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80 शवों की एक साल बाद भी नहीं हुई शिनाख्त

Sat, 01 Jan 2022 02:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 Jan 2022 02:00 AM IST
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Even these 80 unknowns would have become known...if only a little effort had been made.
झांसी। ये कौन थे कोई नहीं जानता। कहां के रहने वाले थे किसी को नहीं पता। झांसी में इनके शव अलग अलग स्थानों पर पड़े मिले थे। इनमें कुछ की हत्या हुई तो कई शव नदी, नहर और तालाब में उतराते मिले। कुछ बीमारी से मरे। पुलिस ने भी 72 घंटे इनके परिजनों का इंतजार किया और फिर शव का अंतिम संस्कार करा दिया। हालांकि पुलिस के दावे हैं कि पहचान कराने के लिए पूरे प्रयास किए गए लेकिन हकीकत यह है कि कोशिश होती ही नहीं। अब तो पुलिस पंफ्लेट तक नहीं छपवाती। शिनाख्त से संबंधित विज्ञापन तक नहीं निकलवाए जाते। यही वजह है कि 80 शवों की आज तक शिनाख्त नहीं हो सकी।
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पुलिस आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान कुल 1200 लोगों का पोस्टमार्टम हुआ। इनमें 80 शवों की शिनाख्त पोस्टमार्टम के बाद भी नहीं हो सकी। नियमों के मुताबिक पंचनामा भरने के 72 घंटे बाद शिनाख्त न होने पर पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करा दिया जाता है। अंतिम संस्कार के बाद उन शवों की शिनाख्त होना काफी मुश्किल हो जाता है। एक महीने के बाद थानों की फाइलों में यह मामले बंद कर दिए जाते हैं। उसके बाद न उसकी मौत का राज मालूम चलता है, न उसके घर वालों को कुछ पता चलता है। घर वाले गुमशुदा मानकर ही महीनोें-वर्षों उनके इंतजार में गुजार देते हैं।
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शिनाख्त के लिए करना होता है यह काम
- सबसे पहले एफआईआर दर्ज करनी होती है
- उसके बाद अखबारों और टीवी में फोटो समेत अन्य विवरण छपवाने होते हैं
- बस अड्डा, रेलवे स्टेशन अथवा अन्य सार्वजनिक जगहों पर पोस्टर लगवाए जाते हैं
- सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जाता है
- आसपास के पुलिस थानों से गुमशुदा लोगों की तलाश की जाती है
एक शव के लिए पुलिस को मिलते हैं दो हजार रुपये
झांसी। एक अज्ञात शव के लिए पुलिस को दो हजार रुपये मिलते हैं। इस रकम में शिनाख्त करने से लेकर अंतिम संस्कार तक का खर्च होगा है। अब भला इतने कम पैसे में किस तरह शिनाख्त की जाए। हालांकि पुलिस को मिलने वाली इस रकम को बढ़ाने की मांग कई दफा हो चुकी है लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।
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लावारिस लाशों की पहचान के लिए लगे थंब मशीन
लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार कराने मेें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रामराजा स्वयं सेवी संस्था के सदस्य श्यामसुंदर शर्मा का कहना है विभिन्न थाना क्षेत्रों में लावरिस लाशें मिलती हैं। इनको पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज लाया जाता है। देश के अधिकांश लोगों ने आधार कार्ड बनवाए हैं। ऐसे में अगर पोस्टमार्टम हाउस मेें थंब मशीन लगा दी जाए तब लावरिस लाश के अंगूठे के निशान से उसकी शिनाख्त कराने में असानी हो सकती है। इसके लिए पोस्टमार्टम हाउस में थंब मशीन लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि संगठन ने ज्ञापन भी दिया है।

कब्रिस्तान में मारे गए युवक की भी नहीं हुई शिनाख्त
जीवनशाह कब्रिस्तान में एक युवक की पत्थर से कूचकर हत्या कर दी गई लेकिन, नौ दिन गुजर जाने के बावजूद उसकी शिनाख्त पुलिस नहीं करा सकी। शिनाख्त न होने के बाद पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम कराकर उसे कब्रिस्तान में दफना दिया। युवक की शिनाख्त न होने की वजह से उसकी हत्या किस वजह से हुई यह भी रहस्य बना हुआ है।
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