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बुंदेलखंड में बढ़ी खाद की निगरानी, एमपी को यूरिया ले जाने वाले रास्ते बंद
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झांसी। मध्यप्रदेश में बढ़ी खाद की किल्लत से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यूरिया का हल्ला मचने लगा है। दरअसल इन जिलों से खाद एमपी जा रहा है। खाद के कारोबारी बुंदेलखंड से यूरिया खरीदकर महंगे दामों पर वहां के किसानों के बेच रहे हैं। जब बुंदेलखंड में खाद की कमी नजर आई तो शासन ने तत्काल पड़ोस के राज्यों को जाने वाले खाद को रोकने का फरमान जारी कर दिया। बाहर जाने वाले यूरिया को रोक दिया गया है। कई जगह पर बैरियर लगाकर चेकिंग की जा रही है।
उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में गेहूं के लिए यूरिया की मांग तेजी के साथ बढ़ गई है। मध्यप्रदेश में तो पिछले करीब बीस दिनों से जबरदस्त हल्ला मच रहा है। वहां खाद के गोदामों पर सुबह से ही किसानों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। खाद कानून व्यवस्था का सवाल बन चुका है। ऐसे में खाद की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। क्योंकि बुंदेलखंड के कई जिलों मध्यप्रदेश से लगे हुए हैं लिहाजा वहां के कारोबारी झांसी, ललितपुर, महोबा और चित्रकूट से बड़ी मात्रा में खाद खरीदकर एमपी के किसानों को महंगे में बेच रहे हैं। यूरिया का 45 किलो का बोरा 266.50 रुपये का है लेकिन उसे तीन सौ 350 तक में बेचा जा रहा है। इससे बुंदेलखंड में खाद का टोटा होने लगा। शासन तक भी मामला पहुंचा। शासन ने एक आदेश जारी करके तत्काल खाद के बुंदेलखंड के बाहर जाने पर रोक लगा दी है। मध्यप्रदेश को जाने वाले रास्तों पर पुलिस लगा दी गई है। बैरियर लगाकर चेकिंग की जा रही है। यूरिया भरी कई ट्रैक्टर-ट्राली को रोक दिया गया। हालांकि मध्यप्रदेश के जो किसान साइकिल पर एक-दो बोरा लेकर जा रहे थे उन्हें नहीं रोका जा रहा है। कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि खाद को किसी भी स्थिति में बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। किसानों को मांग के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी कृषि अधिकारियों को भी निर्देशित कर दिया गया है।
खाद की 1200 दुकानों की निगहबानी बढ़ी
झांसी। खाद की 1200 दुकानों की निगहबानी बढ़ा दी गई है। हर सप्ताह का स्टाक चेक किया जा रहा है। 303 दुकानें तो केवल झांसी में ही हैं जबकि 200 के करीब ललितपुर में हैं। महोबा और चित्रकूट जिले की खाद की दुकान और सहकारी समितियों पर जो खाद है उसका भी ब्यौरा नियमित लिया जा रहा है।
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मध्यप्रदेश के इन जिलों को जा रहा खाद
निवाड़ी, टीकमगढ़, दतिया और छतरपुर, शिवपुरी और सतना
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उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में गेहूं के लिए यूरिया की मांग तेजी के साथ बढ़ गई है। मध्यप्रदेश में तो पिछले करीब बीस दिनों से जबरदस्त हल्ला मच रहा है। वहां खाद के गोदामों पर सुबह से ही किसानों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। खाद कानून व्यवस्था का सवाल बन चुका है। ऐसे में खाद की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। क्योंकि बुंदेलखंड के कई जिलों मध्यप्रदेश से लगे हुए हैं लिहाजा वहां के कारोबारी झांसी, ललितपुर, महोबा और चित्रकूट से बड़ी मात्रा में खाद खरीदकर एमपी के किसानों को महंगे में बेच रहे हैं। यूरिया का 45 किलो का बोरा 266.50 रुपये का है लेकिन उसे तीन सौ 350 तक में बेचा जा रहा है। इससे बुंदेलखंड में खाद का टोटा होने लगा। शासन तक भी मामला पहुंचा। शासन ने एक आदेश जारी करके तत्काल खाद के बुंदेलखंड के बाहर जाने पर रोक लगा दी है। मध्यप्रदेश को जाने वाले रास्तों पर पुलिस लगा दी गई है। बैरियर लगाकर चेकिंग की जा रही है। यूरिया भरी कई ट्रैक्टर-ट्राली को रोक दिया गया। हालांकि मध्यप्रदेश के जो किसान साइकिल पर एक-दो बोरा लेकर जा रहे थे उन्हें नहीं रोका जा रहा है। कमिश्नर सुभाष चंद्र शर्मा ने बताया कि खाद को किसी भी स्थिति में बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। किसानों को मांग के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी कृषि अधिकारियों को भी निर्देशित कर दिया गया है।
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खाद की 1200 दुकानों की निगहबानी बढ़ी
झांसी। खाद की 1200 दुकानों की निगहबानी बढ़ा दी गई है। हर सप्ताह का स्टाक चेक किया जा रहा है। 303 दुकानें तो केवल झांसी में ही हैं जबकि 200 के करीब ललितपुर में हैं। महोबा और चित्रकूट जिले की खाद की दुकान और सहकारी समितियों पर जो खाद है उसका भी ब्यौरा नियमित लिया जा रहा है।
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निवाड़ी, टीकमगढ़, दतिया और छतरपुर, शिवपुरी और सतना