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पूर्व विधायक पत्नी और बच्चों के साथ धरने पर बैठे
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पूर्व विधायक परिवार समेत धरने पर बैठे
झांसी। जलसंस्थान द्वारा पिछले सवा दो साल से हैंडपंप मरम्मत सामग्री का भुगतान न करने से दुखी पूर्व विधायक कैलाश साहू पत्नी प्रियंवदा और दोनों बच्चों के साथ बुधवार की शाम संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने जल संस्थान के अफसरों पर भुगतान के बदले कमीशन मांगने का आरोप लगाया। बाद में अपर आयुक्त व जलसंस्थान के महाप्रबंधक द्वारा किस्तों में भुगतान करने का आश्वासन देने पर उन्होंने धरना खत्म कर दिया।
धरने में बैठे बसपा से पूर्व विधायक रहे कैलाश साहू ने बताया कि उनकी पत्नी एक फर्म की प्रोपराइटर हैं। जलसंस्थान को उनकी फर्म ने अप्रैल 2017 में हैंडपंप मरम्मत की सामग्री की आपूर्ति की थी। बदले में 33 लाख रुपये का भुगतान मिलना था। सामग्री की आपूर्ति के लिए उनकी पत्नी ने सदर बाजार स्थित एक बैंक से कर्ज लिया था। मगर, पिछले सवा दो साल से जलसंस्थान के महाप्रबंधक, सचिव व वित्त प्रबंधक उनको सिर्फ टहलाने का काम कर रहे हैं। आरोप लगाया कि जलसंस्थान के अधिकारी 30 प्रतिशत और वित्त विभाग के एक अधिकारी पांच फीसदी कमीशन मांग रहे हैं, जो वह देने को तैयार नहीं है। बुधवार को वह महाप्रबंधक से मिलने गए थे, जहां से उनको संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में बैठने वाले एक अधिकारी के पास भेज दिया गया। वह अधिकारी जलसंस्थान से जुड़े हैं। मगर, उन अधिकारी ने उनको कोई तवज्जो नहीं दी। बाद में पूर्व विधायक पत्नी व बच्चों के साथ धरने पर बैठ गए। इस बात का पता लगने पर अपर आयुक्त त्रिभुवन विश्वकर्मा, जलसंस्थान के महाप्रबंधक आरएस सक्सेना, अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह, अन्य कर्मचारी व पुलिस मौके पर पहुंच गई। बाद में महाप्रबंधक ने किस्तों में भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया। फिर पूर्व विधायक ने धरना खत्म कर दिया।
कमीशन का आरोप निराधार है। पिछले दो साल से जलसंस्थान को बजट ही नहीं मिला है। मंडल की सालाना आमदनी 15 करोड़ है, जबकि वेतन, पेंशन, मरम्मत समेत अन्य कार्यों के 60 करोड़ के खर्चे हैं। अभी 32 करोड़ रुपये ठेकेदारों के देने हैं। - आरएस सक्सेना, महाप्रबंधक जलसंस्थान।
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झांसी। जलसंस्थान द्वारा पिछले सवा दो साल से हैंडपंप मरम्मत सामग्री का भुगतान न करने से दुखी पूर्व विधायक कैलाश साहू पत्नी प्रियंवदा और दोनों बच्चों के साथ बुधवार की शाम संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने जल संस्थान के अफसरों पर भुगतान के बदले कमीशन मांगने का आरोप लगाया। बाद में अपर आयुक्त व जलसंस्थान के महाप्रबंधक द्वारा किस्तों में भुगतान करने का आश्वासन देने पर उन्होंने धरना खत्म कर दिया।
धरने में बैठे बसपा से पूर्व विधायक रहे कैलाश साहू ने बताया कि उनकी पत्नी एक फर्म की प्रोपराइटर हैं। जलसंस्थान को उनकी फर्म ने अप्रैल 2017 में हैंडपंप मरम्मत की सामग्री की आपूर्ति की थी। बदले में 33 लाख रुपये का भुगतान मिलना था। सामग्री की आपूर्ति के लिए उनकी पत्नी ने सदर बाजार स्थित एक बैंक से कर्ज लिया था। मगर, पिछले सवा दो साल से जलसंस्थान के महाप्रबंधक, सचिव व वित्त प्रबंधक उनको सिर्फ टहलाने का काम कर रहे हैं। आरोप लगाया कि जलसंस्थान के अधिकारी 30 प्रतिशत और वित्त विभाग के एक अधिकारी पांच फीसदी कमीशन मांग रहे हैं, जो वह देने को तैयार नहीं है। बुधवार को वह महाप्रबंधक से मिलने गए थे, जहां से उनको संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में बैठने वाले एक अधिकारी के पास भेज दिया गया। वह अधिकारी जलसंस्थान से जुड़े हैं। मगर, उन अधिकारी ने उनको कोई तवज्जो नहीं दी। बाद में पूर्व विधायक पत्नी व बच्चों के साथ धरने पर बैठ गए। इस बात का पता लगने पर अपर आयुक्त त्रिभुवन विश्वकर्मा, जलसंस्थान के महाप्रबंधक आरएस सक्सेना, अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह, अन्य कर्मचारी व पुलिस मौके पर पहुंच गई। बाद में महाप्रबंधक ने किस्तों में भुगतान करने का लिखित आश्वासन दिया। फिर पूर्व विधायक ने धरना खत्म कर दिया।
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कमीशन का आरोप निराधार है। पिछले दो साल से जलसंस्थान को बजट ही नहीं मिला है। मंडल की सालाना आमदनी 15 करोड़ है, जबकि वेतन, पेंशन, मरम्मत समेत अन्य कार्यों के 60 करोड़ के खर्चे हैं। अभी 32 करोड़ रुपये ठेकेदारों के देने हैं। - आरएस सक्सेना, महाप्रबंधक जलसंस्थान।
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