the movement of 1857 till independence
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंग्रेजों के खिलाफ 1857 में बजे बिगुल के बाद नौ दशकों तक चली स्वतंत्रता की लड़ाई में झांसी के सेनानी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ मजबूती से डटे रहे। इसमें कइयों ने अपने जान की कुर्बानी दे दी तो कइयों को गिरफ्तार करके जेल में बंद कर दिया गया। मगर रानी की धरती के वीरों का हौसला कभी नहीं टूटा।
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देश की आजादी में झांसी की बड़ी भूमिका रही है। स्वराज्य की खातिर 1857 में रानी लक्ष्मीबाई की अगुवाई में क्रांति का सूत्रपात झांसी से हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक इस युद्ध में रानी के साथ उनकी सेना के अलावा पूरी जनता ने साथ दिया था। न जाति, न धर्म का भेद था। यहां तक की महिलाओं ने भी इस युद्ध में बड़ी भूमिका अदा की थी। रानी की महिला सैनिकों की टुकड़ी ने अंग्रेजी फौज के छक्के छुड़ा दिए थे। बाद में आगे की पीढ़ी के क्रांतिकारियों ने रानी की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया। चाहें महात्मा गांधी का अहिंसा आंदोलन हो या फिर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का कोई आंदोलन, सभी को झांसी वासियों ने भरपूर समर्थन दिया।
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इन आंदोलनों में भी की सहभागिता
मेरठ षड्यंत्र केस: मार्च 1929 में कई साम्यवादी नेताओं को गिरफ्तार कर उन पर केस चलाए गए, जिन्हें मेरठ षड्यंत्र के नाम से जाना जाता है। इसमें झांसी के अयोध्या प्रसाद और लक्ष्मण राव कदम को भी गिरफ्तार कर लिया गया। महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार से समझौता करने के लिए दो मार्च 1930 को लार्ड इरविन को पत्र लिखा। संतोषजनक जवाब न आने पर महात्मा गांधी ने सत्याग्रह का सहारा लिया।
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नमक सत्याग्रह: छह अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी ने समुद्र तट पर नमक बनाकर नमक सत्याग्रह शुरू किया। झांसी में नमक सत्याग्रह 12 अप्रैल को शुरू हुआ। इसे सफल बनाने के लिए झांसी में रघुनाथ विनायक धुलेकर के नेतृत्व में तीन जत्थे बनाए गए, जिनकी कमान सीताराम भास्कर भागवत, कुंज बिहारी लाल शिवानी और लक्ष्मण राव कदम को सौंपी गई। सभी जत्थे अलग-अलग मार्गों से गुजरते हुए गांव-गांव में आजादी की अलख जलाते हुए औपारा पहुंचे। यहां हजारों लोगों की मौजूदगी में नमक बनाकर ब्रिटिश हुकूमत के नमक कानून को भंग किया गया।

-अंग्रेजों भारत छोड़ो: महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ 1942 में छेड़े गए अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में झांसी में कई जगह विरोध-प्रदर्शन और जुलूस निकाले गए। सरकारी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई, रेल की पटरियां उखाड़ी गईं और डाकखानों में आग लगा दी गई। ब्रिटिश पुलिस ने आत्माराम गोविंद खेर, कुंज बिहारी लाल शिवानी, लक्ष्मण राव कदम, रामेश्वर प्रसाद शर्मा, कृष्ण गोपाल शर्मा, मुरलीधर अग्रवाल समेत कई क्रांतिकारियों ने गिरफ्तारी दी।


1857 की क्रांति के बाद भी मेरठ षड्यंत्र केस, नमक सत्याग्रह, अंग्रेजों भारत छोड़ो समेत कई आंदोलनों में झांसी वासियों ने अहम भूमिका निभाई। कइयों को जेल भी जाना पड़ा मगर लोगों के मन में आजादी की दीवानगी कम नहीं हुई। - मुकुंद मेहरोत्रा, वरिष्ठ साहित्यकार।
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