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जांच के जाल में फंसा एरच बांध

Tue, 03 Sep 2019 01:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2019 01:48 AM IST
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erach dam to fall in investigation
जांच के जाल में फंसा एरच बांध
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झांसी। एरच बांध का निर्माण पिछले दो साल से वित्तीय अनियमितताओं की जांच के चलते अधर में लटका हुआ है। बांध का 50 फीसदी निर्माण 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले पूरा कर लिया गया था। इसके बाद काम रुका हुआ है। इससे लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस बांध से डिफेंस कॉरिडोर को भी पानी दिया जाना है। ऐसे में पानी के बिना डिफेंस कॉरिडोर का काम भी प्रभावित हो सकता है।
नावार्ड से वित्त पोषित पारीछा बांध से 40 किलोमीटर नीचे एरच क्षेत्र के जुझार गांव में बांध का निर्माण किया जा रहा है। 612 करोड़ की लागत से बनने वाले इस बांध में नावार्ड को 498 करोड़ रुपये देना है, बाकी का बजट प्रदेश सरकार देगी। साल 2016 में बांध निर्माण के लिए 367 करोड़ की तीन किस्तें जारी की जा चुकी हैं। बजट के लगातार मिलने से 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले बांध का 50 फीसदी काम पूरा कर लिया गया था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने साल 2018 में बांध का निर्माण पूरा होने का लक्ष्य बनाया था। मगर, 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार के बनते ही बांध निर्माण में हो रही वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी गई। साथ ही रुड़की विश्वविद्यालय बांध की आवश्यकता पर भी जांच कर रहा है लेकिन दो साल बीतने के बाद भी यह जांचें पूरी नहीं हो सकी हैं। इससे बांध का निर्माण जस का तस पड़ा है।
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जल्द जांच पूरी हो, इसके लिए लगातार प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री के समक्ष भी यह बात रखी थी। उन्होंने शीघ्र की निर्माण कार्य शुरू कराने की बात कही है। जांच अपनी जगह चलती रहेगी।
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- जवाहर लाल राजपूत, विधायक।
62 मिलियन घन मीटर पानी हो सकेगा एकत्रित
बेतवा नदी का पानी यूपी में सबसे पहले ललितपुर में बने राजघाट बांध व माताटीला बांध पर रोका जाता है। इसके बाद झांसी जनपद में बने सुकुवां-ढुकुवां व पारीछा बांध पर पानी का संग्रह होता है। इन चारों बांधों के भरने के बाद भी वर्षा ऋतु में 11 मिलियन घन मीटर पानी नदी में बेकार बह जाता है। इस पानी के सदुपयोग के लिए ही इस बांध का निर्माण किया जा रहा है।

नदी में बहने वाला यह पानी उरई होते हुए हमीरपुर से निकली यमुना नदी में मिल जाता है। एरच बांध को बनाने का मुख्य उद्देश्य आसपास के पांच ब्लाकों (बामौर, गुरसरांय, बड़ागांव, चिरगांव व मोंठ) के 378 गांवों में पेयजल पहुंचाना है। अभी इन गांवों के लोग कुएं व हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। गर्मियों के दिनों में जलस्तर गिरने पर इन गांवों में पेयजल संकट हो जाता है। इस बांध की कुल क्षमता 62 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) होगी व इसकी उपयोग क्षमता 56 मिलियन घन मीटर होगी। बांध 19 मीटर ऊंचा व 1400 मीटर लंबाई में बनाया जाएगा, इसमें करीब बीस गेट होंगे। बांध का तीस एमसीएम पानी पेयजल व दस एमसीएम पानी से आसपास क्षेत्र की 1850 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। 16 एमसीएम पानी का उपयोग नहर के किनारे के खेतों में स्प्रिंकलर सिंचाई में प्रयोग होगा। बांध के बगल से कुछ पानी लगातार बहता रहेगा। इससे नदी सूख नहीं पाएगी और उसका अस्तित्व हमेशा बना रहेगा।
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