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Jhansi News: गौरव-नीरज की जुगलबंदी से बढ़ी इंजीनियरिंग की पौध

Sun, 08 Jun 2025 12:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Jun 2025 12:42 AM IST
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Engineering saplings grew due to the jugalbandi of Gaurav-Neeraj
- स्कूल की पढ़ाई से आईआईटी में प्रवेश तक के सफर में एक-दूसरे की खूब मदद की, आज मिलकर संचालित कर रहे स्कूल
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। साथ खेले और बढ़े। चाहें स्कूल की पढ़ाई हो या फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, एक-दूसरे की भरपूर मदद की। नौकरी-पेशे में भी सफल हुए तो साथ मिलकर स्कूल की नींव रखने ठानी। आज भी साथ मिलकर अपने लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं कि आईआईटीयंस गौरव मिश्रा और नीरज खत्री की। जिनकी दोस्ती के 40 साल हो चुके हैं। बीते तीन दशक में इन दोनों ने करीब 1800 इंजीनियरों को तैयार किया है।
1985 में एक ही स्कूल में प्रवेश लेने के दौरान गौरव मिश्रा और नीरज खत्री की आपस में दोस्ती हो गई थी। जैसे-जैसे साल बीतता गया, दोस्ती और गहरी होती चली गई। दोनों ने इंजीनियरिंग क्षेत्र में कॅरिअर बनाने का मन बनाया। लक्ष्य आईआईटी में प्रवेश पाने का था। 1989 में नीरज खत्री ने आईआईटी कानपुर में प्रवेश पाने की सफलता पा ली। अब बारी गौरव मिश्रा की थी। उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने में नीरज का भी साथ मिल गया। नीरज ने उन्हें अहम टिप्स भी बताए। इसके साथ ही तैयारी करने के लिए अपनी किताबें भी दे दीं।
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1990 में गौरव को भी आईआईटी वाराणसी में प्रवेश मिल गया। पढ़ाई पूरी करने के बाद नीरज झांसी वापस आ गए और कोचिंग पढ़ाने लगे। गौरव को यूएस में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी मिल गई। वहां उन्होंने चार साल तक नौकरी की। नीरज और गौरव के बीच अक्सर बात होती थी कि झांसी के विद्यार्थियों की मेधा को निखारने के लिए कुछ करना चाहिए। तभी दोनों ने एक स्कूल शुरू करने का मन बनाया।
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गौरव यूएस से नौकरी छोड़कर झांसी आ गए और 2009 में महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल का संचालन शुरू कर दिया। दोनों का कहना है कि उनके बीच भरोसे की ऐसी अटूट दीवार है कि किसी भी बात पर मतभेद तक नहीं हुआ। उनका कहना है कि जीवन में सच्चा दोस्त मिल जाए तो राह बहुत आसान हो जाती है।


दोनों परिवारों में अच्छे संबंध, एक-दूसरे के बच्चों को भी पढ़ाया
दोनों आईआईटीयंस दोस्तों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों में भी काफी अच्छे संबंध हैं। नीरज खत्री ने गौरव मिश्रा के बेटे अशिताभ को इंजीनियरिंग की तैयारी करवाई और बेटे को आईआईटी में प्रवेश भी मिल गया। वहीं, गौरव मिश्रा की पत्नी शिक्षिका अनु मिश्रा ने नीरज के दोनों बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाई।
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