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मंडल के 51 रेलवे स्टेशनों पर हुई इलेक्ट्रॅानिक इंटरलॉकिंग
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झांसी। झांसी रेल मंडल के 51 रेलवे स्टेशनों को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से लैस कर दिया गया है। इससे सुरक्षा के साथ-साथ ट्र्रेनों की गति में भी इजाफा हुआ है। इसके अलावा कर्मचारियों का काम भी कम हो गया है।
रेल प्रशासन द्वारा रेलवे स्टेशनों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से लैस किया जा रहा है। पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड इस पद्धति की वजह से बटन दबाते ही स्वत: ट्रेन क्लियर रूट पर पहुंच जाती है। इसके अलावा सिग्नल फेल होने पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ती है। जबकि, पहले ये सभी काम कर्मचारियों को करने पड़ते थे। इसमें चूक की भी गुंजाइश बनी रहती थी। झांसी रेल मंडल के 108 में से 51 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कर दी गई है। इससे ट्रेनों की गति में भी सुधार हुआ है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ललितपुर-खजुराहो सेक्शन में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के बाद गाड़ियों की रफ्तार 70 से बढ़कर 100 किमी प्रति घंटा हो गई है। इसी तरह से अन्य रेल खंडों में भी ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी है।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग रेल संचालन की अत्याधुनिक पद्धति है। बीते साल 28 स्टेशनों को इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग से जोड़ा गया था। जबकि, इस साल 13 स्टेशनों का लक्ष्य तय किया गया है। इससे गाड़ियों की संरक्षा के साथ-साथ गति में भी वृद्धि हुई है।
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- मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी
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रेल प्रशासन द्वारा रेलवे स्टेशनों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से लैस किया जा रहा है। पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड इस पद्धति की वजह से बटन दबाते ही स्वत: ट्रेन क्लियर रूट पर पहुंच जाती है। इसके अलावा सिग्नल फेल होने पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ती है। जबकि, पहले ये सभी काम कर्मचारियों को करने पड़ते थे। इसमें चूक की भी गुंजाइश बनी रहती थी। झांसी रेल मंडल के 108 में से 51 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कर दी गई है। इससे ट्रेनों की गति में भी सुधार हुआ है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ललितपुर-खजुराहो सेक्शन में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के बाद गाड़ियों की रफ्तार 70 से बढ़कर 100 किमी प्रति घंटा हो गई है। इसी तरह से अन्य रेल खंडों में भी ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी है।
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इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग रेल संचालन की अत्याधुनिक पद्धति है। बीते साल 28 स्टेशनों को इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग से जोड़ा गया था। जबकि, इस साल 13 स्टेशनों का लक्ष्य तय किया गया है। इससे गाड़ियों की संरक्षा के साथ-साथ गति में भी वृद्धि हुई है।
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- मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी