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लोक लाज के भय से नहीं की थी छेड़खानी करने वाले लड़के की शिकायत

Sun, 08 Nov 2020 12:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Nov 2020 12:15 AM IST
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Fear to society not complane accussed boy
झांसी। महिलाओं पर होने वाले अपराधों की घटनाओं में आमतौर पर महिलाएं और उनके परिवार के लोग लोक लाज के चलते चुप्पी साध जाते हैं। यही चुप्पी भारी पड़ जाती है और आगे चलकर बड़ी घटना का सबब बन जाती है। एरच में छेड़खानी से तंग आकर नाबालिग द्वारा की गई आत्महत्या के पीछे भी यही परिस्थितियां सामने आई हैं। अगर शुरुआत में ही लड़के की शिकायत पुलिस से कर दी जाती, तो शायद नाबालिग लड़की को आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाना पड़ता।
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एरच थाना इलाके में जहर खाकर जान देने वाली नाबालिग बेटी को एक लड़का पिछले काफी समय से तंग कर रहा था। एक नवंबर को लड़के ने लड़की के घर में घुसकर उसके साथ छेड़खानी की थी। इसकी लड़की के परिजनों को भी जानकारी हो गई थी। लेकिन, किसी ने पुलिस से शिकायत नहीं की। उन्हें डर था कि इससे लड़की की बदनामी होगी। इससे लड़के के हौसले बुलंद हो गए और उसने कोचिंग जाते समय लड़की के साथ सरे राह छेड़खानी की। जानकारों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही लड़के की शिकायत पुलिस से कर दी जाती, तो शायद लड़की की जान नहीं जाती। अपने पर होने वाले छोटे-छोटे अपराधों को नजरअंदाज करना या चुप्पी साध जाना, बड़ी घटना को जन्म देता है।
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महिलाओं, बेटियों को अपने साथ होने वाले अपराधों पर चुप्पी नहीं साधनी चाहिए। बल्कि, उन्हें छोटी-छोटी घटनाओं पर भी खुलकर बोलना चाहिए। परिजनों को इसकी जानकारी देना चाहिए, पुलिस को भी बताना चाहिए। नजरअंदाज करने से छोटी घटनाएं भी बड़ा रूप ले सकती हैं।
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- डा. कंचन जायसवाल, सदस्य - राज्य महिला आयोग
महिलाओं पर होने वाले अपराधों को रोकने के लिए सरकार ने कड़े कानून बना रखे हैं। उनका पालन भी सख्ती से कराया जाना चाहिए। इसके अलावा महिलाओं पर होने वाले अपराधों के पीछे किसी न किसी पुरुष की भूमिका पाई जाती है। ऐसे में परिवार में बेटियों के साथ-साथ बेटों को भी संस्कार दिए जाने चाहिए।
- वंदना पाठक, पूर्व अध्यक्ष - जिला पंचायत
महिलाओं पर होने वाले अपराधों के प्रति सरकार का रवैया सख्त है। ऐसे में महिलाओं को घटना को छुपाना या दबाना नहीं चाहिए, बल्कि अपने परिजनों और पुलिस को बताना चाहिए। महिलाओं की चुप्पी से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। महिलाओं को कानून का सहारा लेना चाहिए।
- मीरा राय, पूर्व अध्यक्ष - जिला पंचायत
महिला अपराधों के प्रति पुलिस को संवेदनशील रवैया अपना चाहिए। अफसरों को हर छोटी-बड़ी घटना पर खुद नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा पीड़िता के साथ परिवार और समाज को खड़ा होना चाहिए। पुलिस और सरकार से शिकायत कर अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाना चाहिए।

- किरण वर्मा, पूर्व महापौर
महिला सुरक्षा के मामले में प्रदेश सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है। पूरे प्रदेश में भय का माहौल व्याप्त है। हर बेटी और महिला अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही है। सरकार को इसके नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जाना चाहिए।
- सुषमा यादव, पूर्व सदस्य - राज्य महिला आयोग
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