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पचास हजार पशुओं की सुधारी जाएगी नस्ल
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झांसी। बुंदेलखंड की गायों और भैंसों की नस्ल सुधारने का अभियान चल रहा है। इसके अंतर्गत एक अगस्त से जनपद में पचास हजार भैंसों और गायों का कृत्रिम गर्भाधान करके उनकी नस्ल में सुधार किया जाएगा। नई नस्ल तैयार होने के बाद दूध के उत्पादन में बढ़ोतरी हो जाएगी।
बुंदेलखंड की नस्ल की जो गायें और भैंसें हैं, वह अधिक दूध नहीं देती हैं। गायों में एक से डेढ़ लीटर और भैंसों में एक से दो लीटर दूध ही निकलता है। इस कारण लोग गायों का दूध निकालने के बाद छुट्टा छोड़ देते हैं। दूध का उत्पादन बढ़ाने व गायों को छुट्टा छोड़ने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अंतर्गत अच्छी नस्ल के बीज से जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है।
इसके अंतर्गत भैंस में मुर्रा प्रजाति का बीज और गायों में थारपरकर, साहीवाल या हरियाणिवी प्रजाति के बीज से कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। यह अभियान एक अगस्त से शुरू होगा और अगले साल 31 मई तक चलेगा। इसके अंतर्गत जिले की पचास हजार गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कर उनकी नस्ल में सुधार किया जाएगा।
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अब तक तीन सौ गांवों में हो चुका सुधार
योजना के अंतर्गत पिछले दो साल से जिले में अभियान चल रहा है। पहले वर्ष में सौ गांवों की 12 हजार गायों और भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया। दूसरे साल में दो सौ गांवों के 23 हजार जानवरों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया। अब तीसरे साल पचास हजार जानवरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान एक अगस्त से शुरू होगा। यह अभियान साल भर तक चलाया जाएगा। इससे गायों और भैंसों की नस्ल में सुधार होगा, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा। - डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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बुंदेलखंड की नस्ल की जो गायें और भैंसें हैं, वह अधिक दूध नहीं देती हैं। गायों में एक से डेढ़ लीटर और भैंसों में एक से दो लीटर दूध ही निकलता है। इस कारण लोग गायों का दूध निकालने के बाद छुट्टा छोड़ देते हैं। दूध का उत्पादन बढ़ाने व गायों को छुट्टा छोड़ने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अंतर्गत अच्छी नस्ल के बीज से जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है।
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इसके अंतर्गत भैंस में मुर्रा प्रजाति का बीज और गायों में थारपरकर, साहीवाल या हरियाणिवी प्रजाति के बीज से कृत्रिम गर्भाधान कराया जाएगा। यह अभियान एक अगस्त से शुरू होगा और अगले साल 31 मई तक चलेगा। इसके अंतर्गत जिले की पचास हजार गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कर उनकी नस्ल में सुधार किया जाएगा।
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अब तक तीन सौ गांवों में हो चुका सुधार
योजना के अंतर्गत पिछले दो साल से जिले में अभियान चल रहा है। पहले वर्ष में सौ गांवों की 12 हजार गायों और भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया। दूसरे साल में दो सौ गांवों के 23 हजार जानवरों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया। अब तीसरे साल पचास हजार जानवरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान एक अगस्त से शुरू होगा। यह अभियान साल भर तक चलाया जाएगा। इससे गायों और भैंसों की नस्ल में सुधार होगा, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा। - डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी