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किसान हारा... कर्ज का बोझ जीता!: फाइनेंस कंपनी के एजेंटों के दबाव में आकर दे दी जान, घर पर आकर कहा था बुरा-भला

Mon, 02 Sep 2024 08:42 PM IST
आकाश दुबे संवाद न्यूज एजेंसी, मोंठ (झांसी)
संवाद न्यूज एजेंसी, मोंठ (झांसी) Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 02 Sep 2024 08:42 PM IST
सार

कंपनियों के एजेंट उन पर किस्त देने का दबाव बना रहे थे। सोमवार को जब एजेंट आए और उन्होंने भला-बुरा कहा तो वह घर के अंदर कमरे में जाकर फंदे से लटक गए।

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Farmer committed suicide in Jhansi after being unable to repay his loan
मृतक किसान की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समथर थाना क्षेत्र के ग्राम बसोबई में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्ज में दबे 50 वर्षीय किसान ने फंदे से लटककर जान दे दी। मृतक ने कई समूहों से लोन लिया था। जिनकी किस्त वह समय से नहीं भर पा रहे थे। कंपनियों के एजेंट उन पर किस्त देने का दबाव बना रहे थे। सोमवार को जब एजेंट आए और उन्होंने भला-बुरा कहा तो वह घर के अंदर कमरे में जाकर फंदे से लटक गए। परिजन उन्हें मोंठ सीएचसी ले गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

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समथर थाना क्षेत्र के ग्राम बसोबई निवासी राजकुमार तिवारी (50) पुत्र स्वर्गीय रामरतन तिवारी किसान थे। परिजन के अनुसार उन्होंने कई प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लोन लिया था। जिनकी किस्त वह जमा करते थे। इस बार जब वह अपनी किस्त समय से जमा नहीं कर सका तो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट ने उन पर दबाव बनाया।

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सोमवार करीब 12 बजे कुछ एजेंट राजकुमार के घर आए और उससे किस्त जमा करने के लिए कहने लगे। असमर्थता जताने पर एजेंटों ने खरी-खोटी सुनाई। क्षुब्ध होकर राजकुमार घर के अंदर गए और कमरे में जाकर दरवाजे बंद कर लिया। अंदर रस्सी से फंदा बनाया और लटक गए। कुछ देर बाद उसकी पत्नी संजू ने दरवाजा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।

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अन्य परिजन ने दरवाजा तोड़कर उन्हें फंदे से नीचे उतारा और तत्काल निजी वाहन से सीएचसी मोंठ ले गए। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी सूचना पुलिस को भेज दी। वहां पुलिस ने पहुंचकर शव का पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए झांसी भेज दिया है।

प्रधानाचार्य थे, करने लगे खेती
परिजन ने बताया कि राजकुमार तिवारी करीब 10 साल पहले मोंठ के एक प्राइवेट स्कूल में प्रधानाचार्य थे। उसके बाद वह खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनका एक 26 वर्षीय पुत्र योगेश है जो दिल्ली में रहकर प्राइवेट जॉब करता है। राहुल तिवारी ने बताया कि उनके बड़े भाई राजकुमार तिवारी ने सोमवार को एजेंट से किस्त जमा कराने के लिए 2-4 दिन की मोहलत मांगी थी, लेकिन वह नहीं माने। नायब तहसीलदार नसीम अख्तर ने बताया कि मामले की जांच चल रही है।

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