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Jhansi News: फसल खराब होने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रहे किसान... 12 दिन में पांच की गई जान

Mon, 27 Mar 2023 12:16 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Mar 2023 12:16 AM IST
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Farmers are not able to bear the shock of crop failure, five died in 12 days
झांसी। बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसल का सदमा बुंदेलखंड के किसान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। 12 दिनों में पांच किसान अपनी जान गवां चुके हैं। इनमें तीन किसानों ने फसल खराब होने के बाद आत्महत्या कर ली, जबकि दो हृदयाघात का शिकार हुए।
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ललितपुर के जखौरा थाना इलाके के ग्राम धरमपुरा के गौरव राजपूत (40) खेतीकर परिवार का जीवन-यापन करते थे। उन्होंने अपने चार एकड़ के खेत में गेहूं की बोआई की थी। फसल अच्छी तैयार हो गई थी। लेकिन, अचानक बारिश और ओलावृष्टि हो गई। इससे उनकी फसल को खासा नुकसान हुआ। खेत पर फसल की दुर्दशा को देखकर वे खासे मायूस हो गए थे। घर लौटने पर वे चिंता में डूबे हुए थे। इसी दरम्यान उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और उनकी मौत हो गई। इसी तरह 12 दिनों के भीतर बुंदेलखंड के पांच किसान अपनी जान गवां चुके हैं। ये सभी बारिश और ओलावृष्टि की वजह से फसल खराब होने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए।
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केस-1
खेत पर ही झूल गया फंदे पर
झांसी। मऊरानीपुर के ग्राम बंका पहाड़ी निवासी अंबिका पाल ने 10 बीघा के खेत में बटाई पर गेहूं की बोआई की थी। उनके ऊपर कर्ज था। वे फसल अच्छी होने पर कर्ज चुकाने की उम्मीद लगाए हुए थे। लेकिन, बारिश और ओलावृष्टि से फसल खराब हो गई। इसका वह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए। खेत पर ही उन्होंने 23 मार्च को पेड़ पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। ब्यूरो
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केस-2
खराब फसल को देखकर खाया जहर
झांसी। बांदा के नरैनी क्षेत्र के रिठौली गांव निवासी किसान रमेश (50) की फसल बारिश और ओलावृष्टि से खराब हो गई थी। अपनी मेहनत और लागत बर्बाद होने से वे बेहद मायूस हो गए थे। इसी परेशानी में उन्होंने खेत पर ही जहर खा लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें आनन-फानन अस्पताल लेकर भागे थे। अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।

केस-3
फसल की बर्बादी देख सीने में हुआ दर्द, गई जान
झांसी। महोबा के कबरई निवासी किसान शिवनाथ (56) की गिनती गांव के छोटे किसानों में होती थी। उन्होंने अपने पांच बीघा के खेत में गेहूं की बोआई की थी। बारिश और ओलावृष्टि की वजह से फसल खेत में बिछ गई थी। खेत पर यह मंजर देखते ही उनके सीने में दर्द होने लगा। जानकारी होने पर परिजन उन्हें घर ले आए। घर में उनकी मौत हो गई। ब्यूरो

केस-4
पैदावार कम हुई तो दी जान
झांसी। ललितपुर के नाराहट के ग्राम सतौरा निवासी अंगद अहिरवार (28) ने अपने खेत में गेहूं और राई की बोआई की थी। फसल अच्छी तैयार हो, इसके लिए उन्होंने रात-दिन मेहनत की थी। लेकिन, पैदावार उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा था। इससे वे बेहद परेशान रहने लगे थे। इसी परेशानी में उन्होंने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

9.59 लाख हेक्टेअर में हुई थी बोआई
झांसी। बुंदेलखंड में रबी की फसल की प्रमुख किस्म गेहूं, राई, चना, मटर व मसूर हैं। इसके अलावा कहीं-कहीं जौ व अलसी भी बोई जाती हैं। इस बार मंडल के तीनों जनपदों में 9,59,669 हेक्टेअर में रबी की बोआई की गई थी। झांसी में 3,36,075 हेक्टेअर, ललितपुर में 2,70,304 हेक्टेअर व जालौन जिले में 3,55,690 हेक्टेअर में बोआई हुई थी। सबसे ज्यादा गेहूं बोया गया था। पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि ने सबसे ज्यादा तबाही ललितपुर में मचाई। इसके अलावा झांसी और जालौन में भी फसलों को नुकसान पहुंचा। इसका सर्वे जारी है।


मड़ावरा में फिर हुई ओलावृष्टि
झांसी। ललितपुर के मड़ावरा में रविवार की शाम एक बार फिर से ओलावृष्टि हुई। बताया गया कि दिन भर मौसम साफ बना रहा। लेकिन, शाम को अचानक बदली छा गई। किसानों के संभलने से पहले ही अचानक ओलावृष्टि शुरू हो गई। इससे कटाई कर रहे किसानों में अफरा-तफरी मच गई। किसान खलिहानों में रखी फसल को भी बचाते नजर आए। ओलावृष्टि से फसलों को खासा नुकसान माना जा रहा है।
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