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बुंदेलखंड में एक लाख मिर्गी रोगी, गांव में 20 प्रतिशत ही लेते इलाज
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झांसी। बुंदेलखंड में मिर्गी रोगी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। मौजूदा समय में सभी सातों जिलों को मिलाकर एक लाख मिर्गी के रोगी हैं। जादू-टोना या भूत-प्रेत या देवी-देवता का चक्कर समझकर कई लोग मरीज का उपचार के बजाए झाड़-फूंक आदि के चक्कर में पड़ जाते हैं। रोगी का समय पर इलाज न कराने पर कइयों की जान भी जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुंदेलखंड में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 80 प्रतिशत मरीजों का इलाज ही नहीं कराया जाता है।
मिर्गी रोग एक मस्तिष्क का रोग है। मस्तिष्क में असंख्य छोटी-छोटी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें विद्युत तरंगों का संचार होता है। इन विद्युत तरंगों से मस्तिष्क कार्य करता है। ऐसी तरंगों के अत्यधिक मात्रा में बनने से शरीर में होने वाली गति, संवेदी या मानसिक परिवर्तन को मिर्गी का दौरा कहते हैं। जब ये दौरे बार-बार आते हैं तो उसे मिर्गी रोग कहते हैं। अधिकांश लोगों को मिर्गी रोग के बारे में कई भ्रांतियां हैं, इस रोग को जादू-टोना या भूत-प्रेत या देवी देवता से कोई संबंध नहीं है।
नियमित रूप से दवाइयों के सेवन से रोगी पूरी तरह ठीक हो सकता है। अधिकांश रोगियों में बीमारी के स्पष्ट कारण नहीं मिलते हैं मगर ऐसी कोई भी बीमारी जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है, वह मिर्गी रोग पैदा कर सकती है। सिर की चोट, मस्तिष्क, ज्वर, लकवा, ट्यूमर, मदिरा का अधिक सेवन, जन्मजात विकृतियां, जन्म के समय बच्चे के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी, ज्यादा पीलिया, कृमि के लार्वा द्वारा मस्तिष्क का संक्रमण, मस्तिष्क की टीवी, तेज ज्वर, सोडियम कैल्शियम व शर्करा की कमी आदि मिर्गी रोग के कुछ प्रमुख कारण होते हैं।
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मिर्गी के प्रकार
- आंशिक मिर्गी: इसमें मस्तिष्क का एक भाग ही ज्यादा प्रभावित होता है।
- पूर्ण मिर्गी: इसमें विद्युत तरंगें मस्तिष्क के दोनों हिस्सों पर असर करती हैं।
दौरा पड़े तो ये करें
- रोगी को आराम से बिस्तर या जमीन पर लिटा दें। कपड़े ढीले कर दें।
- दौरे के बाद करवट से लिटा दें, जिससे मुंह की लार आदि बाहर न निकलें।
- दौरे के समय मुंह में पानी डालने या दवा खिलाने का प्रयास न करें।
- भिंचे हुए जबड़ों को बलपूर्वक खोलने का प्रयास न करें। चम्मच आदि दांतों में न फंसाएं।
- रोगी को किसी भी प्रकार की चोट लगने से बचाएं।
- दौरा समाप्त होते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
मिर्गी रोगी ये ध्यान रखें
- नियमित दवाओं का सेवन करें।
- एक भी खुराक न लेने पर पुन: दौरा आ सकता है।
- स्वयं दवा की खुराक कम या ज्यादा नहीं करनी चाहिए।
- दवाई लेने से कोई परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- रात में ज्यादा नहीं जागना चाहिए, भूखे नहीं रहना चाहिए।
- लगातार कंप्यूटर और टीवी नहीं देखना चाहिए।
- यदि दवा खाने पर चमड़ी पर दाने या चकत्ते या चलने में लड़खड़ाहट हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
वर्जन..
फोटो..
बुंदेलखंड में एक लाख से अधिक मिर्गी रोगी हैं। इस बीमारी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 60 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 80 फीसदी मिर्गी रोगी का परिजन इलाज नहीं कराते हैं। वो जादू-टोना या फिर ऊपरी चक्कर समझकर झाड़-फूंक आदि के चक्कर में पड़े रहते हैं। लंबे समय तक लगातार दौरे आने पर मरीज की जान भी जा सकती है। मरीज को समय से उपचार मिल जाए तो बीमारी ठीक हो सकती है। दौरे नियंत्रित होने के बाद दवाओं को दो-तीन साल तक लगातार लेने के बाद धीमे-धीमे रोका जा सकता है। 50-60 प्रतिशत लोगों में दवाइयां पूर्ण रूप से बंद की जा सकती है। अन्य दवाएं पांच साल और कुछ में जीवन पर्यन्त लेनी पड़ सकती है। दवाएं लेते समय अपना जीवन सामान्य तरीके से जी सकता है। - डॉ. अरविंद कनकने, न्यूरोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज।
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मिर्गी रोग एक मस्तिष्क का रोग है। मस्तिष्क में असंख्य छोटी-छोटी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें विद्युत तरंगों का संचार होता है। इन विद्युत तरंगों से मस्तिष्क कार्य करता है। ऐसी तरंगों के अत्यधिक मात्रा में बनने से शरीर में होने वाली गति, संवेदी या मानसिक परिवर्तन को मिर्गी का दौरा कहते हैं। जब ये दौरे बार-बार आते हैं तो उसे मिर्गी रोग कहते हैं। अधिकांश लोगों को मिर्गी रोग के बारे में कई भ्रांतियां हैं, इस रोग को जादू-टोना या भूत-प्रेत या देवी देवता से कोई संबंध नहीं है।
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नियमित रूप से दवाइयों के सेवन से रोगी पूरी तरह ठीक हो सकता है। अधिकांश रोगियों में बीमारी के स्पष्ट कारण नहीं मिलते हैं मगर ऐसी कोई भी बीमारी जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है, वह मिर्गी रोग पैदा कर सकती है। सिर की चोट, मस्तिष्क, ज्वर, लकवा, ट्यूमर, मदिरा का अधिक सेवन, जन्मजात विकृतियां, जन्म के समय बच्चे के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी, ज्यादा पीलिया, कृमि के लार्वा द्वारा मस्तिष्क का संक्रमण, मस्तिष्क की टीवी, तेज ज्वर, सोडियम कैल्शियम व शर्करा की कमी आदि मिर्गी रोग के कुछ प्रमुख कारण होते हैं।
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मिर्गी के प्रकार
- आंशिक मिर्गी: इसमें मस्तिष्क का एक भाग ही ज्यादा प्रभावित होता है।
- पूर्ण मिर्गी: इसमें विद्युत तरंगें मस्तिष्क के दोनों हिस्सों पर असर करती हैं।
दौरा पड़े तो ये करें
- रोगी को आराम से बिस्तर या जमीन पर लिटा दें। कपड़े ढीले कर दें।
- दौरे के बाद करवट से लिटा दें, जिससे मुंह की लार आदि बाहर न निकलें।
- दौरे के समय मुंह में पानी डालने या दवा खिलाने का प्रयास न करें।
- भिंचे हुए जबड़ों को बलपूर्वक खोलने का प्रयास न करें। चम्मच आदि दांतों में न फंसाएं।
- रोगी को किसी भी प्रकार की चोट लगने से बचाएं।
- दौरा समाप्त होते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
मिर्गी रोगी ये ध्यान रखें
- नियमित दवाओं का सेवन करें।
- एक भी खुराक न लेने पर पुन: दौरा आ सकता है।
- स्वयं दवा की खुराक कम या ज्यादा नहीं करनी चाहिए।
- दवाई लेने से कोई परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- रात में ज्यादा नहीं जागना चाहिए, भूखे नहीं रहना चाहिए।
- लगातार कंप्यूटर और टीवी नहीं देखना चाहिए।
- यदि दवा खाने पर चमड़ी पर दाने या चकत्ते या चलने में लड़खड़ाहट हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
वर्जन..
फोटो..
बुंदेलखंड में एक लाख से अधिक मिर्गी रोगी हैं। इस बीमारी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 60 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में 80 फीसदी मिर्गी रोगी का परिजन इलाज नहीं कराते हैं। वो जादू-टोना या फिर ऊपरी चक्कर समझकर झाड़-फूंक आदि के चक्कर में पड़े रहते हैं। लंबे समय तक लगातार दौरे आने पर मरीज की जान भी जा सकती है। मरीज को समय से उपचार मिल जाए तो बीमारी ठीक हो सकती है। दौरे नियंत्रित होने के बाद दवाओं को दो-तीन साल तक लगातार लेने के बाद धीमे-धीमे रोका जा सकता है। 50-60 प्रतिशत लोगों में दवाइयां पूर्ण रूप से बंद की जा सकती है। अन्य दवाएं पांच साल और कुछ में जीवन पर्यन्त लेनी पड़ सकती है। दवाएं लेते समय अपना जीवन सामान्य तरीके से जी सकता है। - डॉ. अरविंद कनकने, न्यूरोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज।