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डीएपी पर सब्सिडी बढ़ने से झांसी मंडल के किसानों के बचेंगे तीस करोड़
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झांसी। खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने के साथ ही डीएपी (डाई आमोनियम फास्फेट) एवं यूरिया की मांग शुरू हो गई है। सरकार ने खरीफ सीजन के लिए डीएपी की सब्सिडी तीस फीसदी से बढ़ाकर पचास फीसदी कर दिया है। इससे झांसी मंडल में किसानों के करीब तीस करोड़ रुपये की बचत होगी। हालांकि यूरिया समेत अन्य खाद के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
पिछले एक वर्ष के दौरान डीजल के दाम में लगातार इजाफा होता गया, इससे किसानों की लागत भी बढ़ गई है। कोरोनाकाल में रसायनिक उत्पादों महंगे हुए लेकिन सरकार ने इसमें सब्सिडी बढ़ाकर किसानों का बोझ कुछ कम करने की कोशिश की है। सबसे अधिक फायदा डीएपी पर सब्सिडी बढ़ाने से किसानों को होगा। अभी तक सिर्फ तीस फीसदी सब्सिडी ही मिलती थी। उधर, रसायनों के दाम बढ़ने से डीएपी के दाम बढ़कर 2400 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गए। सरकार ने राहत देते हुए सब्सिडी बढ़ाकर पचास फीसदी कर दी। इससे अब खरीफ सीजन में यह किसानों को 2400 रुपये के बजाए 1200 रुपये (50 किलो प्रति बोरी) में मिलेगी। पूरे मंडल में किसानों को करीब तीस करोड़ रुपये की बचत हो सकेगी। हालांकि मानसून में देरी होने से खरीफ की बुवाई भी काफी पिछड़ चुकी है। कई इलाकों में मूंगफली, तिल, उड़द की बुवाई की गई है। लेकिन अगर बारिश नहीं हुई तब इसको नुकसान पहुंच सकता है। सिंचाई के साथ ही डीएपी एवं यूरिया का भी छिड़काव भी तभी शुरू होगा। उपनिदेशक कृषि केके सिंह के मुताबिक इस संबंध में पहले ही आदेश जारी हो चुका। खरीफ सीजन की डिमांड के मुताबिक डीएपी मंगवाई गई है।
खरीफ सीजन में इतनी खाद की जरूरत
यूरिया : 16000 एमटी
डीएपी : 11000 एमटी
एनपीके : 5000 एमटी
एमओपी : 3000 एमटी
एसएसपी : 6500 एमटी
कुल: 41500 एमटी
सबसे अधिक मूंग की बुवाई
बारिश की लेटलतीफी के बावजूद किसानों ने उम्मीद में ही धान को छोड़कर अन्य फसलों की बुवाई पहले ही पूरी कर ली है। कृषि विभाग के मुताबिक अभी तक मक्का 7.52 प्रतिशत, ज्वार 4.96 प्रतिशत, बाजरा 20.83 प्रतिशत, उड़द 20.34 प्रतिशत, मूंग 43.88 प्रतिशत, अरहर 31.39 प्रतिशत, मूंगफली 40.99 प्रतिशत, सोयाबीन 22.76 प्रतिशत एवं तिल की 23.77 प्रतिशत रकबे में बुवाई हो चुकी। झांसी में इस बार कुल 243316 हेक्टेयर में फसल रकबा का आकलन किया गया है। जबकि उत्पादकता 9.01 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आंकी गई है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि बारिश न होने पर इसको नुकसान पहुंच सकता है।
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पिछले एक वर्ष के दौरान डीजल के दाम में लगातार इजाफा होता गया, इससे किसानों की लागत भी बढ़ गई है। कोरोनाकाल में रसायनिक उत्पादों महंगे हुए लेकिन सरकार ने इसमें सब्सिडी बढ़ाकर किसानों का बोझ कुछ कम करने की कोशिश की है। सबसे अधिक फायदा डीएपी पर सब्सिडी बढ़ाने से किसानों को होगा। अभी तक सिर्फ तीस फीसदी सब्सिडी ही मिलती थी। उधर, रसायनों के दाम बढ़ने से डीएपी के दाम बढ़कर 2400 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गए। सरकार ने राहत देते हुए सब्सिडी बढ़ाकर पचास फीसदी कर दी। इससे अब खरीफ सीजन में यह किसानों को 2400 रुपये के बजाए 1200 रुपये (50 किलो प्रति बोरी) में मिलेगी। पूरे मंडल में किसानों को करीब तीस करोड़ रुपये की बचत हो सकेगी। हालांकि मानसून में देरी होने से खरीफ की बुवाई भी काफी पिछड़ चुकी है। कई इलाकों में मूंगफली, तिल, उड़द की बुवाई की गई है। लेकिन अगर बारिश नहीं हुई तब इसको नुकसान पहुंच सकता है। सिंचाई के साथ ही डीएपी एवं यूरिया का भी छिड़काव भी तभी शुरू होगा। उपनिदेशक कृषि केके सिंह के मुताबिक इस संबंध में पहले ही आदेश जारी हो चुका। खरीफ सीजन की डिमांड के मुताबिक डीएपी मंगवाई गई है।
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खरीफ सीजन में इतनी खाद की जरूरत
यूरिया : 16000 एमटी
डीएपी : 11000 एमटी
एनपीके : 5000 एमटी
एमओपी : 3000 एमटी
एसएसपी : 6500 एमटी
कुल: 41500 एमटी
सबसे अधिक मूंग की बुवाई
बारिश की लेटलतीफी के बावजूद किसानों ने उम्मीद में ही धान को छोड़कर अन्य फसलों की बुवाई पहले ही पूरी कर ली है। कृषि विभाग के मुताबिक अभी तक मक्का 7.52 प्रतिशत, ज्वार 4.96 प्रतिशत, बाजरा 20.83 प्रतिशत, उड़द 20.34 प्रतिशत, मूंग 43.88 प्रतिशत, अरहर 31.39 प्रतिशत, मूंगफली 40.99 प्रतिशत, सोयाबीन 22.76 प्रतिशत एवं तिल की 23.77 प्रतिशत रकबे में बुवाई हो चुकी। झांसी में इस बार कुल 243316 हेक्टेयर में फसल रकबा का आकलन किया गया है। जबकि उत्पादकता 9.01 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आंकी गई है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि बारिश न होने पर इसको नुकसान पहुंच सकता है।
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