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बेटी की हत्या कर बेगुनाह को फंसाया: अब पिता पर चलेगा मुकदमा, तीन साल जेल में रहे छात्र, माता-पिता भी खोये
Tue, 09 Sep 2025 10:35 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 09 Sep 2025 10:35 PM IST
सार
न्यायालय ने आरोप सिद्ध न होने पर दोनों छात्र को बरी कर दिया। वहीं, पिता और पजिनों पर उल्टा मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
तीन साल पहले आईटीआई के छात्र और उसके ममेरे भाई पर लड़की के साथ छेड़छाड़ और आत्महत्या के उकसाने के आरोप में पॉस्को एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था। जबकि लड़की को छात्र पहचानता तक नहीं था। पिता के झूठा मुकदमा दर्ज कराने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। केस लड़ते-लड़ते माता-पिता ने तीन बीघा जमीन बेच दी। लेकिन बेटे को रिहा नहीं करा पाए और सदमे में उनकी मौत हो गई। तीन साल बाद जब छात्र को रिहा किया गया तब तक उसका सब कुछ तबाह हो चुका था। बाहर निकालने के बाद छात्र बोला माता-पिता के जीते जी में रिहा नहीं हो पाया, मेरा करियर खत्म हो गया।
झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर पिता पर एफआईआर
बेटी की हत्या के आरोप एक छात्र और उसके ममेरे भाई पर लगाए गए थे। न्यायालय में साक्ष्य न मिलने पर कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया। वहीं, कोर्ट ने झूठा मामला दर्ज कराने पर पिता और उसके परिजनों को बेटी की हत्या करने का दोषी मानते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
बड़ागांव थानाक्षेत्र के हाजीपुरा में 8 जून 2018 में मातादीन अहिरवार की 16 साल की बेटी ने घर में फांसी के फंदे पर झूलकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने इसे खुदकुशी माना था पर मातादीन इसे हत्या बता रहा था। मुकदमा दर्ज न होने पर उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने गांव के छात्र और उसके चचेरे भाई पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने 17 अगस्त 2018 में दोनों के खिलाफ बालिका को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी ने आरोप सिद्ध न होने पर दोनों छात्र को बरी कर दिया। वहीं, पिता और पजिनों पर उल्टा मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट से बरी होने के बाद छात्र ने अफसोस जताया और कहा कि मेरा तो पूरा करियर बर्बाद हो गया। उसका कहना था कि जिस लड़की से उसकी कोई पहचान नहीं थी उसकी हत्या का आरोप आखिर उसके और उसके चचेरे भाई पर ही क्यों लगा। उसने बताया कि उसका कानपुर में रेलवे की परीक्षा देने जा रहा था तब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसे पुलिस वालों से मालूम चला था कि उसे छेड़छाड़ और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
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इज्जत, जमीन-जायदाद और माता पिता को भी खोया
बरी होने केे बाद छात्र ने बताया कि वह व उसका चचेरा भाई खैलार स्थित आईटीआई में पढ़ रहे थे और दोनों के दो सेमेस्टर भी पूरे हो चुके थे। दोनों की कांपटीशन की भी तैयारी कर रहे थे। 18 नवंबर 2018 में इस मुकदमे के बाद से उसके चचेरे भाई की नौकरी चली गई तो वहीं उसके माता-पिता ने उसे जेल से छुड़ाने के लिए तीन बीघा जमीन बेच डाली। बावजूद, उनके जीते जी वह बरी नहीं हो सका। दोनों की इसी सदमे में मौत हो गई।
लौटाना होगा मुआवजा
इस मामले में मातादीन को एससी-एक्ट के तहत मुआवजा राशि प्रदान की गई थी, न्यायालय ने एससी-एक्ट कल्याण बोर्ड से क्षतिपूर्ति की धनराशि वसूल करने का आदेश दिया है।
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झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर पिता पर एफआईआर
बेटी की हत्या के आरोप एक छात्र और उसके ममेरे भाई पर लगाए गए थे। न्यायालय में साक्ष्य न मिलने पर कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया। वहीं, कोर्ट ने झूठा मामला दर्ज कराने पर पिता और उसके परिजनों को बेटी की हत्या करने का दोषी मानते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
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बड़ागांव थानाक्षेत्र के हाजीपुरा में 8 जून 2018 में मातादीन अहिरवार की 16 साल की बेटी ने घर में फांसी के फंदे पर झूलकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने इसे खुदकुशी माना था पर मातादीन इसे हत्या बता रहा था। मुकदमा दर्ज न होने पर उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने गांव के छात्र और उसके चचेरे भाई पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने 17 अगस्त 2018 में दोनों के खिलाफ बालिका को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी ने आरोप सिद्ध न होने पर दोनों छात्र को बरी कर दिया। वहीं, पिता और पजिनों पर उल्टा मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट से बरी होने के बाद छात्र ने अफसोस जताया और कहा कि मेरा तो पूरा करियर बर्बाद हो गया। उसका कहना था कि जिस लड़की से उसकी कोई पहचान नहीं थी उसकी हत्या का आरोप आखिर उसके और उसके चचेरे भाई पर ही क्यों लगा। उसने बताया कि उसका कानपुर में रेलवे की परीक्षा देने जा रहा था तब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसे पुलिस वालों से मालूम चला था कि उसे छेड़छाड़ और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
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इज्जत, जमीन-जायदाद और माता पिता को भी खोया
बरी होने केे बाद छात्र ने बताया कि वह व उसका चचेरा भाई खैलार स्थित आईटीआई में पढ़ रहे थे और दोनों के दो सेमेस्टर भी पूरे हो चुके थे। दोनों की कांपटीशन की भी तैयारी कर रहे थे। 18 नवंबर 2018 में इस मुकदमे के बाद से उसके चचेरे भाई की नौकरी चली गई तो वहीं उसके माता-पिता ने उसे जेल से छुड़ाने के लिए तीन बीघा जमीन बेच डाली। बावजूद, उनके जीते जी वह बरी नहीं हो सका। दोनों की इसी सदमे में मौत हो गई।
लौटाना होगा मुआवजा
इस मामले में मातादीन को एससी-एक्ट के तहत मुआवजा राशि प्रदान की गई थी, न्यायालय ने एससी-एक्ट कल्याण बोर्ड से क्षतिपूर्ति की धनराशि वसूल करने का आदेश दिया है।