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गांवों में अब हर मकान का होगा दस्तावेज
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झांसी। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के पास उनके मकान का मालिकाना हक तो होता है, लेकिन इसका कोई दस्तावेज नहीं होता है। लेकिन, अब इस कमी को स्वामित्व योजना के तहत पूरा किया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीणों को उनके मकान के स्वामित्व का दस्तावेज दिया जाएगा। योजना के तहत अब तक 324 गांवों का ड्रोन के जरिए सर्वे किया जा चुका है।
जिले की ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में बसती है। गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोगों के पास घर तो होते हैं, लेकिन उससे संबंधित कोई दस्तावेज नहीं होता। पीढ़ी दर पीढ़ी लोग उसी मकान में रहते चले आते हैं। पारिवारिक बंटवारे भी हो जाते हैं। लेकिन, अब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित घर व बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज उनके स्वामियों को उपलब्ध कराने जा रही है। ये काम स्वामित्व योजना के तहत किया जा रहा है। जिले के 845 में से 697 गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है। गैर आबाद, नगर निकाय की सीमा में आने वाले, चकबंदी वाले व सैनिक क्षेत्र के 148 गांवों को फिलहाल इसमें शामिल नहीं किया गया है। इनमें से ड्रोन के जरिए 324 गांवों के सर्वे का काम पूरा कर लिया लिया गया। दस्तावेज तैयार करने का काम अंतिम दौर में है।
ये होगा दस्तावेज में
झांसी। स्वामित्व योजना के तहत दिए जाने वाले संपत्ति के दस्तावेज में मालिक नाम, पिता का नाम, पता, संपत्ति का एरिया समेत घर का मानचित्र भी होगा। ये ग्रामीणों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। दस्तावेज मिल जाने से ग्रामीण आवश्यकता पड़ने पर अपनी संपत्ति को बैंक में बंधक बनाकर ऋण भी ले सकेंगे।
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48 गांवों में 25 को बांटे जाएंगे दस्तावेज
झांसी। सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब तक जिले के 11 गांवों में रहने वाले लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं। टहरौली के 37 और गरौठा तहसील के 11 गांवों के ग्रामीणों को दस्तावेज 25 दिसंबर को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। जिन गांवों का सर्वे हो गया है, उनके दस्तावेज तैयार करने का काम जारी है।
विकास को मिलेगी रफ्तार
झांसी। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनके घरों के दस्तावेज तो उपलब्ध कराए ही जाएंगे, साथ ही ग्रामीण इलाकों के विकास को रफ्तार भी मिलेगी। सर्वे में पूरे गांव का ब्लू प्रिंट आ जाएगा। बाद में इसके अनुसार ही गांव में नियोजित तरीके से मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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जिले की ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में बसती है। गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोगों के पास घर तो होते हैं, लेकिन उससे संबंधित कोई दस्तावेज नहीं होता। पीढ़ी दर पीढ़ी लोग उसी मकान में रहते चले आते हैं। पारिवारिक बंटवारे भी हो जाते हैं। लेकिन, अब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित घर व बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज उनके स्वामियों को उपलब्ध कराने जा रही है। ये काम स्वामित्व योजना के तहत किया जा रहा है। जिले के 845 में से 697 गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है। गैर आबाद, नगर निकाय की सीमा में आने वाले, चकबंदी वाले व सैनिक क्षेत्र के 148 गांवों को फिलहाल इसमें शामिल नहीं किया गया है। इनमें से ड्रोन के जरिए 324 गांवों के सर्वे का काम पूरा कर लिया लिया गया। दस्तावेज तैयार करने का काम अंतिम दौर में है।
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ये होगा दस्तावेज में
झांसी। स्वामित्व योजना के तहत दिए जाने वाले संपत्ति के दस्तावेज में मालिक नाम, पिता का नाम, पता, संपत्ति का एरिया समेत घर का मानचित्र भी होगा। ये ग्रामीणों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। दस्तावेज मिल जाने से ग्रामीण आवश्यकता पड़ने पर अपनी संपत्ति को बैंक में बंधक बनाकर ऋण भी ले सकेंगे।
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48 गांवों में 25 को बांटे जाएंगे दस्तावेज
झांसी। सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब तक जिले के 11 गांवों में रहने वाले लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं। टहरौली के 37 और गरौठा तहसील के 11 गांवों के ग्रामीणों को दस्तावेज 25 दिसंबर को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। जिन गांवों का सर्वे हो गया है, उनके दस्तावेज तैयार करने का काम जारी है।
विकास को मिलेगी रफ्तार
झांसी। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों को उनके घरों के दस्तावेज तो उपलब्ध कराए ही जाएंगे, साथ ही ग्रामीण इलाकों के विकास को रफ्तार भी मिलेगी। सर्वे में पूरे गांव का ब्लू प्रिंट आ जाएगा। बाद में इसके अनुसार ही गांव में नियोजित तरीके से मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।