{"_id":"68ffd704741e54ac7e003ff1","slug":"farmers-worried-due-to-continuous-rain-clouds-of-crisis-on-crops-jhansi-news-c-318-1-gur1002-103192-2025-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: लगातार बारिश से किसान चिंतित, फसलों पर संकट के बादल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: लगातार बारिश से किसान चिंतित, फसलों पर संकट के बादल
विज्ञापन
गुरसराय। क्षेत्र में सुबह से हो रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। किसान संतोष देवपुरिया भड़ोकर ने कहा कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो नई बोआई भी प्रभावित हो सकती है, जिससे आर्थिक संकट और गहराएगा। खेतों में पानी भरने से फसल सड़ने का भी खतरा मंडरा रहा है।
जनजीवन अस्त-व्यस्त
रानीपुर। देर रात से रुक-रुककर पानी बरसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। तीन-चार दिनों से आसमान में बादल छाए हुए हैं। सोमवार को पूरे दिन पानी रुक-रुककर बरस रहा था। बाजार में सन्नाटा सा रहा, दुकानदार खाली बैठे दिखाई दिए।
पूंछ में बारिश से नुकसान
पूंछ। सोमवार को तड़के सुबह से लगातार हो रही बारिश की वजह से किसानों के खेतों में खड़ी एवं कटी पड़ी धान की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। खेतों में बोई गई मटर, चना, मसूर का बीज खराब होने की कगार पर है। ग्राम सेसा निवासी कैलाश साहू, प्रदीप वर्मा, श्याम बिहारी, रमेश कुमार आदि ने बताया कि बारिश की वजह से किसानों को काफी नुकसान हो गया है।
विज्ञापन
किसानों की धान की फसल चौपट
समथर। नगर एवं क्षेत्र में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इस समय क्षेत्र में धान की कटाई का कार्य चल रहा है, अधिकतर किसानों की फसल पककर खेतों में खड़ी थी। अचानक आई तेज हवाओं के साथ बारिश से पककर खड़ी धान की फसल खेतों में बिछ गई और मिट्टी से लथपथ हो गई। वहीं, पहले से कटी हुई फसल भीगकर खेतों में बिखर गई, जिससे धान का दाना खराब हो गया है। जिन किसानों ने हारवेस्टिंग कराकर अपने घरों या दरवाजों पर धान का ढेर जमा कर लिया था, वह भी बारिश से भीग गई।
मूंगफली की फसल खराब होने का डर
लुहारी। लुहारी सहित आसपास के गांव सकरार, जावन, भिटोरा, सिलगुवां, लुहरगांव भट्ट में बारिश से खेतों में पड़ी मूंगफली एवं अन्य खरीफ की फसलें जलमग्न हो गईं हैं। जिससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी।
किसानों की बढ़ी चिंता
भंडरा/ खिलारा। बेमौसम बारिश से नन्ही फसलों को नुकसान हो गया है। किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र की पठा, भंडरा, भदरवारा, चुरारा, घाटलहचूरा, अक्सेव, रुपाधमना, रेवन, स्यावरी सहित अन्य न्याय पंचायतों से जुड़े सभी राजस्व ग्रामों के खेतों में मटर, मसूर, चना, राही, सरसों जैसी बोई गई फसलों के खराब होने की आशंका जताई जा रही है। ग्राम खिलारा के किसान घनश्यामदास राजपूत, चिंतामन अहिरवार, चंद्रप्रकाश मिश्रा, बब्लू तिवारी ने बताया कि भारी नुकसान की संभावना है।
फायदा कम नुकसान ज्यादा
टोड़ीफतेहपुर। इस बार अक्टूबर माह में हो रही असामान्य बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों ने बताया कि इस बारिश से केवल उन्हीं किसानों को थोड़ी राहत मिली है जिनके खेत समय से जुताई न होने के कारण खराब पड़े थे। ऐसे किसान खेतों की सिंचाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, गेहूं की बुवाई (बोहनी) अब विलंब से हो पाएगी क्योंकि खेतों में पहले से ही पर्याप्त नमी थी और अब अधिक पानी के कारण बुवाई का समय आगे खिसक गया है।
वहीं दूसरी ओर जिन्होंने हाल ही में दलहन की बोआई की थी, उनके लिए यह बारिश नुकसानदेह साबित हो रही है। किसानों ने बताया कि दलहन की फसलों में पानी भर जाने से बीज सड़ने (बिजगुड़ी पड़ने) की आशंका बढ़ गई है। किसान ठाकुरदास दांगी, जवाहरलाल पाठक, सुंदरलाल, भरतलाल पाठक, धीरेंद्र लोधी तथा ग्राम ढुरवई सुजवा क्षेत्र के किसान राजकुमार सेन, नन्नूलाल पाल, बालकिशुन आदि ने बताया कि अक्टूबर माह में इस तरह की बारिश पहली बार देखी जा रही है, जो किसानों के लिए हितकारी न होकर बड़ी कष्टदायी सिद्ध हो रही है।
बारिश से कई किसान खुश तो कई मायूस दिखे
गरौठा। आज सुबह से हुई बूंदाबादी से कई किसानों के चेहरे मायूस हैं, वहीं, कई किसानों को बारिश का लाभ मिला है। नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से हुई बारिश से मूंगफली की फसल खराब होने से किसान चिंतित हैं। जिन किसानों नें खेतों में मटर, चना, मसूर, लाही की फसल की बाेआई कर दी है। उन फसलों को बूंदाबादी जीवनदायनी साबित हो रही है। जिन किसानों के खेतों में अभी तक पलेवा नहीं हुआ है। उन किसानों का पलेवा का खर्चा बचने से किसान खुश हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
धान सहित कई फसलों पर संकट के बादल
- किसानों के सामने आएगा आर्थिक संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
27MOT_M_5_27102025_1
मोंठ। कस्बा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार सुबह से लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में हुई इस अनियमित वर्षा ने जहां मौसम में ठंडक घोल दी है, वहीं, खेतों में खड़ी धान, तिल, ज्वार, बाजरा और उड़द जैसी फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कटाई के लिए तैयार फसलें पानी में डूब रही हैं और नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
सुबह से रुक-रुककर झमाझम बारिश होने से खेतों में पानी भर गया है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि धान की फसल पूरी तरह पक चुकी थी, लेकिन लगातार वर्षा से खेत दलदल में बदल गए हैं। फसलें गिरने लगी हैं और कटे हुए धान के ढेर भीग जाने से दानों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसान अब अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए भगवान भरोसे हैं।
कई किसानों ने पिछले सप्ताह से ही फसल की कटाई शुरू कर दी थी, मगर अचानक हुई बारिश ने काम रुकवा दिया। कुछ जगहों पर खेतों में कटे धान के गट्ठे पड़े हैं, जिन्हें बारिश से बचाने के लिए किसान तिरपाल से ढकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार होती बारिश ने सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया है। प्रगतिशील किसान धीरेंद्र सन्यापत ने बताया कि इस अनियमित और बे-मौसम हुई बारिश से क्षेत्र की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। धान, तिल, ज्वार, बाजरा तथा उर्द की फसल में 90 प्रतिशत से अधिक नुकसान हो गया है। उन्होंने बताया कि मटर की बोआई अभी चल रही थी, जिसमें नुकसान तो हुआ है, लेकिन उतना नहीं जितना खरीफ फसलों को हुआ है। बारिश थमने के बाद भी खेतों के सूखने और बुवाई योग्य बनने में समय लगेगा, जिससे अगली फसल की तैयारी पर भी असर पड़ेगा।
मंडी परिसर में भीगी फसलें, व्यापारियों में हड़कंप
गल्ला मंडी मोंठ तथा उपमंडी समथर में भी बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। मंडी परिसर में किसानों और व्यापारियों द्वारा लाई गई धान की बोरियां और ढेर खुले में पड़े हैं। लगातार वर्षा से बचाने के लिए किसान और व्यापारी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर तिरपाल लगाकर उन्हें ढकने में जुटे हैं। व्यापारियों द्वारा खरीदी गई धान की खेप भीग जाने से नुकसान का खतरा बढ़ गया है। कई जगहों पर मंडी परिसर में जलभराव हो गया है, जिससे आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं।
बारिश के कारण दिन भर परेशान रहे लेाग
27chi_1_27102025_167
चिरगांव। सोमवार की सुबह से लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इस पानी से सबसे अधिक नुकसान धान की फसल को हुआ है। मंडी में धान बेचने आए किसान दिनभर अपनी धान को पानी से बचाने में जूझते रहे। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान मंडी में अपने ट्रैक्टर लेकर आ गए थे। जिससे उनकी मंगलवार को डाक जल्दी हो सके। लेकिन रात से बारिश होने के कारण उन्हें परेशान होना पड़ा।
विज्ञापन
जनजीवन अस्त-व्यस्त
रानीपुर। देर रात से रुक-रुककर पानी बरसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। तीन-चार दिनों से आसमान में बादल छाए हुए हैं। सोमवार को पूरे दिन पानी रुक-रुककर बरस रहा था। बाजार में सन्नाटा सा रहा, दुकानदार खाली बैठे दिखाई दिए।
विज्ञापन
पूंछ में बारिश से नुकसान
पूंछ। सोमवार को तड़के सुबह से लगातार हो रही बारिश की वजह से किसानों के खेतों में खड़ी एवं कटी पड़ी धान की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। खेतों में बोई गई मटर, चना, मसूर का बीज खराब होने की कगार पर है। ग्राम सेसा निवासी कैलाश साहू, प्रदीप वर्मा, श्याम बिहारी, रमेश कुमार आदि ने बताया कि बारिश की वजह से किसानों को काफी नुकसान हो गया है।
विज्ञापन
किसानों की धान की फसल चौपट
समथर। नगर एवं क्षेत्र में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इस समय क्षेत्र में धान की कटाई का कार्य चल रहा है, अधिकतर किसानों की फसल पककर खेतों में खड़ी थी। अचानक आई तेज हवाओं के साथ बारिश से पककर खड़ी धान की फसल खेतों में बिछ गई और मिट्टी से लथपथ हो गई। वहीं, पहले से कटी हुई फसल भीगकर खेतों में बिखर गई, जिससे धान का दाना खराब हो गया है। जिन किसानों ने हारवेस्टिंग कराकर अपने घरों या दरवाजों पर धान का ढेर जमा कर लिया था, वह भी बारिश से भीग गई।
मूंगफली की फसल खराब होने का डर
लुहारी। लुहारी सहित आसपास के गांव सकरार, जावन, भिटोरा, सिलगुवां, लुहरगांव भट्ट में बारिश से खेतों में पड़ी मूंगफली एवं अन्य खरीफ की फसलें जलमग्न हो गईं हैं। जिससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी।
किसानों की बढ़ी चिंता
भंडरा/ खिलारा। बेमौसम बारिश से नन्ही फसलों को नुकसान हो गया है। किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र की पठा, भंडरा, भदरवारा, चुरारा, घाटलहचूरा, अक्सेव, रुपाधमना, रेवन, स्यावरी सहित अन्य न्याय पंचायतों से जुड़े सभी राजस्व ग्रामों के खेतों में मटर, मसूर, चना, राही, सरसों जैसी बोई गई फसलों के खराब होने की आशंका जताई जा रही है। ग्राम खिलारा के किसान घनश्यामदास राजपूत, चिंतामन अहिरवार, चंद्रप्रकाश मिश्रा, बब्लू तिवारी ने बताया कि भारी नुकसान की संभावना है।
फायदा कम नुकसान ज्यादा
टोड़ीफतेहपुर। इस बार अक्टूबर माह में हो रही असामान्य बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों ने बताया कि इस बारिश से केवल उन्हीं किसानों को थोड़ी राहत मिली है जिनके खेत समय से जुताई न होने के कारण खराब पड़े थे। ऐसे किसान खेतों की सिंचाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, गेहूं की बुवाई (बोहनी) अब विलंब से हो पाएगी क्योंकि खेतों में पहले से ही पर्याप्त नमी थी और अब अधिक पानी के कारण बुवाई का समय आगे खिसक गया है।
वहीं दूसरी ओर जिन्होंने हाल ही में दलहन की बोआई की थी, उनके लिए यह बारिश नुकसानदेह साबित हो रही है। किसानों ने बताया कि दलहन की फसलों में पानी भर जाने से बीज सड़ने (बिजगुड़ी पड़ने) की आशंका बढ़ गई है। किसान ठाकुरदास दांगी, जवाहरलाल पाठक, सुंदरलाल, भरतलाल पाठक, धीरेंद्र लोधी तथा ग्राम ढुरवई सुजवा क्षेत्र के किसान राजकुमार सेन, नन्नूलाल पाल, बालकिशुन आदि ने बताया कि अक्टूबर माह में इस तरह की बारिश पहली बार देखी जा रही है, जो किसानों के लिए हितकारी न होकर बड़ी कष्टदायी सिद्ध हो रही है।
बारिश से कई किसान खुश तो कई मायूस दिखे
गरौठा। आज सुबह से हुई बूंदाबादी से कई किसानों के चेहरे मायूस हैं, वहीं, कई किसानों को बारिश का लाभ मिला है। नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से हुई बारिश से मूंगफली की फसल खराब होने से किसान चिंतित हैं। जिन किसानों नें खेतों में मटर, चना, मसूर, लाही की फसल की बाेआई कर दी है। उन फसलों को बूंदाबादी जीवनदायनी साबित हो रही है। जिन किसानों के खेतों में अभी तक पलेवा नहीं हुआ है। उन किसानों का पलेवा का खर्चा बचने से किसान खुश हैं।
धान सहित कई फसलों पर संकट के बादल
- किसानों के सामने आएगा आर्थिक संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
27MOT_M_5_27102025_1
मोंठ। कस्बा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सोमवार सुबह से लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में हुई इस अनियमित वर्षा ने जहां मौसम में ठंडक घोल दी है, वहीं, खेतों में खड़ी धान, तिल, ज्वार, बाजरा और उड़द जैसी फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कटाई के लिए तैयार फसलें पानी में डूब रही हैं और नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
सुबह से रुक-रुककर झमाझम बारिश होने से खेतों में पानी भर गया है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि धान की फसल पूरी तरह पक चुकी थी, लेकिन लगातार वर्षा से खेत दलदल में बदल गए हैं। फसलें गिरने लगी हैं और कटे हुए धान के ढेर भीग जाने से दानों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसान अब अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए भगवान भरोसे हैं।
कई किसानों ने पिछले सप्ताह से ही फसल की कटाई शुरू कर दी थी, मगर अचानक हुई बारिश ने काम रुकवा दिया। कुछ जगहों पर खेतों में कटे धान के गट्ठे पड़े हैं, जिन्हें बारिश से बचाने के लिए किसान तिरपाल से ढकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार होती बारिश ने सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया है। प्रगतिशील किसान धीरेंद्र सन्यापत ने बताया कि इस अनियमित और बे-मौसम हुई बारिश से क्षेत्र की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। धान, तिल, ज्वार, बाजरा तथा उर्द की फसल में 90 प्रतिशत से अधिक नुकसान हो गया है। उन्होंने बताया कि मटर की बोआई अभी चल रही थी, जिसमें नुकसान तो हुआ है, लेकिन उतना नहीं जितना खरीफ फसलों को हुआ है। बारिश थमने के बाद भी खेतों के सूखने और बुवाई योग्य बनने में समय लगेगा, जिससे अगली फसल की तैयारी पर भी असर पड़ेगा।
मंडी परिसर में भीगी फसलें, व्यापारियों में हड़कंप
गल्ला मंडी मोंठ तथा उपमंडी समथर में भी बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। मंडी परिसर में किसानों और व्यापारियों द्वारा लाई गई धान की बोरियां और ढेर खुले में पड़े हैं। लगातार वर्षा से बचाने के लिए किसान और व्यापारी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर तिरपाल लगाकर उन्हें ढकने में जुटे हैं। व्यापारियों द्वारा खरीदी गई धान की खेप भीग जाने से नुकसान का खतरा बढ़ गया है। कई जगहों पर मंडी परिसर में जलभराव हो गया है, जिससे आवागमन में दिक्कतें आ रही हैं।
बारिश के कारण दिन भर परेशान रहे लेाग
27chi_1_27102025_167
चिरगांव। सोमवार की सुबह से लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इस पानी से सबसे अधिक नुकसान धान की फसल को हुआ है। मंडी में धान बेचने आए किसान दिनभर अपनी धान को पानी से बचाने में जूझते रहे। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान मंडी में अपने ट्रैक्टर लेकर आ गए थे। जिससे उनकी मंगलवार को डाक जल्दी हो सके। लेकिन रात से बारिश होने के कारण उन्हें परेशान होना पड़ा।