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जानलेवा हमले में पिता-पुत्र को दस साल का कारावास

Tue, 31 May 2022 12:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 May 2022 12:51 AM IST
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Father-son jailed for ten years in deadly attack
झांसी। जानलेवा हमले में दोषसिद्व होने पर अपर सत्र न्यायाधीश विमल प्रकाश आर्य की अदालत ने पिता-पुत्र को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। सहायक शासकीय अधिवक्ता देवेश श्रीवास्तव के मुताबिक 16 जून 2016 को एरच थाने में राशन बांटने के लिए कोटेदार मुहर सिंह अपनेे पुत्र मणि शेखर के साथ जा रहे थे। तभी रास्ते में खड़ैनी के सरकारी अस्पताल के पास रामरतन कुशवाहा पुत्र कडोरे एवं गिरीश पुत्र रामरतन ने ट्रैक्टर रोक कर कुल्हाड़ी एवं तमंचे से उनके ऊपर हमला कर दिया। तमंचा कोटेदार के लड़के मणि शेखर ने गिरीश से छीन लिया। इस कट्टे से भाई एवं भतीजे को सिर में गंभीर चोट आ गई। एरच थाने में रामरतन एवं गिरीश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया । विवेचना के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्ज शीट दाखिल कर दी। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर कोर्ट ने रामरतन एवं गिरीश कुमार को धारा 307 के तहत दोषी पाया। इस पर दस साल की सजा समेत 25 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। इसे अदा न करने पर एक साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगताना होगा। इसके अलावा न्यायालय ने अलग-अलग धाराओं में भी सजा सुनाई। उक्त जुर्माने में दस-दस हजार रुपये घायलों को देने का भी आदेश दिया है।
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विवेचक की लापरवाही पर कोर्ट गंभीर
इस मामले में विवेचक एसएसआई राजेश सिंह को लापरवाह ठहराते हुए न्यायालय ने उनके खिलाफ डीजीपी एवं एसएसपी को पत्र भेजा है। कोर्ट ने विवेचक की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी लापरवाही और शिथिलता से महत्वपूर्ण साक्ष्य संकलित नहीं हो सके।
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