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शिक्षा विभाग में तलाशा जा रहा है ‘लिफाफा’
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झांसी। शिक्षा विभाग में इन दिनों जोर शोर से एक लिफाफे की तलाश की जा रही है। फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के प्रकरण में इसे अहम दस्तावेज माना जा रहा है। लिफाफा मिलने पर इसके जरिये फर्जी नियुक्ति पत्र भेजने वालों तक पहुंचा जा सकता है। जबकि, लिफाफा बरामद न होेने की इस स्थिति में फर्जीवाड़े में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आ सकती है।
जनपद के राजकीय बालिका हाईस्कूल वीरा, राजकीय हाईस्कूल खडौरा व राजकीय हाईस्कूल बम्हौरी सुहागी में पिछले महीने फर्जी नियुक्ति पत्रों के सहारे पांच लोगों ने सहायक अध्यापकों के पद पर नियुक्ति हासिल कर ली थी। इस मामले का खुलासा होने के बाद पांचों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। साथ ही तीनों विद्यालयों की प्रधानाध्यापिकाओं को निलंबित किया जा चुका है। जबकि, शिक्षा विभाग के तीन लिपिकों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। दरअसल, शिक्षकों के फर्जी नियुक्ति पत्र विद्यालयों के अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय भी पहुंचे थे। ये नियुक्ति पत्र किस माध्यम से आए थे, इसकी पड़ताल की जा रही है। लिपिकों का कहना है कि नियुक्ति पत्र डाक के जरिये उन्हें प्राप्त हुए थे, लेकिन जिस लिफाफे में ये नियुक्ति पत्र आए थे उसे अब तक वह अफसरों के सामने नहीं ला पाए हैं। जबकि, व्यवस्था के अनुसार डाक से आने वाले किसी भी पत्र के साथ उसका लिफाफा भी लगाया जाता है, परंतु इस मामले में यह नहीं किया गया है। लिफाफा मिल जाने पर यह मालूम किया जा सकेगा कि इसे किस पोस्ट ऑफिस से पोस्ट किया गया। सीसीटीवी कैमरों की मदद से पोस्ट करने वाले तक भी पहुंचा जा सकेगा। वहीं, लिफाफा न मिलने की स्थिति में यह माना जाएगा कि किसी ने नियुक्ति पत्र सीधे तौर पर विभागीय कर्मचारियों के हाथों में दिए। ऐसे में इस फर्जीवाड़े में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है।
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जनपद के राजकीय बालिका हाईस्कूल वीरा, राजकीय हाईस्कूल खडौरा व राजकीय हाईस्कूल बम्हौरी सुहागी में पिछले महीने फर्जी नियुक्ति पत्रों के सहारे पांच लोगों ने सहायक अध्यापकों के पद पर नियुक्ति हासिल कर ली थी। इस मामले का खुलासा होने के बाद पांचों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। साथ ही तीनों विद्यालयों की प्रधानाध्यापिकाओं को निलंबित किया जा चुका है। जबकि, शिक्षा विभाग के तीन लिपिकों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। दरअसल, शिक्षकों के फर्जी नियुक्ति पत्र विद्यालयों के अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय भी पहुंचे थे। ये नियुक्ति पत्र किस माध्यम से आए थे, इसकी पड़ताल की जा रही है। लिपिकों का कहना है कि नियुक्ति पत्र डाक के जरिये उन्हें प्राप्त हुए थे, लेकिन जिस लिफाफे में ये नियुक्ति पत्र आए थे उसे अब तक वह अफसरों के सामने नहीं ला पाए हैं। जबकि, व्यवस्था के अनुसार डाक से आने वाले किसी भी पत्र के साथ उसका लिफाफा भी लगाया जाता है, परंतु इस मामले में यह नहीं किया गया है। लिफाफा मिल जाने पर यह मालूम किया जा सकेगा कि इसे किस पोस्ट ऑफिस से पोस्ट किया गया। सीसीटीवी कैमरों की मदद से पोस्ट करने वाले तक भी पहुंचा जा सकेगा। वहीं, लिफाफा न मिलने की स्थिति में यह माना जाएगा कि किसी ने नियुक्ति पत्र सीधे तौर पर विभागीय कर्मचारियों के हाथों में दिए। ऐसे में इस फर्जीवाड़े में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आ सकती है।
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