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ऋणमाफी की उम्मीद में बैठे किसान मायूस
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झांसी। यूपी सरकार के बजट से खास कर बुंदेलखंड के कर्जधारक किसान खासे मायूस हुए हैं। सत्ता संभालने के बाद पिछले तीन साल से लगातार योगी सरकार ऋण माफी के बजट का एलान करती रही। झांसी में इसके जरिए 60 हजार किसानों के कर्ज माफ हुए लेकिन करीब डेढ़ लाख कर्जदार किसान इसके बोझ तले अब भी दबे हैं। इन कर्जधारक किसानों को बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार ने अबकी कर्जमाफी से हाथ खींचकर किसानों को मायूस कर दिया।
योगी सरकार ने अपने पहले बजट से किसान ऋणमोचन योजना आरंभ की थी। लगातार तीन बजट से योगी सरकार किसानों की कर्जमाफी के लिए बजट दे रही लेकिन, अबकी बार उसने इस मद के बजट को शून्य कर दिया हालांकि सितंबर माह से ही किसानों का ऋण माफ नहीं हो रहा है। कृषि विभाग के आकड़ों के मुताबिक योजना के लिए 1,42,378 किसान चिन्हित हुए लेकिन, सिर्फ 60,787 को ही फायदा मिला। इनकी कर्जमाफी के लिए 323.05 करोड़ रुपए खर्च हुए लेकिन, बड़ी संख्या में कर्जधारक किसान अभी भी लाभ से वंचित हैं। वंचित किसान अफसरों के चक्कर काट रहे थे। उनको नए बजट का इंतजार करने को कहा गया लेकिन, आज पेश हुए बजट से इन सभी किसानों को झटका लगा है।
मिट्टी की वजह से खेती खर्चीली
बुंदेलखंड में किसानी दूसरी जगहों के मुकाबले अधिक खर्चीली एवं खतरे से भरी होती है। झांसी में कुल 342.099 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती होती है। इसमें पड़वा मिट्टी 161.64 हेक्टेयर एवं राकड़ मिट्टी 56.68 हेक्टेयर है। यहां फसल के लिए सामान्य से दो गुनी सिंचाई की आवश्यकता होती है। आम तौर पर रबी के लिए चार बार सिंचाई होती है लेकिन यहां सात बार तक सींचना पड़ता है जबकि उपज प्रति हेक्टेयर 20 कुंतल से अधिक नहीं होती। सिंचाई अधिक होने से लागत काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यहां खेती-किसानी करना काफी चुनौती पूर्ण है। लागत के मुकाबले उपज का मूल्य न मिलने से यहां किसान हमेशा कर्ज के चंगुल में फंसा रहता है। बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों किसानों के दूसरी बड़ी समस्या हैं। खेतों में फेसिंग बनाने के लिए मदद की दरकार थी लेकिन, बजट में ऐसी योजना का एलान न होने से किसान मायूस हुए हैं हालांकि निराश्रित गौवंश के भरण पोषण एवं गौ आश्रय स्थल बनाए जाने के संबंध में बजट में प्रावधान किया गया है।
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पचास हजार बंटाईदार किसानों को फायदा
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के जरिए बंटाईदार किसानों के लिए भी बीमा का प्रावधान किया गया। इससे यहां करीब पचास हजार किसानों को इसका फायदा मिल सकेगा। इसके जरिए बंटाईदार किसानों को दुर्घटना होने की दशा में प्रतिफल देने की व्यवस्था की गई है। इन बंटाईदार किसानों को आप्रकृतिक मौत, अपंगता आदि दशा में वित्तीय मदद की जाएगी।
किसानों को सिखाया जाएगा पराली प्रबंधन
पराली से निपटने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। इस बार पराली जलाने के आरोप में झांसी में दो सौ से अधिक किसानों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिसिया कार्रवाई ने किसानों में डर भर दिया। सरकार की मंशा है कि पराली प्रबंधन केजरिए किसानों, अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
लघु सिंचाई योजना से मजूबत होगी व्यवस्था
बजट में मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के एलान से बुंदेलखंड में फायदा होने की उम्मीद है। बमौर, गुरसराय, गरौठा के तमाम इलाके अभी तक असिंचित हैं। इसके जरिए यहां के किसानों को खेती किसानी के लिए पानी मिल सकता है। इसी तरह सरकार ने 3000 करोड़ रुपये जल जीवन मिशन के लिए देने की व्यवस्था की है। इसके जरिए प्यास से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों तक पानी पहुंचाया जा सकेगा। इसी तरह बजट में तालाबों को विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार ने भूमि संरक्षण, खेत तालाब योजना को भी बढ़ाने के लिए बजट में प्रावधान किया है।
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योगी सरकार ने अपने पहले बजट से किसान ऋणमोचन योजना आरंभ की थी। लगातार तीन बजट से योगी सरकार किसानों की कर्जमाफी के लिए बजट दे रही लेकिन, अबकी बार उसने इस मद के बजट को शून्य कर दिया हालांकि सितंबर माह से ही किसानों का ऋण माफ नहीं हो रहा है। कृषि विभाग के आकड़ों के मुताबिक योजना के लिए 1,42,378 किसान चिन्हित हुए लेकिन, सिर्फ 60,787 को ही फायदा मिला। इनकी कर्जमाफी के लिए 323.05 करोड़ रुपए खर्च हुए लेकिन, बड़ी संख्या में कर्जधारक किसान अभी भी लाभ से वंचित हैं। वंचित किसान अफसरों के चक्कर काट रहे थे। उनको नए बजट का इंतजार करने को कहा गया लेकिन, आज पेश हुए बजट से इन सभी किसानों को झटका लगा है।
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मिट्टी की वजह से खेती खर्चीली
बुंदेलखंड में किसानी दूसरी जगहों के मुकाबले अधिक खर्चीली एवं खतरे से भरी होती है। झांसी में कुल 342.099 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती होती है। इसमें पड़वा मिट्टी 161.64 हेक्टेयर एवं राकड़ मिट्टी 56.68 हेक्टेयर है। यहां फसल के लिए सामान्य से दो गुनी सिंचाई की आवश्यकता होती है। आम तौर पर रबी के लिए चार बार सिंचाई होती है लेकिन यहां सात बार तक सींचना पड़ता है जबकि उपज प्रति हेक्टेयर 20 कुंतल से अधिक नहीं होती। सिंचाई अधिक होने से लागत काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यहां खेती-किसानी करना काफी चुनौती पूर्ण है। लागत के मुकाबले उपज का मूल्य न मिलने से यहां किसान हमेशा कर्ज के चंगुल में फंसा रहता है। बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों किसानों के दूसरी बड़ी समस्या हैं। खेतों में फेसिंग बनाने के लिए मदद की दरकार थी लेकिन, बजट में ऐसी योजना का एलान न होने से किसान मायूस हुए हैं हालांकि निराश्रित गौवंश के भरण पोषण एवं गौ आश्रय स्थल बनाए जाने के संबंध में बजट में प्रावधान किया गया है।
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पचास हजार बंटाईदार किसानों को फायदा
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के जरिए बंटाईदार किसानों के लिए भी बीमा का प्रावधान किया गया। इससे यहां करीब पचास हजार किसानों को इसका फायदा मिल सकेगा। इसके जरिए बंटाईदार किसानों को दुर्घटना होने की दशा में प्रतिफल देने की व्यवस्था की गई है। इन बंटाईदार किसानों को आप्रकृतिक मौत, अपंगता आदि दशा में वित्तीय मदद की जाएगी।
किसानों को सिखाया जाएगा पराली प्रबंधन
पराली से निपटने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। इस बार पराली जलाने के आरोप में झांसी में दो सौ से अधिक किसानों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिसिया कार्रवाई ने किसानों में डर भर दिया। सरकार की मंशा है कि पराली प्रबंधन केजरिए किसानों, अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
लघु सिंचाई योजना से मजूबत होगी व्यवस्था
बजट में मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के एलान से बुंदेलखंड में फायदा होने की उम्मीद है। बमौर, गुरसराय, गरौठा के तमाम इलाके अभी तक असिंचित हैं। इसके जरिए यहां के किसानों को खेती किसानी के लिए पानी मिल सकता है। इसी तरह सरकार ने 3000 करोड़ रुपये जल जीवन मिशन के लिए देने की व्यवस्था की है। इसके जरिए प्यास से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों तक पानी पहुंचाया जा सकेगा। इसी तरह बजट में तालाबों को विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार ने भूमि संरक्षण, खेत तालाब योजना को भी बढ़ाने के लिए बजट में प्रावधान किया है।