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लिफ्ट खराब, स्ट्रेचर, व्हीलचेयर को धक्का देते-देते हांफ जाते तीमारदार
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में वार्ड बिल्डिंग की लिफ्ट तीन सालों से खराब पड़ी हुई है। ऐसे में कोई तीमारदार अपने मरीज को स्ट्रेचर तो कोई व्हील चेयर से ले जाता है। सबसे ऊपर बने मेडिसिन विभाग के वार्ड तक मरीज को ले जाते-जाते तीमारदार हांफ जाते हैं। इसके अलावा ओपीडी और मेडिकल कॉलेज की भी लिफ्ट खराब है।
मेडिकल कॉलेज की वार्ड बिल्डिंग में तीन से लेकर 10 नंबर वार्ड में मरीजों को भर्ती करने के लिए लिफ्ट की जरूरत पड़ती है। पिछले तीन सालों से मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट खराब होने से मरीजों और उनके तीमारदारों को आवागमन में काफी दिक्कत हो रही है। कई बार रोगियों को जांच कराने के लिए दूसरी बिल्डिंगों में जाना पड़ता है। ऐसे में तीमारदार उन्हें व्हीलचेयर पर रैंप के लिए ले जाते हैं। कई गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर के जरिए दूसरी जगहों पर ले जाना पड़ता है। इससे उन्हें काफी परेशानी होती है। साथ ही ओपीडी बिल्डिंग और मेडिकल कॉलेज की भी लिफ्ट खराब पड़ी है।
रोजाना भर्ती होते हैं करीब 75 मरीज
मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 75 मरीजों को वार्ड बिल्डिंग में भर्ती किया जाता है। भूतल के दो वार्ड को छोड़कर बाकी के वार्डों में 50 से ज्यादा मरीजों को भर्ती होने के लिए रैंप का प्रयोग करना पड़ता है।
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वार्ड से लेकर ओपीडी बिल्डिंग की सभी लिफ्ट कंडम हो चुकी हैं। इसकी सूचना भी महानिदेशक को भेजी जा चुकी है। साथ ही लिफ्ट अधिकारी को नया प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज की वार्ड बिल्डिंग में तीन से लेकर 10 नंबर वार्ड में मरीजों को भर्ती करने के लिए लिफ्ट की जरूरत पड़ती है। पिछले तीन सालों से मेडिकल कॉलेज की लिफ्ट खराब होने से मरीजों और उनके तीमारदारों को आवागमन में काफी दिक्कत हो रही है। कई बार रोगियों को जांच कराने के लिए दूसरी बिल्डिंगों में जाना पड़ता है। ऐसे में तीमारदार उन्हें व्हीलचेयर पर रैंप के लिए ले जाते हैं। कई गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर के जरिए दूसरी जगहों पर ले जाना पड़ता है। इससे उन्हें काफी परेशानी होती है। साथ ही ओपीडी बिल्डिंग और मेडिकल कॉलेज की भी लिफ्ट खराब पड़ी है।
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रोजाना भर्ती होते हैं करीब 75 मरीज
मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 75 मरीजों को वार्ड बिल्डिंग में भर्ती किया जाता है। भूतल के दो वार्ड को छोड़कर बाकी के वार्डों में 50 से ज्यादा मरीजों को भर्ती होने के लिए रैंप का प्रयोग करना पड़ता है।
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वार्ड से लेकर ओपीडी बिल्डिंग की सभी लिफ्ट कंडम हो चुकी हैं। इसकी सूचना भी महानिदेशक को भेजी जा चुकी है। साथ ही लिफ्ट अधिकारी को नया प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।